'डर-डरकर देखता हूं', बिग बॉस में बेटी रीति की हरकतों से नाराज मनोज तिवारी? हाथ जोड़कर कही ये बात
Bigg Boss 20 Rhiti Tiwari-Manoj Tiwari: भोजपुरी स्टार और नेता मनोज तिवारी (Manoj Tiwari) की बेटी रीति तिवारी (Rhiti Tiwari) बिग बॉस 20 में बतौर कंटेस्टेंट नजर आ रही हैं. बिग बॉस 20 के प्रीमियर पर मनोज खुद अपनी बेटी रीति को घर में छोड़ने के लिए आए थे. इस दौरान वो उन्हें कुछ बातें भी समझाते हुए नजर आए थे. दोनों के बीच काफी शानदार बॉन्डिंग देखने के लिए मिली थी. बिग बॉस में रीति कई बार बता चुकी हैं, वह इंडिया और फिर दुनिया की बेस्ट सिंगर बनना चाहती हैं. हालांकि, सोशल मीडिया पर लोग उनकी सिंगिंग स्टाइल का मजाक उड़ाते हुए नजर आ रहे हैं. उनके ऊपर इंटरनेट पर मीम्स बन रहे हैं. इतना ही नहीं जब उन्होंने वीकेंड के वार के एपिसोड में काजी तौकीर से जिस तरीके से बात की थी. उसके लिए लोग उनकी काफी आलोचना कर रहे हैं. अब इसी बीच रीति के पिता मनोज तिवारी ने उनके गेम पर रिएक्ट किया है.
बिग बॉस में बेटी रीति की हरकतों से नाराज मनोज तिवारी?
सोशल मीडिया पर रीति की ट्रोलिंग के बीच मनोज तिवारी का रिएक्शन सामने आया है. जिससे कई लोग अंदाजा ला रहा हैं कि रीति की हरकतों से मनोज तिवारी भी नाराज हैं क्योंकि रीति ने जिस तरीके से उम्र में अपने से बड़े काजी को बुरा भला कहा उससे कोई भी खुश नहीं है. अब जब मनोज तिवारी से रीति के इसी गेम को लेकर सवाल किया तो उन्होंने इस पर जवाब दिया. उनसे कहा गया कि रीति के गेम की बहुत तारीफ हो रही है...हालांकि सवाल खत्म होने से पहले ही मनोज तिवारी हाथ जोड़ने लगते हैं और हंसते हुए कहते हैं- अरे बस बस...भगवान ठीक से रखे. इसके आगे जब उनसे पूछा कि क्या वह बिग बॉस देख रहे हैं तो उ्होंने कहा, 'डर-डर के देखता हूं'. इससे समझा जा सकता है कि वो खुद बिग बॉस में चल रहे ड्रामे और लड़ाइयों को देखना पसंद नहीं कर रहे हैं.
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SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर आयुक्तों की सहमति थी या नहीं? चुनाव आयोग ने मतभेद की खबरों को किया खारिज
Election Commission: मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के बीच उठे फैसले लेने के विवाद पर अब चुनाव आयोग ने सफाई दी है. ANI रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग के सूत्रों ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज किया है, जिनमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर आपत्ति जताई थी.
सूत्रों के मुताबिक, SIR समेत चुनाव आयोग के सभी फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से सर्वसम्मति से लिए गए हैं. आयोग ने कहा कि किसी भी फैसले में आयुक्तों के बीच मतभेद की बात सही नहीं है. विवाद पर विपक्ष ने भी जमकर निशाना साधना शुरू कर दिया है. विपक्षी दलों ने रिपोर्ट को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं.
क्यों शुरू हुआ विवाद?
दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 ऐसे फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी, जो कथित तौर पर उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे.
कपिल सिबल ने किया बड़ा दावा
राज्यसभा सांसद कपिल सिबल ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को चुनाव आयोग के बाकी सदस्यों का बहुमत समर्थन हासिल नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने कई फैसले अपनी मर्जी से लिए और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने पिछले 10 महीनों में 14 बार उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. सिबल ने कहा कि चुनाव आयोग में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
TMC सांसद ओब्रायन ने की हटाने की मांग
टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राज्यसभा में हटाने का प्रस्ताव लाने की मांग दोहराई. उन्होंने कहा कि 60 से ज्यादा विपक्षी सांसद पहले ही इस प्रस्ताव के समर्थन में पत्र दे चुके हैं.
अखिलेश यादव ने SC से संज्ञान लेने की कही बात
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मामले को लोकतंत्र के लिए गंभीर बताया और सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की. उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयुक्तों को फैसलों पर अपनी आपत्ति रखने की आजादी नहीं है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता की बात है.
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