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भारत में बीते 11 वर्षों में दोगुनी हुई हाई-स्पीड रेलवे ट्रैक की संख्या: केंद्र

नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। भारत में हाई-स्पीड रेलवे ट्रैक की लंबाई बीते 11 वर्षों में दोगुनी से अधिक बढ़कर 84,244 किलोमीटर हो गई है, जो कि 2014 में 31,445 किलोमीटर थी। यह बयान रेल मंत्रालय की ओर से रविवार को दिया गया।

मंत्रालय ने बताया कि समीक्षा अवधि में देश में कुल रेलवे ट्रैक नेटवर्क में हाई-स्पीड ट्रैक की हिस्सेदारी बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई है, जो कि पहले 40 प्रतिशत पर थी। इससे ट्रेन ऑपरेशन पहले के मुकाबले अधिक तेज हो गए हैं।

मंत्रालय ने बयान में कहा कि भारतीय रेलवे ने बीते 11 वर्षों में ट्रैक इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा को बढ़ाने पर तेजी से ध्यान केंद्रित किया है, जिससे ट्रैक इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा मानकों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। इन प्रयासों से देश भर में सुरक्षित, तेज और अधिक विश्वसनीय रेल संचालन में योगदान मिला है।

बयान में आगे बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान, भारतीय रेलवे ने 6,851 किलोमीटर से अधिक पटरियों का नवीनीकरण किया। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 7,500 किलोमीटर से अधिक पटरियों के नवीनीकरण का कार्य चल रहा है। इसके अतिरिक्त, 2026-27 के लिए 7,900 किलोमीटर पटरियों के नवीनीकरण की योजना बनाई गई है, जो परिसंपत्ति की विश्वसनीयता और सुरक्षा पर निरंतर फोकस को दर्शाता है।

मंत्रालय ने कहा कि रेलवे ट्रैक के किनारे सुरक्षा बाड़ लगाने का काम भी प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया गया है ताकि मवेशियों के कुचले जाने और अतिक्रमण की घटनाओं को कम किया जा सके और समग्र सुरक्षा को बढ़ाया जा सके। अब तक लगभग 15,000 किलोमीटर की बाड़ लगाई जा चुकी है, जिससे उन खंडों पर सुरक्षा में सुधार हुआ है जहां ट्रेनें 110 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से चलती हैं।

रेलगाड़ियों की सुचारू आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण टर्नआउट रिन्यूएबल में भी मजबूत प्रगति हुई है। 2024-25 में 7,161 थिक वेब स्विच और 1,704 वेल्डेबल सीएमएस (कास्ट मैंगनीज स्टील) क्रॉसिंग स्थापित किए गए। 2025-26 में 8,000 से अधिक थिक वेब स्विच और 3,000 से अधिक वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग स्थापित किए जा रहे हैं।

बयान में बताया गया है कि ट्रैक की स्थिरता बनाए रखने और राइड की गुणवत्ता में सुधार के लिए आवश्यक गिट्टी की मशीनीकृत गहन स्क्रीनिंग लगातार की जा रही है। 2024-25 के दौरान 7,442 किलोमीटर ट्रैक की गहन स्क्रीनिंग पूरी की गई, जबकि 2025-26 में 7,500 किलोमीटर से अधिक ट्रैक की गहन स्क्रीनिंग का काम जारी है।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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बच्चों की सुरक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया की राह पर चला ब्रिटेन, सोशल मीडिया बैन पर चर्चा तेज

नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने लगभग एक महीने पहले 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। काफी देशों में इसकी सराहना भी की गई। दुनिया के और भी कई देश हैं, जो बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के बारे में सोच रहे हैं। इस लिस्ट में अगला नाम ब्रिटेन का है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ब्रिटेन की संसद में इस सिलसिले में अगले हफ्ते बड़ा कदम उठाने की चर्चा हो रही है। हाउस ऑफ लॉर्ड्स में चिल्ड्रन्स वेलबीइंग एंड स्कूल्स बिल में बदलाव करने के लिए वोटिंग होने की उम्मीद है। इसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन शामिल होगा।

डेजी ग्रीनवेल के स्मार्टफोन फ्री चाइल्डहुड (एसएफसी) ने इस हफ्ते एक ईमेल कैंपेन शुरू किया, जिसमें यूके के स्थानीय सांसदों को 100,000 से ज्यादा ईमेल भेजे गए। एसएफसी टेम्पलेट ईमेल में सरकार से बच्चों की उम्र के हिसाब से सीमाएं तय करने की अपील की गई।

ग्रीनवेल ने कहा, हम लगातार देखते हैं कि बच्चे स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर जितना ज्यादा समय बिताते हैं, उनकी मानसिक स्थिति उतनी ही खराब होती है। अगर ये प्लेटफॉर्म अब उपलब्ध नहीं हैं, तो नेटवर्क का असर खत्म हो जाता है और युवा लोग एक-दूसरे से और असली दुनिया से फिर से जुड़ सकते हैं।

ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने भी इसका समर्थन किया और कहा कि वह ऑस्ट्रेलिया में जारी इस बैन को स्टडी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमें बच्चों को सोशल मीडिया से बेहतर तरीके से बचाने की जरूरत है।”

पीएम स्टार्मर ने पिछले हफ्ते कहा, “हम और क्या सुरक्षा दे सकते हैं, इस बारे में सभी विकल्प टेबल पर हैं, चाहे वह सोशल मीडिया पर 16 साल से कम उम्र के बच्चे हों या एक ऐसा मुद्दा जिसकी मुझे बहुत चिंता है, पांच साल से कम उम्र के बच्चे और स्क्रीन टाइम। स्कूल के पहले साल में चार साल की उम्र में बच्चे स्क्रीन पर बहुत ज्यादा समय बिताते हुए आ रहे हैं।”

--आईएएनएस

केके/वीसी

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