Explainer: मेघालय में सियासी भूचाल! एक झटके में टूट गई क्षेत्रीय पार्टी, दो-तिहाई विधायक भाजपा के पाले में...
पूर्वोत्तर राज्य मेघालय की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. दरअसल, राज्य की क्षेत्रीय पार्टी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) में भारी टूट हुई है. यहां पार्टी के 12 में से 8 विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया है. ये विधायक नई दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हुए हैं.
Meghalaya Politics में यह पूरा घटनाक्रम शुरू कैसे हुआ?
मेघालय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खलीहरियात क्षेत्र से विधायक क्यिरमेन श्याला के नेतृत्व में UDP के इन विधायकों ने पहले भाजपा नेतृत्व से मुलाकात की है. बताया जा रहा है कि इसके बाद ये सभी विधायक दिल्ली पहुंचे जहां इन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सीधी बातचीत की है. इसी मुलाकात के बाद विधायकों ने भाजपा में शामिल होने का फैसला लगभग पक्का कर लिया गया था.
#WATCH | Delhi: CLP Leader Manipur, Keisham Meghachandra Singh says, "Incidents of killings have been happening now and then. The killing of a young Liangmai is part of the continued process in Manipur. I strongly condemn this. Govt is not doing anything...Naga lives matter. Kuki… pic.twitter.com/ZHVHxKFJEO
— ANI (@ANI) September 22, 2026
अमित शाह ने इन Meghalaya के विधायकों को क्या भरोसा दिलाया है?
सूत्रों के मुताबिक विधायक अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ हुई बैठकों में विधायकों की कुछ लंबे समय से चली आ रही मांगों पर सहमति बनी है. इनमें कोयला खनन को कानूनी दायरे में लाने और खासी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने जैसी अहम मांगें शामिल हैं. बताया जा रहा है कि बीजेपी हाईकमान की तरफ से मेघालय के विधायकों को ये भरोसा दिलाया गया है कि 2028 के अगले विधानसभा चुनाव से पहले इन मांगों पर ठोस कार्रवाई की जाएगी.
UDP पार्टी में यह टूट पहली बार कब सामने आई थी?
जानकारी के अनुसार इस टूट के शुरुआती संकेत उसी समय मिल गए थे जब UDP के पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता डॉ. जेमिनो मावथोह 12 सितंबर को औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए थे. उनके इस कदम को अब पार्टी में बड़े पैमाने पर हो रही टूट की शुरुआत माना जा रहा है. अब UDP के जो विधायक बीजेपी में शामिल हो रहे हैं उससे आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बढ़त मिलने का अनुमान है.
VIDEO | Delhi: Eight MLAs from Meghalaya officially join BJP in the presence of Union Minister Kiren Rijiju and BJP spokesperson Sambit Patra.
— Press Trust of India (@PTI_News) September 23, 2026
The eight MLAs while joined the Bharatiya Janata Party are Lahkmen Rymbui, Pius Marwein, Kyrmen Shylla, Mayralborn Syiem, Matthew… pic.twitter.com/BEWQI8CAaA
Meghalaya में अभी UDP की क्या हैसियत है?
राजनीतिक जानकारों की मानें तो UDP मेघालय की सत्तारूढ़ 'मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस' यानी MDA गठबंधन का दूसरा सबसे बड़ा घटक दल है, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा की नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) कर रही है. मौजूदा 60 सदस्यीय विधानसभा में UDP के पास कुल 12 विधायक हैं. अगर इनमें से 8 विधायक भाजपा में चले जाते हैं तो यह पार्टी के लिए बहुत बड़ा झटका माना जाएगा.
Meghalaya विधानसभा में भाजपा की मौजूदा स्थिति क्या है?
फिलहाल मेघालय विधानसभा में विपक्ष के तौर पर तृणमूल कांग्रेस के पांच और 'वॉयस ऑफ द पीपल पार्टी' (VPP) के चार विधायक मौजूद हैं. ऐसे में अगर UDP के 8 विधायक भाजपा में शामिल होते हैं तो राज्य विधानसभा की सियासी तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है और भाजपा राज्य में एक मजबूत ताकत के तौर पर उभर सकती है.
#WATCH | Delhi: At a press conference, Union Minister of Parliamentary Affairs, Kiren Rijiju, says, "... We welcome eight elected members of the assembly, MLAs of Meghalaya, into the BJP family. They earlier belonged to UDP, a very prominent regional party. Looking at the… pic.twitter.com/3QxnSJm5cZ
— ANI (@ANI) September 23, 2026
Meghalaya के इस प्रकरण में केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू की इसमें क्या भूमिका है?
सूत्रों के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया के दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू भी मौजूद रहे हैं. पूर्वोत्तर राज्यों में भाजपा के लिए संगठन और गठबंधन प्रबंधन में रीजीजू की भूमिका हमेशा से अहम रही है, ऐसे में उनकी मौजूदगी इस पूरे घटनाक्रम को और गंभीरता से देखे जाने का संकेत देती है.
क्या UDP में यह टूट अचानक हुई या इसकी पृष्ठभूमि पहले से बन रही थी?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह टूट अचानक नहीं हुई है. कोयला खनन को लेकर राज्य में लंबे समय से स्थानीय स्तर पर असंतोष रहा है और खासी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने की मांग भी काफी पुरानी है. जब क्षेत्रीय पार्टी इन मुद्दों पर केंद्र से तुरंत राहत नहीं दिला पाई तो नेताओं ने सीधे केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत का रास्ता अपनाया जो अब पार्टी बदलने तक जा पहुंचा है.
क्या UDP नेतृत्व ने इस पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
फिलहाल यह पूरा घटनाक्रम विधायकों के दावों और सूत्रों की जानकारी के आधार पर सामने आ रहा है. UDP के मूल नेतृत्व की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया का अभी इंतजार है लेकिन पार्टी के भीतर बड़ी बेचैनी होना स्वाभाविक माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी अपने कुल विधायकों में से दो-तिहाई को खोने की कगार पर है.
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