इंदौर में फेसबुक फ्रेंड बनकर 44 हजार की ठगी, दुबई में फंसे होने का बहाना बनाकर महिला को ठगा, QR कोड भेजकर ट्रांसफर करवाए पैसे
इंदौर में सोशल मीडिया के जरिए भरोसा जीतकर ठगी करने का एक और मामला सामने आया है। दरअसल बाणगंगा थाना क्षेत्र की रहने वाली बीमा एजेंट संगीता गुप्ता को उनके फेसबुक फ्रेंड ने खुद को मुसीबत में बताकर 44 हजार रुपए की चपत लगा दी। वहीं आरोपी ने दावा किया कि वह दुबई एयरपोर्ट पर कस्टम और एम्बेसी की कार्रवाई में फंस गया है और तुरंत पैसों की जरूरत है।
दरअसल महिला ने बताया कि आरोपी से पहले भी फेसबुक पर बातचीत होती रहती थी। इसी वजह से उन्हें शुरुआत में कोई शक नहीं हुआ। लेकिन पैसे ट्रांसफर होने के बाद जब लगातार नई रकम मांगी जाने लगी, तब मामला साइबर ठगी का निकला।
QR कोड भेजकर कराए ट्रांजैक्शन
वहीं पुलिस के मुताबिक 19 सितंबर की शाम करीब 5 बजे संगीता गुप्ता को फेसबुक मैसेंजर पर ओमकुमार नाम के व्यक्ति का संदेश मिला। उसने लिखा कि वह दुबई एयरपोर्ट पर फंस गया है और एम्बेसी ने उसे रोक रखा है। उसने यह भी कहा कि किसी को इस बारे में जानकारी न दें और तुरंत मदद करें। कुछ देर बाद एक दूसरे व्हाट्सएप नंबर से कॉल करने के लिए कहा गया। बातचीत के दौरान आरोपी ने एक QR कोड भेजा और उसे स्कैन कर पैसे भेजने को कहा। संगीता ने भरोसा करते हुए पहले 25 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। इसके कुछ घंटे बाद रात करीब 8 बजे फिर कॉल आया। इस बार आरोपी ने कहा कि मामला पूरी तरह खत्म कराने के लिए 19 हजार रुपए और जमा करने होंगे। महिला ने दूसरी बार भी रकम भेज दी। इस तरह कुल 44 हजार रुपए आरोपी के बताए खाते में चले गए।
ऐसे खुला साइबर ठगी का खेल
वहीं अगले दिन आरोपी ने फिर संपर्क किया और इस बार 55 हजार रुपए और जमा करने के लिए कहा। लगातार बढ़ती मांग से महिला को शक हुआ। उन्होंने पैसे देने से इनकार कर दिया और बाद में कॉल उठाना भी बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपने पति को पूरी घटना बताई। बातचीत के स्क्रीनशॉट और बैंक ट्रांजैक्शन देखने के बाद पति ने इसे साइबर ठगी बताया और तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर बाणगंगा पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ ऑनलाइन धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब उस फेसबुक अकाउंट, व्हाट्सएप नंबर और बैंक खाते की जानकारी जुटा रही है, जहां पैसे ट्रांसफर किए गए थे। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बने परिचितों की बातों पर बिना पुष्टि किए पैसे भेजना जोखिम भरा हो सकता है।
वामन जयंती आज: भगवान विष्णु ने क्यों लिया था वामन अवतार, जानिए राजा बलि की कथा
आज वामन जयंती है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान विष्णु के पांचवें अवतार भगवान वामन के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर राजा बलि के बढ़ते प्रभाव और दर्प को समाप्त किया था। इसीलिए इस पर्व को धर्म, दान, वचन पालन और विनम्रता से जोड़कर देखा जाता है।
इस अवसर पर सीएम मोहन यादव ने शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि “भगवान श्री विष्णु जी के पांचवें अवतार भगवान वामन जी के प्राकट्य दिवस की समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। भक्ति, धर्म एवं दानशीलता के स्वरूप भगवान वामन जी की कृपा से हम सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और यश की वृद्धि हो, यही मंगलकामना है।”
वामन जयंती कब मनाई जाती है
हिंदू पंचांग के अनुसार, वामन जयंती भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को मनाई जाती है। इस वर्ष द्वादशी तिथि 22 सितंबर की रात लगभग 9 बजकर 43 मिनिट से शुरु हुई है। उदया तिथि के आधार पर वामन जयंती का व्रत और पूजन 23 सितंबर को किया जा रहा है। इस दिन श्रवण नक्षत्र का भी संयोग है।
क्यों मनाई जाती है वामन जयंती
वामन जयंती भगवान विष्णु के वामन अवतार के प्राकट्य की स्मृति में मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को महर्षि कश्यप और माता अदिति के पुत्र के रूप में भगवान विष्णु वामन रूप में प्रकट हुए थे। उनका यह अवतार धर्म की रक्षा के साथ अहंकार के अंत और दान की महत्ता का संदेश देता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु और वामन स्वरूप की पूजा करते हैं। कई स्थानों पर व्रत, कथा-पाठ और दान-पुण्य भी किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए दान और पूजा को विशेष महत्व दिया गया है।
राजा बलि से जुड़ी है वामन अवतार की कथा
भगवान वामन की कथा का सबसे महत्वपूर्ण प्रसंग राजा बलि से जुड़ा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्रह्लाद के पौत्र राजा बलि शक्तिशाली होने के साथ दानवीर भी थे। अपनी शक्ति के बल पर उन्होंने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। इससे देवताओं के सामने संकट खड़ा हो गया और इंद्र का सिंहासन भी उनके हाथ से चला गया।
देवताओं की स्थिति को देखते हुए माता अदिति ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। इसके बाद भगवान विष्णु ने वामन के रूप में अवतार लिया। उस समय राजा बलि यज्ञ कर रहे थे। वामन उनके पास पहुंचे और दान में केवल तीन पग भूमि मांग ली। बलि ने तीन पग भूमि देने का वचन दे दिया। इसके बाद भगवान वामन ने विराट रूप धारण कर लिया। उनके पहले पग में पृथ्वी और दूसरे पग में स्वर्ग समा गया। तीसरा पग रखने के लिए कोई स्थान नहीं बचा तो राजा बलि ने अपना सिर भगवान के सामने झुका दिया।
भगवान विष्णु राजा बलि के वचन और समर्पण से प्रसन्न हुए। उन्होंने बलि का वध करने के बजाय उन्हें सुतल लोक का राजा बनाया। साथ ही उन्हें यह वरदान भी दिया कि वे समय-समय पर पृथ्वी पर आ सकेंगे। इस तरह वामन अवतार की कथा में एक ओर भगवान विष्णु द्वारा बलि के दर्प के नाश का प्रसंग आता है तो दूसरी ओर बलि की दानशीलता और वचन निभाने की भावना भी सामने आती है।
नमामि देवं विश्वेशं वामनं विष्णुरूपिणम्।
बलिदर्पहरं शान्तं शाश्वतं पुरुषोत्तमम्॥भगवान श्री विष्णु जी के पांचवें अवतार भगवान वामन जी के प्राकट्य दिवस की समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
भक्ति, धर्म एवं दानशीलता के स्वरूप भगवान वामन जी की कृपा से हम सभी के… pic.twitter.com/ywar9zlEt9
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) September 23, 2026
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