सीएमआरएल केस: केरल सरकार ने विजयन और परिवार के खिलाफ जांच को कानूनी रूप से सही बताया
केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने बुधवार को सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता पिनराई विजयन और उनके परिवार के खिलाफ आरोपों की जांच कराने के राज्य सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह कानूनी सलाह और उच्चतम न्यायालय के फैसलों पर आधारित है तथा इसका उद्देश्य किसी को निशाना बनाना नहीं है। सतीशन ने यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रिपोर्ट के आधार पर पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और उनके दामाद पी. ए. मोहम्मद रियास के खिलाफ कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले में पुलिस जांच कराने के राज्य सरकार के फैसले से जुड़े सवाल का जवाब दिया। ईडी ने सीएमआरएल और एक्सालॉजिक के बीच हुए वित्तीय लेनदेन से जुड़े आरोपों के सिलसिले में विजयन, उनके परिजनों और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।
कांग्रेस नीत सरकार का हालिसा फैसला सीधे प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय जांच आगे बढ़ाने का है। सतीशन ने कहा कि सरकार ने फैसला लेने से पहले आवश्यक कानूनी जांच की है। उन्होंने कहा, ऐसा फैसला लेना सरकार की कानूनी बाध्यता है और अब यह फैसला ले लिया गया है।
माकपा के राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, यह सरकार किसी को निशाना बनाने, पीछे पड़ने या बदले की भावना से काम नहीं कर रही है। जैसा कि मैंने कहा, कानून अपना काम करेगा। सरकार के इस फैसले पर हमला बोलते हुए माकपा ने आरोप लगाया कि एक अजीब स्थिति पैदा हो गई है, जिसमें ऐसा लग रहा है कि राज्य सरकार वामपंथी दल को निशाना बनाने के लिए नरेन्द्र मोदी नीत सरकार से हाथ मिला रही है।
सतीशन ने कहा कि जांच का सामना कर रहे लोगों के पास जांच के दौरान अपना पक्ष रखने के सभी कानूनी अधिकार होंगे। उन्होंने कहा, जब कानून अपना काम करेगा, तो सभी के पास सभी अधिकार उपलब्ध होंगे। जांच के दौरान, उन्हें अपना पक्ष रखने और जो भी बात वे कहना चाहते हैं, उसे प्रस्तुत करने का पूरा अधिकार होगा।
Nandigram Bypoll: कांग्रेस पहुंची Calcutta High Court, BJP उम्मीदवार के हलफनामे पर उठाए सवाल
कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई ने बुधवार को कहा कि उसने नंदीग्राम उपचुनाव में अपने उम्मीदवार मिलन प्रधान की जमानत के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया है और पार्टी ने भाजपा प्रत्याशी हासीरानी रथ के हलफनामे में कथित विसंगतियों को चुनौती देते हुए एक रिट याचिका भी दायर की। कांग्रेस ने कहा कि रिट याचिका में, हलफनामे में कथित विसंगतियों और इस मामले में निर्वाचन आयोग की ‘‘कार्रवाई या निष्क्रियता’’ की न्यायिक समीक्षा का भी अनुरोध किया गया है। नंदीग्राम में उपचुनाव छह अक्टूबर को होना है।
चुनाव प्रचार चार अक्टूबर को खत्म हो जाएगा और मतगणना नौ अक्टूबर को होगी। नंदीग्राम में 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों के सिलसिले में प्रधान को पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया गया था। 2007 के मामले में चार लंबित गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट को लेकर एक अदालत ने उन्हें तीन अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
एक अन्य अदालत ने उन्हें दो दशक पुराने शस्त्र अधिनियम से जुड़े मामले में पांच अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। कांग्रेस ने अपनी रिट याचिका में दावा किया कि भाजपा उम्मीदवार रथ के हलफनामे में कहा गया है कि उनकी उम्र ‘‘60 साल से अधिक’’ है और उन्होंने 1965 में 10वीं कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, जिससे उनकी उम्र और शैक्षणिक योग्यता हासिल करने के समय में विसंगति का पता चलता है। रथ ने हलफनामे में अपनी जन्मतिथि का जिक्र नहीं किया और अपनी आयु ‘‘60 साल से अधिक’’ बताई है।
शैक्षणिक योग्यता वाले ‘कॉलम’ में, रथ ने बताया कि उन्होंने 1965 में चौखली गंगा पद्मा मिलन कन्या विद्यापीठ (उच्च माध्यमिक) से 10वीं कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। ये प्रविष्टियां एक समान नहीं हैं। अगर रथ 2026 में 60 वर्ष की थीं, तो उनका जन्म 1966 के आसपास हुआ होगा, यानी 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के एक साल बाद, जैसा कि चुनावी हलफनामे में बताया गया है।
अगर वह 65 साल की थीं, तो उनका जन्म 1961 के आसपास हुआ होगा, जिसका मतलब है कि उन्होंने लगभग चार साल की उम्र में 10वीं कक्षा उत्तीर्ण कर ली थी। इसके उलट, यदि उन्होंने 10वीं कक्षा आम तौर पर 14-16 साल की उम्र में उत्तीर्ण की होगी, तो उनका जन्म 1949-51 के आस-पास हुआ होगा, जिससे 2026 में उनकी उम्र लगभग 75-77 साल होगी। कांग्रेस ने एक बयान में कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शुभंकर सरकार के निर्देशों पर अमल करते हुए, पार्टी ने आज कलकत्ता उच्च न्यायालय में, नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की ओर से जमानत याचिका दायर की।
साथ ही, भाजपा प्रत्याशी हासीरानी रथ द्वारा जमा किए गए हलफनामे और उसमें कथित विसंगतियों पर निर्वाचन आयोग के जवाब से जुड़ी एक रिट याचिका दायर की।’’ बयान में कहा गया है कि रिट कार्यवाही के लिए, सरकार ने मीता चक्रवर्ती को प्रदेश कांग्रेस की वकील और प्रतिनिधि के तौर पर काम करने के लिए अधिकृत किया है। इसमें वकालतनामा पर हस्ताक्षर करना और वकीलों को नियुक्त करना भी शामिल है। चक्रवर्ती प्रदेश कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग की अध्यक्ष तथा दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस कमेटी की प्रमुख हैं।
बयान के अनुसार, अधिवक्ता अजितेश पांडे एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड हैं।
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