2 अक्टूबर का टेस्ट पास कर पाएगी 'हनुमान अंश'? क्या थिएटर में 100 दिन तक चलेगी? OTT पर कब रिलीज होगी फिल्म?
डॉ विशाल चतुर्वेदी के डायरेक्शन में बनी और नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित भक्ति फिल्म 'हनुमान अंश' इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बना रही है. सिर्फ 2 करोड़ के लिमिटेड बजट में बनी इस फिल्म ने रिलीज के 47 दिनों में भारत में 280.93 करोड़ कमाए हैं, जिससे लगभग 13946.50% का हिस्टोरिक प्रॉफिट हुआ है. दर्शक अब इसके OTT रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. हाल ही में फिल्म की को-प्रोड्यूसर रागिनी सोना ने 100 करोड़ के OTT ऑफर की अफवाहों को दूर किया और फिल्म के 100 दिनों के थिएटर में चलने के टारगेट और इसके डिजिटल प्रीमियर के बारे में जरूरी जानकारी शेयर की.
छुट्टी का नया ट्रेंड; घूमना कम, ठहरना ज्यादा:होमस्टे खुद बना डेस्टिनेशन; भारतीय युवाओं को अब सिर्फ सुकून चाहिए, सेल्फी नहीं
भारत में छुट्टियों को लेकर लोगों का व्यवहार बदल रहा है और यह बदलाव ट्रैवल-हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री के लिए नया कारोबारी मौका बनता जा रहा है। सैलानी अब ‘ज्यादा देखने’ की बजाय ‘कम करने’ को तरजीह दे रहे हैं। कंपनियां इसी डिमांड के हिसाब से अपनी रणनीति बदल रही हैं। एयरबीएनबी के 2026 इंडिया जेन-जी सर्वे (11 शहरों में) के मुताबिक 64% यात्री जानबूझकर यात्रा का पूरा शेड्यूल या रूट-प्लान अधूरा रखते हैं, जबकि दो-तिहाई का मकसद ही आराम और स्लो-डाउन है। यह सिर्फ लाइफस्टाइल ट्रेंड नहीं, बुकिंग पैटर्न में सीधा बदलाव है। 78% यात्री अपने कुल ट्रिप टाइम का आधा हिस्सा सिर्फ अपने स्टे में बिताते हैं, और 63% ने किसी खास प्रॉपर्टी की वजह से ही डेस्टिनेशन चुना। यानी अब स्टे खुद डेस्टिनेशन बन रहा है, और होटल-होमस्टे कारोबारियों के लिए यह एक नया रेवेन्यू (आय) एंगल है। नैनीताल के पास पैंगोट में हाई-एंड होमस्टे ‘द स्लो हाउस’ चलाने वाली गुंजन विज इसे कारोबारी नजरिए से बताती हैं। उन्होंने बताया, ‘पूरी विला एक ही ग्रुप को बुक होती है, कोई शेयर्ड डाइनिंग या लॉबी नहीं, और यह मॉडल ऑफ-सीजन में भी 70-80% ऑक्यूपेंसी बनाए रखता है।’ वह कहती हैं, ‘प्राइवेसी और खाली समय बेचना महंगा तो है, पर मांग असली है।’ मेहमान अब आसपास घूमने की जगहों की बजाय यह पूछते हैं कि क्या कोई शेड्यूल तो नहीं है। यानी प्रॉपर्टी की मार्केटिंग खुद बदल रही है। बुकिंग ट्रेंड में भी यह शिफ्ट साफ है। हर 10 में से 7 यात्री लंबी सालाना छुट्टी की बजाय तीन छोटी ट्रिप को तरजीह देते हैं। 87% की ट्रिप एक हफ्ते से कम की होती है। इसी वजह से डोमेस्टिक शॉर्ट-स्टे (2-6 रात) में करीब 80% की वृद्धि दर्ज हुई है। ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स के लिए इसका मतलब है- कम दिनों की, बार-बार होने वाली बुकिंग पर फोकस बढ़ाना। काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट आयुषी पाटनी के मुताबिक, यह डिमांड बर्नआउट और रिमोट वर्क कल्चर से जुड़ी है। लोग अब छुट्टी में भी प्रोडक्टिविटी नहीं चाहते। यही वजह है कि शहरों से दूर, शांत डेस्टिनेशन की सर्च तेजी से बढ़ रही है, जो छोटे और नए हॉस्पिटैलिटी ऑपरेटरों के लिए बड़े शहरों के महंगे होटल मार्केट से अलग एक नया सेगमेंट खोल रहा है। ट्रैवल ब्लॉगर, स्लो-ट्रैवल ग्रुप ट्रिप होस्ट कनक अग्रवाल कहती हैं कि सोशल मीडिया ज्यादातर सैलानियों को चेकलिस्ट टूरिज्म की तरफ धकेलता है, इसलिए यह अभी एक छोटा, लेकिन तेजी से बढ़ता सेगमेंट है- प्रीमियम प्राइसिंग की गुंजाइश के साथ। देश के टियर-2/3 शहरों में नए होमस्टे-हॉस्पिटैलिटी निवेश के मौके बढ़ रहे ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म एगोडा की 2026 रिपोर्ट के मुताबिक 67% भारतीय यात्रियों के लिए छुट्टी की मुख्य वजह “रिलैक्सेशन’ है। इसकी हॉस्पिटैलिटी राइजिंग रिपोर्ट में धर्मशाला, ऋषिकेश और उत्तरकाशी जैसी शांत जगहों की सर्च में सालाना बढ़ोतरी देखी गई। एयरबीएनबी के अगस्त 2026 डेटा में मानसून डोमेस्टिक सर्च सालाना करीब 40% बढ़ी, जिससे टियर-2/3 शहरों में नए होमस्टे-हॉस्पिटैलिटी निवेश की संभावना बन रही है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News18








