BJP संगठन में बड़ा फेरबदल, स्मृति ईरानी से सुनील बंसल तक नेताओं को मिली राज्यों की जिम्मेदारी
भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में नई जिम्मेदारियों के तहत अपने राष्ट्रीय महामंत्रियों को अलग-अलग राज्यों का प्रभार सौंपा है. पार्टी ने इस फेरबदल में अनुभवी नेताओं के साथ युवा चेहरों को भी अहम जिम्मेदारियां दी हैं. माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनावों और संगठन के विस्तार को ध्यान में रखते हुए नेताओं की जिम्मेदारियां तय की गई हैं.
बीजेपी की नई टीम में स्मृति ईरानी, हरीश द्विवेदी, राम माधव, सतीश पूनिया, सुनील बंसल और अनिल एंटनी जैसे प्रमुख नेताओं को अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारी मिली है. इनमें कुछ नेताओं को उन राज्यों का प्रभार दिया गया है, जहां आने वाले समय में विधानसभा चुनाव होने हैं.
स्मृति ईरानी को हरियाणा और छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को बीजेपी ने हरियाणा और छत्तीसगढ़ का प्रभारी नियुक्त किया है. लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट से हार के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं जरूर हुई थीं, लेकिन पार्टी संगठन में उनकी भूमिका लगातार बनी रही. राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने के बाद अब उन्हें दो बीजेपी शासित राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है. पार्टी संगठन में उनके लंबे अनुभव और सार्वजनिक संवाद की शैली को देखते हुए उन्हें इन राज्यों में संगठन से जुड़े कामों की जिम्मेदारी संभालनी होगी.
हरीश द्विवेदी को बिहार के साथ कर्नाटक का प्रभार
उत्तर प्रदेश के बस्ती से आने वाले हरीश द्विवेदी को बिहार के साथ कर्नाटक का प्रभारी बनाया गया हैय वह पहले भी पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं और बिहार जैसे बड़े राज्य में काम करने का अनुभव रखते हैं. हरीश द्विवेदी बस्ती लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुके हैं. संगठन के स्तर पर उनकी सक्रियता और कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क को देखते हुए बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री की टीम में जगह दी. अब बिहार के साथ कर्नाटक जैसे बड़े राज्य की जिम्मेदारी मिलने से संगठन में उनकी भूमिका और बढ़ गई है.
राम माधव को तमिलनाडु और उत्तराखंड का प्रभार
बीजेपी ने राम माधव को तमिलनाडु के साथ उत्तराखंड का प्रभारी बनाया है. आरएसएस और बीजेपी संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहे राम माधव को रणनीतिक और संगठनात्मक मामलों का अनुभव रखने वाले नेताओं में गिना जाता है. राष्ट्रीय महासचिव के पद से हटने के बाद वह कुछ समय तक संघ के कामकाज से जुड़े रहे. इसके बाद बीजेपी के केंद्रीय संगठन में उनकी वापसी हुई. अब दो राज्यों की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी भूमिका फिर महत्वपूर्ण हो गई है. तमिलनाडु बीजेपी के लिए दक्षिण भारत में विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है, जबकि उत्तराखंड में पार्टी के सामने आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को मजबूत करने की चुनौती है.
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सुनील बंसल के पास बंगाल और तेलंगाना
बीजेपी के प्रमुख संगठनात्मक रणनीतिकारों में शामिल सुनील बंसल को पश्चिम बंगाल और तेलंगाना का प्रभारी बनाए रखा गया है. उत्तर प्रदेश में पार्टी संगठन को मजबूत करने में उनकी भूमिका के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली थीं. संगठन के बूथ स्तर तक काम करने और चुनावी प्रबंधन में उनकी भूमिका को बीजेपी के भीतर काफी अहम माना जाता है. ओडिशा में पार्टी के प्रदर्शन और पश्चिम बंगाल में संगठन विस्तार के बाद भी केंद्रीय नेतृत्व ने उन पर भरोसा कायम रखा है. अब तेलंगाना में पार्टी के संगठन को मजबूत करने और पश्चिम बंगाल में अपने आधार को विस्तार देने की जिम्मेदारी उनके पास रहेगी.
सतीश पूनिया को पंजाब और जम्मू-कश्मीर का प्रभार
राजस्थान के पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और नेता सतीश पूनिया को पंजाब के साथ जम्मू-कश्मीर का प्रभारी बनाया गया है. राजस्थान विधानसभा चुनाव में आमेर सीट से हार के बाद भी पार्टी संगठन में उनकी भूमिका खत्म नहीं हुई. इसके बाद उन्हें हरियाणा की जिम्मेदारी दी गई थी। पार्टी ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार सरकार बनाई. इसके बाद पूनिया को राज्यसभा भेजा गया और बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में महामंत्री की जिम्मेदारी भी मिली. अब पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों का प्रभार मिलने से संगठन में उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है.
अनिल एंटनी को नागालैंड और गोवा की जिम्मेदारी
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ए.के. एंटनी के बेटे अनिल एंटनी को भी बीजेपी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है. बीजेपी में शामिल होने के बाद से ही उन्हें पार्टी ने लगातार संगठनात्मक भूमिकाएं दी हैं. नितिन नवीन की टीम में राष्ट्रीय सचिव बनाए जाने के बाद अब उन्हें नागालैंड का प्रभारी और गोवा का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है. नागालैंड में बीजेपी संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ गोवा में पार्टी के संगठनात्मक कामकाज को आगे बढ़ाना उनके सामने प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा. गोवा में अगले साल विधानसभा चुनाव भी होने हैं, ऐसे में वहां की जिम्मेदारी राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
चुनावी राज्यों पर बीजेपी का फोकस
बीजेपी की नई जिम्मेदारियों में उन राज्यों को खास महत्व दिया गया है, जहां आगामी समय में विधानसभा चुनाव होने हैं. पंजाब, उत्तराखंड और गोवा जैसे राज्यों में संगठन को चुनावी तैयारियों के लिए मजबूत करना पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा. नई टीम में अनुभवी संगठनकर्ताओं और अपेक्षाकृत युवा चेहरों को जिम्मेदारियां देकर बीजेपी ने राज्य स्तर पर संगठन को सक्रिय रखने की रणनीति अपनाई है. अब इन नेताओं की अगली चुनौती अपने-अपने राज्यों में संगठनात्मक गतिविधियों, कार्यकर्ताओं के समन्वय और चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाने की होगी.
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आयुर्वेद दिवस विशेष : रसोई में सेहत का खजाना, इनका सेवन स्वास्थ्य और शरीर के लिए वरदान
नई दिल्ली, 23 सितंबर (आईएएनएस)। प्रत्येक वर्ष 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस मनाया जाता है। इसी क्रम में बुधवार को पूरे देश और दुनिया में 11वां आयुर्वेद दिवस मनाया जा रहा है। इस वर्ष आयुर्वेद दिवस की थीम स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद है। इसका मकसद वैज्ञानिक रिसर्च के जरिए आयुर्वेद को आधुनिक हेल्थकेयर का अहम हिस्सा बनाना है।
आयुर्वेद दिवस मनाने की शुरुआत भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने वर्ष 2016 में धन्वंतरि जयंती के अवसर पर की थी, जिसके बाद से हर वर्ष इस दिवस को मनाया जा रहा है। बहुत से लोग सोचते हैं कि आयुर्वेद का मतलब जड़ी-बूटियों पर आधारित स्वास्थ्य सेवा और उपचार है, लेकिन आयुर्वेद केवल जड़ी-बूटियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण जीवनशैली और दीर्घायु होने का विज्ञान है।
हर व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आयुर्वेद से जुड़ा है, जिसमें सबसे अहम जुड़ाव का माध्यम हमारे घर की रसोई है। रसोई में मौजूद कई चीजें आयुर्वेदिक औषधि के तौर पर भी इस्तेमाल होती हैं। ऐसे में आइए हम आपको आयुर्वेद दिवस के खास अवसर पर आमतौर पर हर किसी की रसोई में इस्तेमाल की जाने वाली कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताते हैं, जिसका आयुर्वेद से गहरा नाता होने के साथ स्वास्थ्य संबंधी कई लाभ हैं।
हल्दी उनमें से ही एक है। इसमें करक्यूमिन नामक सक्रिय यौगिक होता है, जो शरीर की सूजन को कम करने, खून को साफ करने और त्वचा के घावों को भरने में मदद करता है। वहीं, आयुर्वेद में ताजे अदरक को सर्वगुण संपन्न औषधि माना गया है। इसके सेवन से गले की खराश और सीने की जकड़न में राहत मिलती है।
अमूमन सभी के घर की रसोई में मौजूद जीरा का सेवन करने से पाचन शक्ति बढ़ती है। यह पेट की गैस को दूर करता है और शरीर को अंदर से स्वस्थ रखने में मदद करता है। लहसुन रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के साथ हृदय स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है।
सौंफ किचन में इस्तेमाल किया जाने वाला एक ऐसा मसाला है, जिसकी तासीर ठंडी होती है। इसमें मीठी खुशबू होती है, जो पेट की गैस को निकालने में मदद करती है और पाचन को शांत रखने के साथ-साथ सांस को साफ रखती है। ठीक इसी प्रकार मसालों की रानी इलायची पाचन को सुचारु बनाने में मदद करती है और खाने के बाद सांस को साफ रखती है।
मेथी के बीज भी शरीर के लिए काफी अच्छे होते हैं। यह मेटाबॉलिज्म को सही बनाए रखते हैं। वहीं, लौंग को खाने से शरीर को गर्माहट मिलती है। यह दांतों के लिए काफी अच्छा होता है। इससे दांतों के दर्द और मसूड़ों की सूजन से तुरंत राहत मिलती है।
--आईएएनएस
डीके/एबीएम
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