भारत-न्यूजीलैंड एफटीए और रणनीतिक साझेदारी से व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग को मिली नई रफ्तार
नई दिल्ली, 23 सितंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जुलाई 2026 में न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाए जाने के बाद भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक, सामरिक और समुद्री सहयोग को नई गति मिली है। लोवी इंस्टीट्यूट द्वारा प्रकाशित एक लेख के अनुसार, न्यूजीलैंड की संसद द्वारा मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की पुष्टि किए जाने के बाद दोनों देश अपने पहले द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।
यह एफटीए दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को मौजूदा सीमित स्तर से आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। वहीं समुद्री सहयोग रक्षा संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
लेख में कहा गया है कि न्यूजीलैंड भारत को ओशिनिया क्षेत्र से मजबूत जुड़ाव प्रदान करता है, जिससे भारत के मुक्त, खुला, समावेशी और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक के विजन का भौगोलिक विस्तार होता है। साथ ही भारत को केवल क्वाड तक सीमित रहने के बजाय द्विपक्षीय साझेदारियों के माध्यम से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का अवसर मिलता है।
एफटीए पूरी तरह लागू होने के बाद न्यूजीलैंड के लगभग 95 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क समाप्त या कम हो जाएगा, जबकि भारतीय उत्पादों को भी न्यूजीलैंड के बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 4 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
लेख में कहा गया है कि अमेरिकी व्यापार नीतियों से उत्पन्न वैश्विक शुल्क अनिश्चितताओं के बीच भारत जैसा बड़ा और तेजी से बढ़ता बाजार न्यूजीलैंड के लिए विशेष महत्व रखता है।
दूसरी ओर, न्यूजीलैंड भारत के लिए उन्नत अनुसंधान, शिक्षा, निवेश, कृषि और खाद्य प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं प्रदान करता है। न्यूजीलैंड के लिए भी भारत के साथ संबंध मजबूत करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसका व्यापार अभी भी काफी हद तक चीन, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे पारंपरिक साझेदारों पर केंद्रित है।
लेख में बताया गया है कि वर्ष 2025 में न्यूजीलैंड के कुल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी केवल 1.8 प्रतिशत थी। एफटीए लागू होने के बाद इस हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, हाइड्रोग्राफी, लॉजिस्टिक्स और सूचना साझा करने पर सहमति ने रक्षा सहयोग को भी नया आयाम दिया है। इसके तहत न्यूजीलैंड के भारत की इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (आईपीओआई) के समुद्री सुरक्षा स्तंभ से जुड़ने का मार्ग खुला है।
लेख के अनुसार, इससे भौगोलिक रूप से दूर स्थित दोनों देशों को समुद्री जागरूकता, सुरक्षित समुद्री मार्ग, आपदा राहत एवं प्रतिक्रिया तथा साझा समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
--आईएएनएस
डीबीपी
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UP Election 2027: औरैया की 3 सीटों पर बिछी चुनावी बिसात...
Kursi Ka Countdown: 17 सितंबर 1997 को दो तहसीलों औरैया और बिधूना को जिला इटावा से अलग करके नए जिले औरैया के रूप में जोड़ा गया. जिला औरैया राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 2 (मुगल सराय रोड) पर स्थित है, यह इटावा जिला मुख्यालय के पूर्व में 64किमी और कानपुर शहर के पश्चिम में 105 किमी की दूरी पर है. औरैया में 7 ब्लाक हैं जिनके नाम हैं,औरैया, अजीतमल, बिधूना, सहार, अछल्दा, भाग्यनगर, एरवाकटरा. ‘कुर्सी का काउंटडाउन’ की इस सीरीज में आज बात औरेया की…
औरैया जिले की तीन विधानसभा सीटों में फिलहाल समाजवादी पार्टी का दबदबा है. बिधूना (202) सीट पर 2022 में सपा की रेखा वर्मा ने भाजपा की रिया शाक्य को हराया था, जबकि दिबियापुर (203) में सपा के प्रदीप कुमार यादव ने भाजपा के लाखन सिंह राजपूत को महज 473 वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी. वहीं, औरैया-एससी (204) सीट भाजपा के पास है, जहां 2022 में गुड़िया कठेरिया ने सपा के जितेंद्र कुमार दोहरे को हराया था. इस तरह जिले की तीन सीटों में दो पर सपा और एक पर भाजपा का कब्जा है.
औरैया जिले की कुल जनसंख्या और साक्षरता दर
2011 की जनगणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश के औरैया जिले की कुल आबादी 13,79,545 है, जिसमें करीब 7.39 लाख पुरुष और 6.40 लाख महिलाएं हैं. जिले की साक्षरता दर 78.95% है. पुरुषों की साक्षरता दर 86.11%, जबकि महिलाओं की साक्षरता दर 70.61% है. यहां लिंगानुपात 1000 पुरुषों पर 864 महिलाएं हैं और जनसंख्या घनत्व 681 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है.
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औरैया जिले की धार्मिक जनसंख्या
2011 की जनगणना के अनुसार, औरैया जिले में हिंदू धर्म मानने वाली आबादी सबसे अधिक है. जिले की कुल 13,79,545 आबादी में करीब 92.32 फीसदी यानी 12,73,546 लोग हिंदू हैं. इसके बाद मुस्लिम आबादी 7.39 फीसदी यानी 1,01,963 है. जिले में ईसाई समुदाय की आबादी 0.07 फीसदी (1,004), सिख समुदाय की 0.03 फीसदी (371), बौद्ध समुदाय की 0.02 फीसदी (332) और जैन समुदाय की 0.02 फीसदी (228) है.
आइये सिलसिलेवार ढंग से जानते हैं, एक-एक सीट के बारे में...
1. औरैया (SC) सीट
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में औरैया जिले की औरैया (एससी) विधानसभा सीट (204) से बीजेपी की गुड़िया कठेरिया ने जीत दर्ज की थी. उन्हें कुल 88,631 वोट (45.56%) मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के जितेंद्र कुमार दोहरे 66,184 वोट (33.82%) के साथ दूसरे स्थान पर रहे. बहुजन समाज पार्टी के रवि शास्त्री दोहरे को 36,159 वोट (18.48%) मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे. गुड़िया कठेरिया ने जितेंद्र कुमार दोहरे को 22,447 वोटों के अंतर से हराया था.
2. बिधूना (202) सीट
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में औरैया जिले की बिधूना (202) सीट पर समाजवादी पार्टी की रेखा वर्मा (97,257 वोट, 42.60%) ने भाजपा की रिया शाक्य (89,492 वोट, 39.38%) को 7,765 वोटों के अंतर से हराया, जबकि बसपा के गौरव रघुवंशी (32,220 वोट, 14.18%) तीसरे स्थान पर रहे.
3. दिबियापुर (203) सीट
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में औरैया जिले की दिबियापुर विधानसभा सीट (203) पर बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिला. समाजवादी पार्टी के प्रदीप कुमार यादव ने 80,865 वोट (40.53%) हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि बीजेपी के लाखन सिंह राजपूत को 80,392 वोट (40.29%) मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे. वहीं, बहुजन समाज पार्टी के अरुण कुमार दुबे (लाले दुबे) को 31,500 वोट (15.79%) मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे. प्रदीप कुमार यादव ने लाखन सिंह राजपूत को महज 473 वोटों के अंतर से हराया था.
अब आगे क्या होगा?
औरैया जिले की तीनों विधानसभा सीटों बिधूना (202), दिबियापुर (203) और औरैया (204) में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सपा और भाजपा के बीच मुकाबले की चर्चा है. मौजूदा स्थिति में बिधूना और दिबियापुर से समाजवादी पार्टी की रेखा वर्मा और प्रदीप कुमार यादव विधायक हैं, जबकि औरैया (एससी) सीट से भाजपा की गुड़िया कठेरिया विधायक हैं.
बिधूना सीट के बारे में राजनीतिक चर्चाओं में स्थानीय सामाजिक और जातीय समीकरणों को अहम बताया जाता है, जबकि दिबियापुर में पिछले विधानसभा चुनावों के नतीजों के आधार पर सपा और भाजपा के बीच करीबी मुकाबले का इतिहास रहा है. वहीं, औरैया (एससी) सीट पर भाजपा के सामने अपनी मौजूदा स्थिति बनाए रखने की चुनौती और स्थानीय मुद्दों की भूमिका को लेकर चर्चा होती रही है. हालांकि, 2027 का चुनाव अभी भविष्य में है, इसलिए फिलहाल किसी सीट के संभावित नतीजे को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी.
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