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एआई के चलते हर 10 में से सात पेशेवरों को अपनी नौकरी की भूमिकाओं में बदलाव की उम्मीद :रिपोर्ट

नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। कार्यस्थलों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अपनाने की तेज गति के चलते कई पेशेवर आने वाले वर्षों में अपनी नौकरी की भूमिकाओं में बड़े बदलावों की उम्मीद कर रहे हैं। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

जीनियस एचआरटेक द्वारा डिजीपोल के सहयोग से की गई स्टडी में बताया गया कि 71 प्रतिशत पेशेवरों का मानना ​​है कि एआई टूल्स और नए वर्कफ्लो के आम होने के साथ ही अगले दो से तीन वर्षों में उनकी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा।

यह रिपोर्ट नवंबर 2025 में विभिन्न क्षेत्रों के 1,704 पेशेवरों के ऑनलाइन सर्वेक्षण पर आधारित है।

यह रिपोर्ट एआई को तेजी से अपनाने और संगठनों द्वारा उचित प्रशिक्षण की कमी के बीच स्पष्ट अंतर को उजागर करती है।

स्टडी के परिणाणों के अनुसार, 61 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि उनकी कंपनियों ने उन्हें एआई का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के बारे में पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं दिया है। केवल 37 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें उचित प्रशिक्षण मिला है।

रिपोर्ट के मुताबिक, स्ट्रक्चर सपोर्ट की यह कमी कार्यस्थलों में एआई को अपनाने के प्रति कर्मचारियों के दृष्टिकोण को प्रभावित कर रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 55 प्रतिशत पेशेवरों का मानना ​​है कि एआई को आवश्यकतावश अपनाया जा रहा है, जबकि 37 प्रतिशत का मानना ​​है कि यह वास्तविक व्यावसायिक आवश्यकताओं की तुलना में रुझानों से अधिक प्रेरित है।

इससे पता चलता है कि कई संगठन अपने कर्मचारियों को पूरी तरह से तैयार किए बिना ही एआई उपकरणों को बढ़ावा दे रहे हैं।

इन चिंताओं के बावजूद, एआई का उपयोग पहले से ही व्यापक रूप से हो रहा है। लगभग 67 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्होंने अपने दैनिक कार्यों को सरल बनाने या स्वचालित करने के लिए एआई उपकरणों का उपयोग करना शुरू कर दिया है, जो दर्शाता है कि यह तकनीक कितनी तेजी से नियमित कार्य का हिस्सा बन रही है।

हालांकि, अनुभव मिश्रित रहा है। जहां 69 प्रतिशत ने कहा कि एआई ने उनकी कार्य प्रक्रियाओं को आसान बनाया है, वहीं 25 प्रतिशत ने महसूस किया कि इसने जटिलता बढ़ा दी है।

एआई पर भरोसा एक और प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। केवल 49 प्रतिशत पेशेवरों ने कहा कि वे एआई से प्राप्त जानकारियों पर मैन्युअल रूप से जांच किए बिना भरोसा करते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 36 प्रतिशत ने कहा कि वे ऐसी जानकारियों पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं करते, जबकि 15 प्रतिशत ने कहा कि उनका भरोसा कार्य पर निर्भर करता है।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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अखिल विश्व गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के शताब्दी समारोह का हरिद्वार में भव्य शुभारंभ हुआ। कनखल के वैरागी द्वीप पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘ध्वज वंदन समारोह’ के साथ इस कार्यक्रम की शुरुआत की गई, जो 23 जनवरी तक चलेगा। इस महत्वपूर्ण अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह …

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  Sports

भारत-न्यूजीलैंड वनडे सीरीज हार पर बवाल, सुनील गावस्कर ने उठाए फील्डिंग और रणनीति पर सवाल

दो साल पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में व्हाइटवॉश झेलने के बाद जो सवाल उठे थे, वही चिंता अब वनडे क्रिकेट तक पहुंच गई है। घरेलू मैदान पर पहली बार भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज गंवानी पड़ी है, जिसने टीम इंडिया की तैयारियों और रणनीति पर बहस तेज कर दी है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, भारत ने सीरीज की शुरुआत जरूर एक करीबी जीत के साथ की थी, लेकिन इसके बाद दूसरे और तीसरे वनडे में न्यूजीलैंड ने जोरदार वापसी करते हुए सीरीज अपने नाम कर ली। निर्णायक मुकाबले में भारतीय टीम ने मैच को अपने हाथ से फिसलने दिया। एक समय न्यूजीलैंड का स्कोर 5 रन पर 2 विकेट था, लेकिन वहां से टीम इंडिया विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखने में नाकाम रही।

गौरतलब है कि न्यूजीलैंड ने संघर्ष से उबरते हुए 338 रन 7 विकेट पर बना दिए, जो बाद में भारत के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुए। लक्ष्य का पीछा करते हुए विराट कोहली ने एक बार फिर जिम्मेदारी उठाई और शानदार शतक जमाया। यह उनके वनडे करियर का 54वां शतक था, लेकिन दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरने के कारण उनका यह प्रयास टीम को जीत तक नहीं ले जा सका। अंततः भारत 41 रन से मुकाबला हार गया और न्यूजीलैंड की घरेलू सीरीज में हार की लकीर भी खत्म हो गई।

मैच के बाद पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने टीम इंडिया की हार का बेबाक विश्लेषण किया। उन्होंने किसी एक खिलाड़ी को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराने से परहेज किया, लेकिन टीम की फील्डिंग को बड़ी कमजोरी बताया। गावस्कर का मानना था कि भारतीय खिलाड़ी मैदान पर सुस्त नजर आए और न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को बेहद आसानी से सिंगल लेने का मौका मिलता रहा।

उन्होंने कहा कि रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे फुर्तीले खिलाड़ी मैदान पर मौजूद थे, फिर भी कुल मिलाकर फील्डिंग उतनी आक्रामक नहीं दिखी, जितनी इस स्तर के क्रिकेट में होनी चाहिए। उनके मुताबिक, रन रोकने में ढिलाई ने विपक्षी टीम को लय में आने का मौका दिया और यहीं से मैच का रुख बदल गया।

अगर मैच की स्थिति पर नजर डालें तो शुरुआती ओवरों में भारत ने शानदार शुरुआत की थी। अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा ने डेवोन कॉनवे और हेनरी निकोल्स को जल्दी पवेलियन भेज दिया था। इसके बाद विल यंग का विकेट भी गिरा, लेकिन फिर भारतीय गेंदबाजों को अगले विकेट के लिए 31 ओवर तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान डैरिल मिचेल और ग्लेन फिलिप्स ने चौथे विकेट के लिए 219 रनों की बड़ी साझेदारी कर डाली।

हालांकि इंदौर में खेले गए इस मुकाबले में भारत की फील्डिंग पिछले मैचों के मुकाबले कुछ बेहतर जरूर रही और टीम ने केवल तीन अतिरिक्त रन दिए। रवींद्र जडेजा ने एक शानदार कैच भी पकड़ा, लेकिन यह प्रयास मैच का रुख बदलने के लिए काफी नहीं रहे।

इससे पहले राजकोट में खेले गए दूसरे वनडे के बाद भी सुनील गावस्कर ने हैरानी जताई थी। उन्होंने कहा था कि जिस तरह न्यूजीलैंड ने 285 रनों का लक्ष्य आसानी से हासिल कर लिया, उससे भारतीय टीम की रणनीति पर सवाल उठते हैं। उनके मुताबिक, पिच की सुस्ती का फायदा भारतीय गेंदबाज नहीं उठा सके, जबकि न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने संयम और फिटनेस के दम पर लक्ष्य को आसान बना दिया।

गावस्कर ने खास तौर पर डैरिल मिचेल की तारीफ की, जिन्होंने शतक के बाद भी लगातार तेजी से दौड़ लगाकर फील्डरों पर दबाव बनाए रखा। उनके अनुसार, यही फिटनेस, कमिटमेंट और गेम अवेयरनेस मैच का अंतर बनी है।
Mon, 19 Jan 2026 22:20:34 +0530

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