ट्रंप के 'फेल्ड स्टेट' बताने पर भड़का क्यूबा, UNGA से डिप्लोमैट्स का वॉकआउट
क्यूबा के विदेश मंत्री ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फैलाई गई झूठी बातों पर कड़ा विरोध जताया। ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में कहा था कि यह द्वीप गिर जाएगा। न्यूयॉर्क में UN जनरल असेंबली में ट्रंप के भाषण के दौरान क्यूबा के प्रतिनिधि कमरे से बाहर चले गए; यह घटना ऐसे समय में हुई जब वाशिंगटन और हवाना के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण हैं। उनके प्रशासन ने जनवरी में द्वीप पर ऊर्जा की नाकेबंदी लागू की और तब से कई और कदम उठाए हैं। साथ ही, उन्होंने खुले तौर पर इस इलाके पर कब्ज़ा करने की बात भी कही है। क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने अपने देश की संप्रभुता पर ज़ोर दिया। यह बात उन्होंने तब कही जब ट्रंप ने कहा कि क्यूबा गिर जाएगा हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि ऐसा कैसे होगा।
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रोड्रिगेज ने एक्स पर लिखा कि अमेरिकी सरकार यह मानने में असमर्थ है कि क्यूबा एक पूरी तरह से संप्रभु और स्वतंत्र देश है और उसे ऐसा होने का अधिकार है। उन्होंने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा कही गई कोई भी झूठी बात इस सच्चाई को नकार नहीं सकती। न्यूयॉर्क में क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे रोड्रिगेज ने कहा कि हम शांतिप्रिय देश हैं और हम शांति के हकदार हैं। राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल ने भी ट्रंप की आक्रामक बयानबाज़ी की निंदा की।
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उन्होंने एक्स पर लिखा कि क्यूबा के लोगों के ख़िलाफ़ सज़ा और उनके ख़िलाफ़ नरसंहार जैसे आर्थिक युद्ध को सही नहीं ठहरा पाने के कारण, अमेरिका के राष्ट्रपति UN में बार-बार यह कह रहे हैं कि क्यूबा एक ख़तरा है। उन्होंने कहा कि झूठ उन लोगों का हथियार है जो क्यूबा के लोगों के आत्म-निर्णय के अधिकार को स्वीकार करने से इनकार करते हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि फ्लोरिडा के तट से 150 किलोमीटर (90 मील) दूर स्थित यह कम्युनिस्ट द्वीप अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए "बहुत बड़ा ख़तरा" है।
ऐसी क्या नौबत आ गई कि कैबिनेट सेक्रेटरी को चिट्ठी लिखनी पड़ी? EC विवाद पर पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने उठाए बड़े सवाल
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद और SIR को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने कई अहम मुद्दों पर बात की. कैबिनेट सचिव को चिट्ठी लिखने से लेकर फैसलों में सहमति और असहमति तक, लवासा ने पूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने यह भी बताया कि अलग राय होना गलत नहीं है, लेकिन विवाद की स्थिति संस्था की छवि पर असर डाल सकती है.
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