चांदी ₹2,366 बढ़कर ₹2.35 लाख किलो पर पहुंची:सोना आज ₹130 महंगा हुआ, आगे और बढ़ सकते हैं सोने-चांदी के दाम
सोने-चांदी के दाम में आज यानी 23 सितंबर को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के मुताबिक 10 ग्राम 24 कैरेट सोने के दाम 130 रुपए बढ़कर 1.52 लाख रुपए पर पहुंच गए हैं। एक किलो चांदी 2,366 रुपए महंगी होकर 2.35 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस साल सोना ₹19 हजार महंगा हुआ इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 19 हजार रुपए महंगा हो चुका है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.52 लाख रुपए पर है। वहीं चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.35 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। दिसंबर तक सोना 1.70 लाख और चांदी 3 लाख रुपए तक पहुंच सकती है कोटक सिक्युरिटीज के सीनियर वीपी एंड कमोडिटी रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी कहते हैं कि सोने को आम निवेशकों के साथ ही दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों जैसे आरबीआई का भी सपोर्ट हासिल है, जो लगातार सोना खरीद रहे हैं। आगे मुश्किल हालात में भी सोने में तेजी बनी रहेगी। यदि हालात सुधरे तो चांदी में भी उछाल दिख सकता है। अभी जो भावी हालात नजर आ रहे हैं, उसके मुताबिक दिसंबर तक सोने की कीमत 1.70 लाख रुपए तक पहुंच सकती है। चांदी की कीमत भी 3 लाख रुपए तक जा सकती है।
Pakistani Soldiers Killed In Attack: उड़ा डाला पाकिस्तानी सेना का काफिला, सैनिकों के उड़े चिथड़े!
पाकिस्तान में लगातार हमलों का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। कुछ घंटे पहले ही खबर पख्तूखा की। एक मस्जिद में कई धमाके हुए थे जिसमें 30 से ज्यादा लोगों के चिथड़े उड़ गए। इस हमले से अभी पाकिस्तान उभर नहीं पाया था कि अब एक और भीषण ब्लास्ट से पूरा देश दहल उठा हुआ है। यह बड़ा हमला उस वक्त हुआ है जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के इलाके में एयर स्ट्राइक करके कई लोगों को मार डाला है। जिसके बाद बढ़ के तालिबान ने ऐलान करते हुए कहा है कि इस हमले का तगड़ा जवाब दिया जाएगा। उधर तालीबान हमले की तैयारी में जुटा हुआ था कि पाकिस्तान में अचानक से भीषण धमाके शुरू हो गए। दरअसल बलूचिस्तान के नौकुंडी इलाके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के एक काफिले पर बड़े हमले की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हमले में पाकिस्तान के सात सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। इनमें से पांच शव मौके से निकाल लिए जाने की बात कही जा रही है। जबकि दो शव रेगिस्तान में ही रह गए।
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सुरक्षा खतरे के कारण उन्हें वहां से निकालना संभव नहीं हो सका। हालांकि पाकिस्तानी सेना मौत के सटीक आंकड़े को छिपा रही है। नौकुंडी इलाका वो इलाका है जो ईरान और अफगानिस्तान की सीमाओं के करीब है। जैसे ही हमला हुआ और कई जवानों के चितड़े उड़े तो पाकिस्तानी सेना के जवान इलाका छोड़कर भाग छूटे। यहां तक कि एंबुलेंस टीम भी मौके तक पहुंचने में हिचक रही थी क्योंकि दोबारा हमले का खतरा बताया जा रहा था। यही वजह बताई जा रही है कि मारे गए सुरक्षा कर्मियों में से दो के शव अब तक मौके से नहीं निकाले जा सके हैं। बलूचिस्तान के कई हिस्सों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और अलगाववादी समूहों के बीच हिंसा की लगातार खबरें सामने आ रही हैं। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी कि बीएलए पर पाकिस्तानी सैन्य काफिलों, चौकियों को निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं। बीएएलए ने हाल ही के कई हमलों की जिम्मेदारी भी ली है।
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3 सितंबर को ही पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों के खिलाफ दो अलग-अलग हमले हुए थे। जिसमें पाकिस्तान के कुछ जवान मारे गए थे। इसके अलावा अगस्त के अंत में मस्तुंग के पास एक सैन्य काफिले पर आईडी हमला हुआ था जिसमें 13 सैनिकों मारे गए थे। तो वहीं जुलाई में ग्वादर कोस्ट गार्ड कैंप पर आत्मघाती हमला हुआ था। जिसकी जिम्मेदारी बीएएलए की मजीद ब्रिगेड ने ली थी और 30 से ज्यादा पैरामिलिट्री जवान मारे जाने की खबर सामने आई थी। यानी कि बीएलए लगातार पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान पहुंचा रही है क्योंकि पाकिस्तान की सेना लगातार बलूचों पर अत्याचार कर रही है और उनकी जायज मांगे वाले आंदोलन को दबाने के लिए निहत्ते लोगों पर गोलियां बरसा रही है। जिसके चलते बलूच विद्रोही और ज्यादा भड़कते हुए दिखाई दे रहे हैं। बलोच लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए पाकिस्तान पर हमला इसलिए भी कर रही है क्योंकि वह बलूचिस्तान को पाकिस्तान से पूरी तरह आजाद कराना चाहती है और बलूच लोगों के लिए एक स्वतंत्र देश की मांग कर रही है। बीएएलए और स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार यहां के संसाधनों का इस्तेमाल तो करती है लेकिन उसका फायदा स्थानीय बलूच आबादी को नहीं मिलता। बीएएलए चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे और चीनी नागरिकों की मौजूदगी का भी खड़ा विरोध कर रही है। लेकिन पाकिस्तानी सेना और सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज करके उनको गोलियों से भून रही है।
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