Video | लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचे गोविंदा, भीड़ में फंसा देखकर को-स्टार कोमल रानी ने खींचा हाथ, वीडियो हुआ वायरल
बॉलीवुड के 'हीरो नंबर-1' गोविंदा मंगलवार शाम (22 सितंबर) मुंबई के बेहद प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित गणपति पंडाल 'लालबागचा राजा' का आशीर्वाद लेने पहुंचे। गोविंदा के साथ उनकी बहुचर्चित कमबैक फिल्म 'रूपा' की सह-कलाकार (को-स्टार) कोमल रानी स्वर्णकार भी नज़र आईं। दोनों के एक साथ पंडाल पहुँचते ही वहां मौजूद श्रद्धालुओं और मीडिया के कैमरों की नज़रें उन्हीं पर टिक गईं। इस दर्शन के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें से एक वीडियो में कोमल रानी भारी भीड़ के बीच फंसे गोविंदा का हाथ पकड़कर उन्हें बचाती और आगे खींचती हुई दिखाई दे रही हैं। गौरतलब है कि यह वाकया गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा के अकेले लालबागचा राजा जाकर बप्पा के दर्शन करने के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है।
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कोमल रानी ने गोविंदा को भीड़ से खींचा
कल शाम लालबागचा राजा का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें गोविंदा भीड़ के बीच फंसे हुए दिखे। हालांकि वे VIP गेट से अंदर आए थे, लेकिन एक्टर की एक झलक पाने के लिए लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। एक समय ऐसा आया जब भीड़ की वजह से वे आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। कोमल ने भीड़ से बचाने के लिए गोविंदा का हाथ खींचा। यह पल कैमरे में कैद हो गया और इंटरनेट पर खूब शेयर किया जा रहा है।
गोविंदा ने सफेद कुर्ता-पायजामा पहना था और हाथ जोड़कर अपने फैंस का अभिवादन किया। कोमल ने लाल और पीली साड़ी पहनी थी और अपने लुक को कई एक्सेसरीज़ के साथ पूरा किया था।
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गोविंदा और सुनीता आहूजा के बीच क्या विवाद है?
गोविंदा और सुनीता आहूजा के बीच विवाद तब और बढ़ गया जब सुनीता ने एक्टर पर अपनी 'रूपा' को-स्टार कोमल रानी स्वर्णकार के साथ एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर का आरोप लगाया। उन्होंने गोविंदा को अपना "शुगर डैडी" भी कहा। मुंबई कोर्ट में उनके जाने से उनकी शादी को लेकर अटकलें और तेज़ हो गईं। हालांकि, बाद में गोविंदा के मैनेजर शशि सिन्हा ने इंडिया टुडे को बताया कि सुनीता ने आधिकारिक तौर पर अपनी तलाक की अर्जी वापस ले ली थी।
यह मामला तब और चर्चा में आया जब गोविंदा को कोमल रानी स्वर्णकार के साथ एयरपोर्ट पर देखा गया। सुनीता ने इन तस्वीरों पर प्रतिक्रिया दी और सवाल उठाया कि उनके पति ऐसी महिला के साथ क्यों घूम रहे हैं जो उनकी बेटी की उम्र की है।
गोविंदा ने धोखा देने के आरोपों से इनकार किया है। बाद में उन्होंने एक वीडियो मैसेज में इस मुद्दे पर बात की और सुनीता पर उनके प्रोफेशनल जीवन में दखल देने और उनकी पब्लिक इमेज को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने सुनीता की कुछ सार्वजनिक टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई और उनसे "अपनी हद में रहने" को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में उन्हें फिर से उनके सपोर्ट की ज़रूरत पड़ सकती है।
इस बीच, गोविंदा 'रूपा' और 'दुनियादारी' के साथ एक्टिंग में वापसी करने जा रहे हैं। उनकी पिछली रिलीज़ 2019 की फ़िल्म 'रंगीला राजा' थी।
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Health Tips: Morning और Evening Sunlight में फर्क समझें, Circadian Rhythm के लिए दोनों जरूरी
हम सभी को इस बारे में जानकारी है कि हर दिन पर्याप्त मात्रा में धूप लेना जरूरी होता है। इससे हमारे शरीर में विटामिन डी की कमी पूरी होती है। लेकिन अक्सर लोग धूप के बीच के फर्क को नहीं पहचानते हैं। काफी कम लोगों को इस बारे में जानकारी है कि आखिर सुबह की धूप और शाम की धूप में क्या अंतर होता है और यह किस तरह से हमारे शरीर को प्रभावित करती है।
समझें बॉडी की सर्केडियन रिदम
हमारे शरीर में 24 घंटे चलने वाली एक आंतरिक घड़ी होती है, जो हमारे सोने-जागने और हार्मोन को बैलेंस करती है। जब यह सही तरह से काम कर रही होती है, तो हम दिन में जागने के साथ एक्टिव रहते हैं औऱ रात में भी अच्छे से नींद लेते हैं। लेकिन ऐसा न होने पर शरीर के काम करने का पूरा तरीका बदल जाता है। यहीं से हमारे जीवन में सूरज की रोशनी की भूमिका शुरू होती है।
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दरअसल, सूरज की रोशनी हमारे शरीर को दिन होने का संकेत देती है। जिससे हमारा इंटर्नल क्लॉक सही तरह से काम कर पाती है। वहीं सुबह और शाम दोनों समय की रोशनी हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।
क्यों जरूरी होती है सुबह की धूप
अगर आप सुबह-सुबह एक अंधेरे कमरे में सोकर उठते हैं और फिर थोड़ी देर फोन चलाते हैं और फिर इधर-उधर के काम निपटाते हैं, किचन में ब्रेकफास्ट बनाने के लिए जाते हैं। देखने में यह शेड्यूल एकदम सही है, लेकिन यहां एक परेशानी यह है कि हमारा दिमाग रोशनी न मिलने की वजह से उसको अंदाजा नहीं है कि सुबह हुई भी या नहीं। वहीं इससे विटामिन डी की पूर्ति भी नहीं हो पाती है।
सनलाइट का काम नहीं करती आर्टिफिशियल लाइट
अगर कमरे की आर्टिफिशियल लाइट को ऑन कर लिया जाए, तो भी यह सनलाइट की तरह काम नहीं करता है। इसलिए फोन को स्क्रॉल करने की जगह सुबह छत या बालकनी में जाकर सुबह की रोशनी लेनी चाहिए। इससे शरीर में सेरोटोनिन प्रोडक्शन बढ़ता है। दिमाग को सुबह होने का संकेत भी जाता है और शरीर नींद को कंट्रोल करता है, जिससे आपका शरीर एनर्जेटिक फील करता है। स्लीप मेडिसिन रिसर्च की मानें, तो सुबह की रोशनी सोने और जागने के चक्र को संतुलित करने का काम करता है।
क्यों जरूरी है शाम की रोशनी
आप सोच रहे होंगे कि शाम की रोशनी शरीर के लिए क्यों जरूरी है। दरअसल, शाम की रोशनी में सुबह की धूप जितनी ऊर्जा नहीं होती है। हल्की रोशनी दिमाग को नींद के लिए खुद को तैयार करने का संकेत देती है। इस समय सेरोटोनिन की जगह मेलाटोनिन हार्मोन लेवल बढ़ने लगता है। यह स्लीप साइकिल को बैलेंस करने के लिए भी जाना जाता है। रोजाना शाम की रोशनी में 5 से 10 मिनट वॉक करने से तनाव कम होता है और शरीर भी रिलैक्स फील करता है।
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