Meghalaya BJP Political Shift: मेघालय में भाजपा का बड़ा सियासी दांव- UDP के 8 विधायक बीजेपी में शामिल, दो से 10 हुई विधायकों की संख्या
मेघालय में क्षेत्रीय राजनीति को बड़ा झटका देते हुए यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के आठ प्रमुख विधायकों ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा की मौजूदगी में इन सभी नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। पूर्वोत्तर में भाजपा के विस्तार की दिशा में इसे एक बड़ा राजनीतिक कदम माना जा रहा है।
8 नए विधायकों के आने से राज्य विधानसभा में भाजपा न केवल पहले से अधिक शक्तिशाली हुई है, बल्कि सदन के भीतर उसका राजनीतिक वजन भी काफी बढ़ गया है।
यूडीपी के आठ प्रमुख विधायकों का भाजपा में विलय
भाजपा में शामिल होने वाले आठ विधायकों में लखमेन रिम्बुई, पायस मारवेन, किर्मेन श्यल्ला, मायरालबॉर्न सिएम, मैथ्यू कुर्बाह, ओलन सिंह सुइन, बालाजीड कुपार सिनरेम और सिनशर लिंगडोह थबाह शामिल हैं। इन सभी नेताओं ने नई दिल्ली में पूरी औपचारिकता के साथ पार्टी की सदस्यता ली। इनके आने से मेघालय की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी यूडीपी को तगड़ा झटका लगा है और विधानसभा में उसके पास विधायकों का आंकड़ा काफी घट गया है।
#WATCH | Delhi: At a press conference, Union Minister of Parliamentary Affairs, Kiren Rijiju, says, "... We welcome eight elected members of the assembly, MLAs of Meghalaya, into the BJP family. They earlier belonged to UDP, a very prominent regional party. Looking at the progress of Northeast and Meghalay under Prime Minister Narendra Modi in last 12 years and the transformation which has taken place the heart to heart connection of Narendra Modi Ji with the people of Northeast and the way BJP has changed the politics of development in northeast. All eight MLAs are extremely impressed and influenced by Modi Ji and our BJP-led government's performance..."
— ANI (@ANI) September 23, 2026
'पीएम मोदी के विकास कार्यों से प्रभावित होकर लिया फैसला'
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी आठों विधायकों का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष लगाव और पिछले 12 वर्षों में हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास इस फैसले का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि ये सभी विधायक केंद्र सरकार के प्रदर्शन और नीतियों से प्रभावित होकर भाजपा से जुड़े हैं। इस बदलाव से पूर्वोत्तर के राज्यों में भाजपा के नेतृत्व और विकास मॉडल पर जनता व नेताओं का भरोसा और मजबूत हुआ है।
4 प्रमुख जनमुद्दों पर सहमति के बाद बनी बात
यह राजनीतिक बदलाव अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से बातचीत चल रही थी। इन विधायकों ने भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के सामने राज्य के 4 बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे रखे थे- खासी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना, कोयला खनन से जुड़े प्रतिबंधों व नियमों का समाधान, मेघालय रेजिडेंट्स सेफ्टी एंड सिक्योरिटी एक्ट को लागू करना और शिलांग की हरिजन कॉलोनी को दूसरी जगह स्थानांतरित करना। इन मांगों पर शीर्ष नेतृत्व से मिले आश्वासन के बाद ही विलय का रास्ता साफ हुआ।
मेघालय के सत्ता समीकरण और भविष्य पर असर
8 विधायकों के एक साथ पाला बदलने से मेघालय विधानसभा में भाजपा की ताकत सीधे 2 से बढ़कर 10 हो गई है। 60 सदस्यीय विधानसभा के लिहाज से यह आंकड़ा बेहद महत्वपूर्ण है।
हालांकि इस घटनाक्रम से राज्य सरकार के मौजूदा कामकाज पर तत्काल कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा, लेकिन इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि मेघालय में अब क्षेत्रीय दलों के एकाधिकार को चुनौती मिल रही है और भाजपा मुख्यधारा की राजनीति में बेहद मजबूत भूमिका में आ चुकी है।
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