Box Office Collection: हनुमान अंश 400 करोड़ का आकांड़ा छूने में चंद कदम दूर, 47वें दिन भी की शानदार कमाई, जानिए वाइब और दायरा का हाल
Hanuman Ansh Vs Daayra-Vibe Box Office Collection: इस समय हनुमान अंश(Hanuman Ansh), दायरा (Daayra) और वाइब (Vibe) को देखने के लिए लोग थिएटर जा रहे हैं. लेकिन बॉक्स ऑफिस पर हनुमान अंश की अभी भी जबरदस्त पकड़ बनी हुई है. फिल्म को रिलीज हुए 47 दिन हो चुके हैं, लेकिन इसकी कमाई का सिलसिला लगातार जारी है. सबसे खास बात यह है कि फिल्म अब दुनियाभर में 400 करोड़ रुपये के आंकड़े छूने में चंद कदम दर है. वहीं दूसरी तरफ कुणाल खेमू की वाइब और करीना कपूर-प्रिथ्वीराज सुकुमारन की दायरा बॉक्स ऑफिस पर स्ट्रगल करती नजर आ रही हैं. इन दोनों फिल्मों को रिलीज हुए पांच दिन हो चुके हैं और इनके कलेक्शन में काफी अंतर देखने को मिल रहा है. आइए इन सभी फिल्मों की अब तक की कमाई के बारे में जानते हैं.
हनुमान अंश ने 47वें दिन किया इतने करोड़ का कलेक्शन
हनुमान अंश ने अपनी रिलीज के 47वें दिन भी बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त पकड़ बनाए रखी है. फिल्म ने मंगलवार यानी 47वें दिन इंडिया में 7,702 शोज के साथ 4.90 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया. इसके साथ ही फिल्म का इंडिाय में नेट कलेक्शन 280.93 करोड़ रुपये पहुंच गया है. वहीं इंडिया में इसके ग्रॉस कलेक्शन बता करें तो वो अब 331.70 करोड़ हो गया है. आपको बता दें कि फिल्म के लिए यह आंकड़ा इसलिए भी खास है क्योंकि सातवें हफ्ते में इसकी कमाई में धीमी नहीं पड़ी है. 47वें दिन करीब 5 करोड़ रुपये की नेट कमाई बताती है कि फिल्म को अब लोग देखने के लिए थिएटर जा रहे हैं. फिल्म का छठा हफ्ता भी शानदार रहा, जिसमें इसने 80.25 करोड़ रुपये की कमाई की.
400 करोड़ के क्लब में शामिल होने में चंद कदम दूर
भारत के अलावा विदेशों में भी हनुमान अंश को शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है. 47वें दिन फिल्म ने ओवरसीज मार्केट से 1 करोड़ रुपये की कमाई की. इसके साथ ही ओवरसीज मार्केट में फिल्म का कुल ग्रॉस कलेक्शन 34.75 करोड़ रुपये पहुंच गया है. वहीं, अगर भारत और विदेशों की कमाई को मिलाए तो फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 366.45 करोड़ रुपये हो गया है. इसी के साथ हनुमान अंश 400 करोड़ के क्लब में शामिल होने से कुछ ही कदम दूर है. बॉक्स पर फिल्म जिस तरीके से कमाई कर रही हैं उसे देखकर उम्मीद लगाई जा रही है कि ये 400 करोड़ का आंकाड़ा भी जल्द छू लेगी. इसकेल लिए फिल्म को सिर्फ 33.55 करोड़ रुपये और कमाने हैं.
वाइब ने पांचवें दिन कमाए 1.15 करोड़
अब बात करते हैं कुणाल खेमू की फिल्म वाइब की. हाल ही में रिलीज हुई इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर दायरा के मुकाबले थोड़ा बेहतर रिस्पॉन्स मिल रहा है. फिल्म ने रिलीज के पांचवें दिन यानी 22 सितंबर को भारत में 2,553 शोज के साथ 1.15 करोड़ रुपये की नेट कमाई की. इसके साथ ही वाइब का इंडिया में कुल नेट कलेक्शन 9.50 करोड़ रुपये हो गया है और ग्रॉस कलेक्शन 11.35 करोड़ रुपये है. वहीं ओवरसीज मार्केट में हुई कमाई की बात करें तो वहां से फिल्म ने पांचवें दिन 25 लाख रुपये कमाए. ओवरसीज में इसका कुल ग्रॉस कलेक्शन 1.75 करोड़ रुपये हुआ है. फिल्म की अब तक की कुल कमाई 13.10 करोड़ रुपये हो गई है.
दायरा कैसा कर रही प्रदर्शन
वाइब के साथ रिलीज हुई करीना कपूर और प्रिथ्वीराज सुकुमारन की दायरा का प्रदर्शन थोड़ा कमजोर नजर आ रहा है. फिल्म ने रिलीज के पांचवें दिन सिर्फ 50 लाख रुपये की नेट कमाई की. इसके साथ ही फिल्म का इंडिया में नेट कलेक्शन 5.50 करोड़ रुपये हो गया है. वहीं, इंडिया में इसके ग्रॉस कलेक्शन की बात करें तो वो 6.60 करोड़ रुपये हुआ है.वहीं ओवरसीज मार्केट से फिल्म ने पांचवें दिन 0.20 करोड़ रुपये की कमाई की. विदेशों में इसका कुल ग्रॉस कलेक्शन 1.95 करोड़ रुपये पहुंच गया है. इसके साथ ही फिल्म का वर्ल्डवाइड कलेक्शन 8.55 करोड़ रुपये हो चुका है.
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108 साल पहले भारतीय सैनिकों ने ऐसे कराई थी हाइफा की आजादी, दिल्ली के तीन मूर्ति हाइफा चौक पर मना विजय दिवस
भारतीय वीरता की वो कहानी, जिसकी गूंज 108 साल बाद भी भारत और इजराइल में सुनाई देती है. 23 सितंबर 1918 को प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय रियासतों की सेनाओं से जुड़े घुड़सवार लांसर्स ने ऑटोमन साम्राज्य के कब्जे वाले हाइफा पर निर्णायक हमला किया था. घोड़ों पर सवार भारतीय सैनिकों ने भाले और तलवारों के साथ ऐसी सैन्य कार्रवाई की, जिसने हाइफा पर मित्र राष्ट्रों का कब्जा स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई.
इसी ऐतिहासिक घटना की 108वीं वर्षगांठ पर बुधवार को नई दिल्ली के तीन मूर्ति हाइफा चौक पर भारत और इजराइल के लोगों ने एक साथ हाइफा विजय दिवस मनाया. कार्यक्रम में भारतीय सैनिकों के साहस, भारत-इजराइल के ऐतिहासिक संबंध और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक एवं रणनीतिक सहयोग को याद किया गया.
23 सितंबर 1918... जब भारतीय लांसर्स ने किया हाइफा पर हमला
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सैनिक ब्रिटिश भारतीय सेना के हिस्से के रूप में पश्चिम एशिया के विभिन्न मोर्चों पर तैनात थे. हाइफा अभियान में 15वीं इम्पीरियल सर्विस कैवलरी ब्रिगेड की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसमें जोधपुर, मैसूर और हैदराबाद लांसर्स शामिल थे. भारत के विदेश मंत्रालय की ऐतिहासिक सामग्री के मुताबिक सितंबर 1918 में सीरिया अभियान के दौरान 15वीं इम्पीरियल सर्विस कैवलरी ब्रिगेड ने हाइफा की ओर बढ़ते हुए एक संकरे मार्ग से घुड़सवार हमला किया और शहर पर कब्जा किया. विदेश मंत्रालय ने इसे मजबूत किलेबंदी के खिलाफ घुड़सवार सेना के हमले का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया है.
23 सितंबर 1918 की इस कार्रवाई को भारतीय सैन्य इतिहास में विशेष महत्व दिया जाता है. उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार हाइफा पर हमले के दौरान भारतीय सैनिकों ने भारी प्रतिरोध के बीच कार्रवाई की. अलग-अलग स्रोतों में हताहतों के आंकड़ों में अंतर मिलता है; 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौजूदगी में हुए समारोह से जुड़े सरकारी/मीडिया विवरणों में 44 भारतीय सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान का उल्लेख किया गया था.
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तीन मूर्ति में क्यों लगी हैं तीन प्रतिमाएं?
दिल्ली का तीन मूर्ति स्मारक सीधे तौर पर इसी सैन्य इतिहास से जुड़ा हुआ है. यहां स्थापित तीन कांस्य प्रतिमाएं हैदराबाद, जोधपुर और मैसूर लांसर्स का प्रतिनिधित्व करती हैं. तीनों रियासतों की सेनाएं 15वीं इम्पीरियल सर्विस कैवलरी ब्रिगेड का हिस्सा थीं. यही वजह है कि तीन मूर्ति चौक केवल दिल्ली का एक ऐतिहासिक चौराहा नहीं, बल्कि प्रथम विश्व युद्ध के पश्चिम एशियाई मोर्चे पर भारतीय सैनिकों की भूमिका की स्मृति से भी जुड़ा स्थल है.
मोदी-नेतन्याहू की मुलाकात के दौरान बदला नाम
जनवरी 2018 में इजराइल के तत्कालीन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत दौरे पर आए थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेतन्याहू ने तीन मूर्ति स्मारक पर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी और तीन मूर्ति चौक का नाम बदलकर 'तीन मूर्ति हाइफा चौक' किया गया. दोनों नेताओं ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और विजिटर बुक में हस्ताक्षर किए थे. भारत के विदेश मंत्रालय की उस समय की सामग्री में भी तीन मूर्ति चौक के नामकरण को हाइफा की लड़ाई में भारतीय सैनिकों की भूमिका से जोड़ा गया है.
हाइफा और भारत का रिश्ता आज भी इतिहास की किताबों में
हाइफा की लड़ाई की कहानी आज भारत-इजराइल संबंधों के ऐतिहासिक संदर्भ का हिस्सा बन चुकी है. इजराइल में भी भारतीय सैनिकों की भूमिका को अलग-अलग स्मृति कार्यक्रमों और सैन्य इतिहास के माध्यम से याद किया जाता है. हालांकि हाइफा की लड़ाई को लेकर ऐतिहासिक विवरणों और उसकी व्याख्या में अंतर भी मिलता है. इसलिए इसे केवल एक प्रतीकात्मक सैन्य कथा के रूप में नहीं, बल्कि प्रथम विश्व युद्ध के व्यापक पश्चिम एशियाई अभियान के संदर्भ में समझना महत्वपूर्ण है. 23 सितंबर को भारत में 'हाइफा डे' के तौर पर याद किए जाने की परंपरा रही है और भारतीय सेना की 61 कैवेलरी भी इस तारीख को अपने इतिहास से जोड़ती है. 2018 के समारोह से जुड़े विवरणों में इसे 61 कैवेलरी का रेजिमेंटल 'हाइफा डे' बताया गया था.
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तीन मूर्ति हाइफा चौक पर 108वीं वर्षगांठ
बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय और इजराइली प्रतिनिधियों ने 23 सितंबर 1918 की उस सैन्य कार्रवाई को याद किया. कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता और प्रचारक इंद्रेश कुमार ने भारतीय सैनिकों के साहस, उनके मनोबल तथा भारत और इजराइल के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों पर बात की. उन्होंने भारत और यहूदी समुदाय के बीच लंबे समय से चले आ रहे संपर्क तथा दोनों सभ्यताओं के बीच सांस्कृतिक समरसता का उल्लेख किया. हाइफा की लड़ाई को उन्होंने भारत और इजराइल के बीच ऐतिहासिक जुड़ाव के एक महत्वपूर्ण प्रतीक के तौर पर रेखांकित किया.
इजराइल की ओर से नई दिल्ली स्थित इजराइली दूतावास के राजनीतिक सलाहकार Nittai Ben-Haiem कार्यक्रम में शामिल हुए. वे हाल ही में नई दिल्ली में राजनीतिक सलाहकार के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभालने पहुंचे हैं और इजराइली दूतावास ने भी उनके भारत आगमन की जानकारी सार्वजनिक की है. Ben-Haiem ने भारत और इजराइल के मौजूदा संबंधों तथा भविष्य में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर बात की. उनके संदेश में भारत-इजराइल साझेदारी को दोनों देशों के बीच विश्वास, साझा हितों, नवाचार और दो प्राचीन सभ्यताओं के बीच संबंधों से जोड़कर देखा गया है.
सिर्फ एक युद्ध की कहानी नहीं, रिश्तों की ऐतिहासिक कड़ी
हाइफा की 1918 की लड़ाई आज भारत और इजराइल के संबंधों में एक ऐतिहासिक प्रतीक के रूप में सामने आती है. एक तरफ यह प्रथम विश्व युद्ध में भारतीय सैनिकों की भूमिका और बलिदान को याद करने का अवसर है, तो दूसरी तरफ तीन मूर्ति हाइफा चौक इस इतिहास को दिल्ली के सार्वजनिक स्थान से जोड़ता है. 2018 में तीन मूर्ति चौक के नामकरण के समय भी यही इतिहास भारत-इजराइल संबंधों के संदर्भ में प्रमुखता से सामने आया था. प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू द्वारा संयुक्त रूप से भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देना इस ऐतिहासिक स्मृति को दोनों देशों के आधुनिक राजनयिक संबंधों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण क्षण था.
108 साल बाद भी 23 सितंबर की तारीख यह याद दिलाती है कि प्रथम विश्व युद्ध के वैश्विक संघर्ष में भारतीय सैनिक केवल भारत के बाहर तैनात सैनिक नहीं थे, बल्कि उन्होंने पश्चिम एशिया के महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में भी निर्णायक भूमिका निभाई थी. दिल्ली का तीन मूर्ति हाइफा चौक इसी इतिहास का एक स्थायी स्मारक है.
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