Jamui छेड़छाड़ मामले में NDA और विपक्ष के बीच तेज हुई जुबानी जंग
बिहार के जमुई जिले में नाबालिग छात्र और छात्रा के साथ कथित छेड़छाड़ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है, क्योंकि सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के नेताओं ने जहां इस घटना की निंदा करते हुए कानून के तहत कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है, वहीं विपक्ष ने इसे महिलाओं की सुरक्षा में सरकार की विफलता और लचर कानून-व्यवस्था की संज्ञा दी है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस घटना को दुखद एवं दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए बुधवार को कहा कि राज्य को नकारात्मक मानसिकता वाले लोगों से बचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि चरित्र निर्माण समाज में सद्भाव और भाईचारे को बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
सिन्हा ने कहा, ‘‘इस तरह की घटनाओं से बिहार की छवि को नुकसान होता है। राज्य में न जंगल राज लौटेगा और न गुंडाराज आएगा। बिहार में बिहारियों का राज रहेगा।’’ भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने भी घटना को निंदनीय बताते हुए कहा कि अपराधियों की कोई जाति नहीं होती, अपराध ही उनका परिचय है।
उन्होंने कहा कि घटना के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और पीड़िता तथा उसके परिवार के साथ पूरा समाज खड़ा है। पार्टी सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि पुलिस ने घटना का तत्काल संज्ञान लेकर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा, ‘‘यह लालू प्रसाद यादव का राज नहीं, बल्कि सम्राट चौधरी का राज है।
हर अन्याय के खिलाफ कानून अपना काम करेगा और दोषियों को सजा मिलेगी।’’ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस घटना को लेकर मंगलवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से इस्तीफे की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। इस बीच, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के उस बयान पर नया विवाद खड़ा हो गया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि एक खास जाति के लोगों ने सरकार को बदनाम करने की नीयत से घटना का वीडियो वायरल किया।
उन्होंने तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधा था। पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर मांझी के बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि यादव होना अपराध है तो विभिन्न दलों और सरकारों में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे यादव नेताओं पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
पप्पू यादव ने भूपेंद्र यादव, नित्यानंद राय, अन्नपूर्णा देवी, मोहन यादव, विजेंद्र यादव और रामकृपाल यादव समेत कई नेताओं का उल्लेख करते हुए संपूर्ण यादव समाज को निशाना बनाए जाने पर आपत्ति जताई। उधर, बिहार प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. कुमारी सोनी ने घटना को अत्यंत निंदनीय बताते हुए कहा कि यह महिलाओं की सुरक्षा के मोर्चे पर सरकार की विफलता को दर्शाती है। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त और निगरानी बढ़ाने की मांग की, ताकि महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
ADAG के पूर्व अधिकारी अमिताभ झुनझुनवाला को Delhi High Court से मिली राहत, मेडिकल आधार पर जमानत मंजूर
दिल्ली उच्च न्यायालय ने अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी अमिताभ झुनझुनवाला को कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन मामले में जमानत दे दी है। उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति मधु जैन ने कहा कि 70 वर्षीय आरोपी को ‘‘व्यवस्थित और लगातार चिकित्सा देखभाल’’ की आवश्यकता है, इसलिए वह धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ‘‘अस्वस्थ या अशक्त’’ व्यक्ति को जमानत देने के लिए निर्धारित वैधानिक अपवाद का लाभ पाने के हकदार हैं। न्यायाधीश ने कहा कि अदालत के समक्ष उपलब्ध सामग्री से ‘‘बढ़ती उम्र, रीढ़ की गंभीर समस्या, ऑस्टियोपोरोसिस, निगरानी में पुनर्वास की आवश्यकता और लगातार उपचार की जरूरत वाली पहले से मौजूद हृदय संबंधी बीमारी’’ का मामला सामने आया है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में 15 अप्रैल को झुनझुनवाला को गिरफ्तार किया था। आरोपी ने स्वास्थ्य आधार पर नियमित जमानत की मांग की थी। जांच एजेंसी ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए दावा किया कि याचिकाकर्ता ‘‘बीमार’’ या ‘‘अशक्त’’ होने की तय सीमा को पूरा नहीं करता है।
ईडी ने दलील दी कि आरोपी की स्वास्थ्य स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है और सरकारी अस्पतालों द्वारा सुझाई गई जांच एवं उपचार की सुविधा को हिरासत में उपलब्ध चिकित्सा व्यवस्था के जरिए मुहैया कराया जा सकता है। मंगलवार को सुनाए गए फैसले में अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया कि जमानत देने के लिए पीएमएलए की धारा 45(1) के प्रावधान के तहत ‘‘बीमार या अशक्त’’ होने के आधार पर राहत देने से पहले आरोपी की स्थिति ‘‘जीवन के लिए अपरिवर्तनीय या आसन्न खतरे’’ तक पहुंचना जरूरी है। अदालत ने कहा कि चिकित्सा अपवाद का उद्देश्य यह इंतजार करना नहीं है कि अपर्याप्त उपचार के कारण स्थिति अपरिवर्तनीय हो जाए, बल्कि उचित मामलों में समय रहते हस्तक्षेप की अनुमति देना है।
अदालत ने झुनझुनवाला को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानतों पर रिहा करने का निर्देश दिया। अदालत ने पासपोर्ट जमा करने, अनुमति के बिना देश से बाहर यात्रा नहीं करने और गवाहों को प्रभावित नहीं करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने समेत अन्य शर्तें भी लगाईं। इस मामले में जांच अनिल अंबानी समूह की कंपनियों जैसे रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) के जरिये कथित रूप से शेल या फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल करके किए गए बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़ी है।
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