S&P Global Ratings ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया
वित्तीय शोध और साख निर्धारित करने वाली एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया। रेटिंग एजेंसी ने इसके लिए मजबूत आर्थिक गतिविधियों का हवाला दिया और कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक वित्त वर्ष 2026-27 में नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत की की बढ़ोतरी कर सकता है। एसएंडपी ने ‘इकोनॉमिक एक्टिविटी फॉर एशिया पैसिफिक’ शीर्षक से जारी अपनी रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 में उपभोक्ता मुद्रास्फीति के औसतन 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।
भारत की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर 7.8 प्रतिशत रही। एसएंडपी ने कहा कि मजबूत औद्योगिक गतिविधियों, स्वस्थ खपत, वस्तुओं के मजबूत निर्यात और सरकारी निवेश में तेजी जैसे कारकों ने आर्थिक वृद्धि को गति दी है। एसएंडपी ने कहा, ‘‘इसी कारण हमने 31 मार्च, 2027 को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान पहले के 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत किया गया है।’’ हालांकि, उसने कहा कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में वृद्धि की रफ्तार कम हो सकती है, क्योंकि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को युक्तिसंगत बनाये जाने और आयकर में कटौती से मिलने वाला लाभ कम हो जाएगा।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि मौसम से जुड़े जोखिमों पर करीबी नजर रखने की जरूरत है। मौजूदा मानसून सत्र में नौ सितंबर, 2026 तक संचयी बारिश सामान्य से 15 प्रतिशत कम रही है। इसलिए कृषि उत्पादन और खाद्य मुद्रास्फीति महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं, जिन पर नजर रखनी होगी।
एसएंडपी ने कहा, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि परिस्थितियों का संतुलन ऊंची ब्याज दरों की ओर जाएगा। इसके समर्थन में मजबूत आर्थिक वृद्धि, लगातार मुद्रास्फीति संबंधी दबाव, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और मौसम से जुड़े जोखिम जैसे कारक हैं।’’ रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि उपभोक्ता मुद्रास्फीति औसतन 5.1 प्रतिशत रहेगी और भारतीय रिजर्व बैंक चालू वित्त वर्ष में अपनी नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि करेगा।’’ पिछले सप्ताह एक अन्य वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया था। यह जी20 अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक वृद्धि दर का अनुमान है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सात प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान आरबीआई के 6.7 प्रतिशत और फिच रेटिंग्स के 6.4 प्रतिशत के अनुमान से अधिक है। भारत की आर्थिक वृद्धि दर बीते वित्त वर्ष 2025-26 में 7.8 प्रतिशत रही थी।
AI Impact on Jobs: Goldman Sachs की रिपोर्ट, व्हाइट कॉलर और टेक नौकरियों पर दिखने लगा असर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते कदमों का सबसे बड़ा असर ब्लू-कॉलर कर्मचारियों के बजाय व्हाइट-कॉलर और तकनीकी पेशेवरों के रोजगार पर पड़ना शुरू हो गया है। वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स रिसर्च की इज एआई इम्पैक्टिंग ग्लोबल लेबर मार्केट्स शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, पूरी अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर छंटनी अभी भले ही सीमित हो, लेकिन नॉलेज-बेस्ड और आईटी सेक्टर में नई भर्तियों पर भारी दबाव साफ दिखने लगा है।
गोल्डमैन सैक्स रिसर्च के अर्थशास्त्री सारा डोंग और जोसेफ ब्रिग्स द्वारा तैयार किए गए इस विश्लेषण में सामने आया कि प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं में साल 2022 के बाद से इंफॉर्मेशन और कम्युनिकेशन सर्विसेज के क्षेत्र में नौकरियों की गति सुस्त पड़ी है। खासकर अमेरिका में तकनीकी क्षेत्र का रोजगार अपने दीर्घकालिक ऐतिहासिक ट्रेंड से नीचे खिसक चुका है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि टेक सेक्टर में हायरिंग पर यह प्रतिकूल असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के अन्य विकसित बाजारों में भी यही रुझान नजर आ रहा है।
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि जहां-जहां जनरेटिव एआई और ऑटोमेशन टूल्स का इस्तेमाल आसानी से संभव है, वहां कंपनियों ने अपनी भर्ती नीतियों में तेज बदलाव किया है। इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण कॉल सेंटर सेक्टर में देखने को मिला है। आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में कॉल सेंटर रोजगार ऐतिहासिक स्तर की तुलना में 39 प्रतिशत नीचे चल रहा है। इसी तरह कनाडा में यह स्तर सामान्य ट्रेंड से 33 प्रतिशत और जर्मनी में 27 प्रतिशत तक कम दर्ज किया गया है।
सॉफ्टवेयर और आईटी कंपनियों के अलावा मैनेजमेंट कंसल्टिंग, सॉफ्टवेयर पब्लिशिंग और विज्ञापन सेवाओं जैसी अन्य ज्ञान-आधारित पेशेवर सेवाओं में भी नए रोजगार के अवसरों में गिरावट आई है। रिपोर्ट का आकलन है कि वर्तमान में यह तकनीक कर्मचारियों को बड़े पैमाने पर सेवामुक्त करने के बजाय रूटीन और डिजिटल कामों में नई रिक्तियों के सृजन को धीमा कर रही है। फिलहाल ब्लू-कॉलर नौकरियों पर इसका सीधा प्रभाव नहीं दिखा है, लेकिन जैसे-जैसे स्वचालन तकनीक अन्य उद्योगों में फैलेगी, वैश्विक श्रम बाजार की जरूरतें और कंपनियों की हायरिंग रणनीतियां व्यापक बदलाव के दौर से गुजर सकती हैं।
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