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पीएमजी 3000 से अधिक परियोजनाओं की कर रहा निगरानी : पीयूष गोयल

नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। सरकार का प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप (पीएमजी) फिलहाल 78 लाख करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले 3,000 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स की निगरानी कर रहा है। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को दी।

उन्होंने बताया कि अब तक पीएमजी ने 94 प्रतिशत मामलों में समस्याओं का समाधान कर दिया है, जिससे विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के निर्माण में मदद मिली है।

पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के साथ विकसित भारत 2047 की ओर बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए पीएमजी बड़े प्रोजेक्ट्स के कार्यान्वयन को तेज करने के लिए एक अहम संस्थागत व्यवस्था बना हुआ है।”

उन्होंने कहा कि तय समय में समस्याओं का समाधान करने और अड़चनों को दूर करने के कारण पीएमजी भारत की परियोजना क्रियान्वयन व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है।

पियूष गोयल ने कहा कि जैसे-जैसे भारत विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है, पीएमजी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। इससे प्रोजेक्ट्स तेजी से पूरे हो रहे हैं, निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और कारोबार करने में आसानी हुई है।

पीएमजी एक संस्थागत व्यवस्था है, जो 500 करोड़ रुपए या उससे अधिक निवेश वाले प्रोजेक्ट्स की चरणबद्ध निगरानी करती है और उनकी समस्याओं व नियमों से जुड़ी अड़चनों को तेजी से दूर करने में मदद करती है।

इसकी स्थापना 2013 में कैबिनेट सचिवालय में एक विशेष सेल के रूप में की गई थी और 2015 में इसे प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रशासनिक नियंत्रण में लाया गया।

फिलहाल पीएमजी निवेश इंडिया, उद्योग और आंतरिक व्यापार विभाग, वाणिज्य मंत्रालय के तहत कार्य कर रहा है। इसे निवेशकों के लिए एक ही जगह सभी सुविधाएं देने के उद्देश्य से लाया गया, ताकि निवेश प्रक्रिया की समस्याओं के समाधान में मदद मिल सके।

पीएमजी सार्वजनिक, निजी और सार्वजनिक-निजी भागीदारी से जुड़े मध्यम और बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दिलाने, नीतिगत मुद्दों को सुलझाने और बाधाओं को दूर कर परियोजनाओं को तेजी से पूरा कराने में सहायता करता है।

सरकार के अनुसार, पीएमजी जिन प्रोजेक्ट्स की निगरानी करता है, वे ज्यादातर बुनियादी ढांचे से जुड़े होते हैं, हालांकि तय मानकों को पूरा करने वाले अन्य क्षेत्रों के प्रोजेक्ट्स को भी इसमें शामिल किया जाता है।

--आईएएनएस

एएमटी/एमएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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बुढ़ापे को दूर भगाने में दवा की तरह काम करती है स्वर्ण भस्म, जान लें सेवन का सही तरीका

नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। सदियों से कई प्रकार की बीमारियों के उपचार के लिए आयुर्वेदिक औषधियों को प्रयोग में लाया जाता रहा है।

औषधियों के अलावा भी आयुर्वेद में कई और तरीकों से गंभीर से गंभीर बीमारी का इलाज होता है, जैसे कि भस्म से। आयुर्वेद में लोह भस्म, स्वर्ण भस्म, रजत भस्म और शंख भस्म का इस्तेमाल बीमारियों से निजात दिलाने में होता आया है। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि चीन और मिस्र में भी धातु भस्म से उपचार करने का तरीका सालों से अपनाया जा रहा है। आज हम आपको स्वर्ण भस्म के बारे में बताएंगे।

चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और अष्टांग हृदय में स्वर्ण भस्म के बारे में बताया गया है। ये बाकी सोने के कणों के कई बार शोधन करने के बाद तैयार होती है और सोने के जैसी ही महंगी होती है। सोने की बढ़ती कीमत के साथ भस्म की कीमत में भी उछाल आता है। चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और अष्टांग हृदय में स्वर्ण भस्म को क्षय रोग, एनीमिया, खांसी, दुर्बलता, बांझपन और मांसपेशियों की दुर्बलता के लिए किया गया है। इसके साथ ही त्वचा को जवान बनाए रखने में मदद करती है।

स्वर्ण भस्म दिल की बीमारियों से दूर रखती है। सोने में क्रोनिक डिसऑर्डर यानी पुरानी गंभीर बीमारियों को ठीक करने का गुण होता है और दिल की कुछ बीमारियां क्रोनिक डिसऑर्डर के दायरे में आती हैं। इसलिए अगर दिल को जवान रखना है तो आप स्वर्ण भस्म खा सकते हैं।

आयुर्वेद कहता है कि स्वर्ण भस्म का इस्तेमाल सालों से इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में होता आया है। सोने के कण शरीर की कोशिकाओ को एक्टिव करते हैं और मौसम में बदलाव के साथ होने वाले संक्रमण को भी रोकते हैं। स्वर्ण भस्म का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को धीरे-धीरे बढ़ाता है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने का काम करते हैं।

अगर शरीर में रक्त की कमी रहती है और दवा लेने पर भी हीमोग्लोबिन नहीं बढ़ता है तो स्वर्ण भस्म का सेवन किया जा सकता है। स्वर्ण भस्म शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने में सहायक लाल रक्त कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है। अगर मानसिक तनाव है और बिना वजह मन उदास रहता है, तभी भी स्वर्ण भस्म का सेवन किया जा सकता है।

आयुर्वेद में स्वर्ण भस्म को मानसिक रोगों से निपटने की बेहतरीन दवा माना गया है। हालांकि किसी भी परेशानी में भस्म का सेवन चिकित्सक की सलाह के साथ ही करें, क्योंकि इसका सेवन अलग-अलग मात्रा में बीमारियों के हिसाब से किया जाता है। गर्भवती महिला और बच्चों को इसके सेवन से पहले चिकित्सक से विशेष सलाह लेनी चाहिए।

--आईएएनएस

पीएस/एमएस

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