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अदरक-तुलसी-हल्दी का काढ़ा : सर्दियों में तेजी से बढ़ेगी इम्युनिटी, तो सर्दी-जुकाम और संक्रमण से राहत

नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। सर्दियों के मौसम में सर्दी-खांसी, जुकाम और गले की खराश जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। भारत सरकार का आयुष मंत्रालय आयुर्वेदिक उपाय के रूप में अदरक, तुलसी और हल्दी के काढ़े को शामिल करने की सलाह देता है। इससे न केवल तेजी से इम्युनिटी बूस्ट होती है बल्कि सर्दी-जुकाम और संक्रमण में राहत मिलती है।

मंत्रालय के अनुसार, हर अच्छी आदत एक नई शुरुआत है। इस ठंड में अदरक, तुलसी और हल्दी के आसानी से बने घरेलू मिश्रण न सिर्फ सुरक्षित हैं, बल्कि इम्युनिटी बढ़ाते हैं और शरीर को गर्माहट देते हैं। ये प्राकृतिक सामग्री आयुर्वेद में सदियों से इस्तेमाल हो रही हैं, जो सर्दी के मौसम में आराम और स्वस्थ जीवन का छोटा और प्रभावी कदम हैं।

अदरक गले की खराश को शांत करता है, बलगम निकालता है और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है। तुलसी (तुलसी) एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल है, जो फेफड़ों को साफ करती है और इम्यून सिस्टम मजबूत बनाती है। हल्दी में कर्क्यूमिन होता है, जो सूजन कम करता है और संक्रमण से लड़ता है। इन तीनों को मिलाकर बनाया जाने वाला काढ़ा या हर्बल ड्रिंक सर्दी में बहुत फायदेमंद साबित होता है।

आयुर्वेदाचार्य काढ़े को बनाने का आसान तरीका भी बताते हैं, 2 कप काढे़ के लिए 3 कप पानी लें। इसमें 1 इंच ताजा अदरक कद्दूकस किया हुआ, 8-10 तुलसी की पत्तियां और आधा चम्मच हल्दी पाउडर या कच्ची हल्दी डालें। थोड़ी काली मिर्च भी मिला सकते हैं। इसे मध्यम आंच पर 10-15 मिनट उबालें, जब तक पानी आधा न रह जाए। छानकर गुनगुना होने पर 1 चम्मच गुड़ या शहद मिलाएं। रोज सुबह-शाम पीने से शरीर गर्म रहता है, खांसी-जुकाम में राहत मिलती है और इम्युनिटी बढ़ती है।

यह मिश्रण घर पर आसानी से बनाया जा सकता है और इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। अगर किसी तरह की एलर्जी हो तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

--आईएएनएस

एमटी/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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ट्रेन तो 'वर्ल्ड क्लास' मिल गई, साहब... पर 'सिविक सेंस' कहां से लाएंगे? देखें जरा ये वीडियो

भारत में विकास की रफ्तार अब पटरियों पर 'वंदे भारत' बनकर दौड़ रही है, लेकिन अफसोस कि हमारे 'सिविक सेंस' की रफ्तार आज भी बैलगाड़ी के युग में अटकी हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बड़े गर्व के साथ देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई ही थी कि उद्घाटन के मात्र दो दिन के भीतर ही इसकी 'सुंदरता' को दागदार करने वाली तस्वीरें सामने आ गई हैं.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने न केवल रेलवे प्रशासन, बल्कि हर उस भारतीय को सोचने पर मजबूर कर दिया है जो विकास की बात तो करता है, लेकिन जिम्मेदारी से भागता है. दरअसल, एक वीडियो सामने आया है, जिसे देखने के बाद आप सोचने के लिए मजबूर हो जाएंगे. वायरल वीडियो ने कई सारे सवाल खड़े किए हैं.

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जिस कोच को वर्ल्ड क्लास सुविधाओं से लैस किया गया है. वहां यात्रियों ने खाने-पीने के बाद सारा कूड़ा डस्टबिन के बजाय सीधे फर्श पर फैला दिया है. दही के रैपर और अन्य कचरा कोच के गलियारे में इस कदर बिखरा है कि लगता ही नहीं यह वही लग्जरी ट्रेन है जिसका सपना देश देख रहा था. 

सुविधाओं की भूख लेकिन जिम्मेदारी से परहेज

हैरानी की बात यह है कि ट्रेन को शुरू हुए अभी एक हफ्ता भी नहीं बीता है. हम मांग तो 'बुलेट ट्रेन' जैसी सुविधाओं की करते हैं, लेकिन हमारा व्यवहार आज भी 'जनरल बोगी' वाला ही है. डस्टबिन बगल में होने के बावजूद कचरा फर्श पर फेंकना हमारी उस मानसिकता को दर्शाता है, जहां हम मानते हैं कि "सफाई करना सिर्फ सरकार का काम है, गंदा करना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार." क्या हम वाकई इन आधुनिक सुख-सुविधाओं के हकदार हैं, जब हम एक छोटे से रैपर को उसकी सही जगह पर नहीं पहुंचा सकते?

पीएम मोदी ने क्या कहा? 

यह ट्रेन सिर्फ एक मशीन नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों में, यह 'मां काली की धरती' (हावड़ा) को 'माँ कामाख्या की भूमि' (गुवाहाटी) से जोड़ने वाला एक पवित्र सेतु है. लेकिन श्रद्धालुओं और यात्रियों की इस लापरवाही ने इस आध्यात्मिक जुड़ाव के अनुभव को भी फीका कर दिया है. जहां पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को बढ़ावा देने की बात हो रही थी, वहां अब 'सिविक सेंस' पर सवाल उठने लगे हैं.

पीएम मोदी का विजन और भविष्य की चुनौती

शुक्रवार को मालदा टाउन रेलवे स्टेशन से इस ट्रेन को रवाना करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने बंगाल को हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात दी थी. उन्होंने स्पष्ट किया था कि यह पूरी तरह वातानुकूलित स्लीपर ट्रेन हावड़ा-गुवाहाटी रूट पर यात्रा के समय को 2.5 घंटे कम करेगी और आने वाले समय में ऐसी ही आधुनिक स्लीपर ट्रेनें पूरे देश में दौड़ेंगी.

पीएम मोदी का सपना देश के हर कोने को हाई-टेक कनेक्टिविटी से जोड़ना है, लेकिन मालदा से आई यह वायरल वीडियो एक चेतावनी है. सरकार पटरियां बिछा सकती है, आलीशान डिब्बे बना सकती है और यात्रा का समय कम कर सकती है, लेकिन वह यात्रियों को सिविक सेंस नहीं सिखा सकती. अगर हमें देश को वाकई विकसित बनाना है, तो वंदे भारत जैसी ट्रेनों के साथ-साथ हमें अपने 'सिविक सेंस' को भी पटरी पर लाना होगा. 

ये भी पढ़ें- मोदी का सिंगूर मास्टरस्ट्रोक, ममता के पुराने हथियार से ही TMC को घेरा, 830 करोड़ की सौगात से बंगाल फतह की तैयारी!

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3 मैच... 352 रन, प्लेयर ऑफ द सीरीज बने डेरिल मिचेल ने भारत में सीरीज जीत को बताया स्पेशल

Daryl Mitchell reacts: भारत को उसके घर में वनडे सीरीज में हराने में डेरिल मिचेल का अहम रोल रहा.मिचेल ने लगातार दो शतक ठोककर अपनी टीम को बचे दो मैच जीतकर सीरीज में जीत दिलाई. मिचेल को तीसरे वनडे में शतकीय पारी खेलने के लिए प्लेयर ऑफ द मैच और टूर्नार्मेट में सर्वाधिक रन बनाने के लिए प्लेयर ऑफ सीरीज चुना गया.मिचेल ने कहा कि भारत में सीरीज जीतना खास है. Sun, 18 Jan 2026 23:34:56 +0530

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