पाकिस्तान के शॉपिंग मॉल में लगी आग को 13 घंटे से बुझाने की कोशिश जारी, छह की मौत
इस्लामाबाद, 18 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान के कराची में गुल प्लाजा शॉपिंग मॉल में भीषण आग लगने से कम से कम छह लोगों की मौत हो गई। स्थानीय मीडिया ने रविवार को अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है कि हादसे में 10 से ज्यादा लोग घायल हो गए। यह मामला उन दो घटनाओं के बाद सामने आया है, जिनमें 23 लोगों की मौत हो गई थी।
पाकिस्तान के जियो न्यूज के अनुसार, नाजिमाबाद फायर ऑफिस के एक फायरफाइटर का शव मलबे के नीचे मिलने के बाद मरने वालों की संख्या बढ़ गई। मृतक का नाम फुरकान था।
रेस्क्यू अधिकारियों ने बताया कि आग पर काबू पाने का ऑपरेशन अभी भी जारी है। यह आग बीते 13 घंटे से लगी हुई है और इसपर काबू करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसकी वजह से रविवार सुबह तेज गर्मी के कारण बिल्डिंग के कई हिस्से गिर गए।
वहीं स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि कम से कम चार लोगों को सिविल हॉस्पिटल ट्रॉमा सेंटर लाया गया, जबकि दो लोगों को बर्न वार्ड में लाया गया। कुल 15 घायल लोगों को सिविल हॉस्पिटल ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। हालांकि, इनमें से 14 को डिस्चार्ज कर दिया गया है। दो घायल लोगों को जिन्ना हॉस्पिटल ले जाया गया और इलाज के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया।
अग्निशमन अधिकारी प्रमुख हुमायूं खान ने जियो न्यूज को बताया कि गुल प्लाजा दो एकड़ में बना है। प्लाजा के किनारों पर आग अभी भी लगी हुई है और बिल्डिंग को पूरी तरह से जर्जर घोषित कर दिया गया है। सिंध बिल्डिंग कंट्रोल अथॉरिटी (एसबीसीए) के अधिकारी हालात का जायजा लेकर इस मामले में अपना फैसला सुनाएंगे।
खान ने कहा कि बिल्डिंग में बहुत ज्यादा तापमान की वजह से अंदर जाने में दिक्कत हो रही है। इसकी वजह से रेस्क्यू और सर्च ऑपरेशन चलाने में भी काफी दिक्कतें आ रही हैं। प्लाजा चारों तरफ से सील है और उसमें सही वेंटिलेशन सिस्टम नहीं है। यह भी एक कारण है कि आग बुझाने में काफी परेशानी आ रही है।
इस बीच, सिंध इमरजेंसी सर्विस रेस्क्यू 1122 के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर आबिद जलालुद्दीन शेख ने कहा कि गुल प्लाजा के तीन तरफ से 20 फायर टेंडर और चार स्नोर्कल आग बुझाने के काम में लगे हुए थे।
अग्निशमन अधिकारी ने आशंका जताते हुए कहा, हम अभी यह नहीं कह सकते कि बिल्डिंग के अंदर कितने लोग अभी भी फंसे हुए हैं।
बता दें, इससे पहले दो अलग-अलग हादसों में कुल 23 लोगों के मरने की जानकारी सामने आई थी।
--आईएएनएस
केके/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
युद्धक्षेत्र में बढ़त हासिल करने में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम निभाएगा अहम भूमिका : एक्सपर्ट्स
नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम, पारंपरिक युद्धक्षेत्र के साथ-साथ युद्ध का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभरा है और सेंस, सिक्योर एंड स्ट्राइक का एसएसएस मंत्र इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम में बढ़त हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह जानकारी एक्सपर्ट्स की ओर से दी गई।
राष्ट्रीय राजधानी में डीईएससीओएम 2026 को संबोधित करते हुए, मुख्य अतिथि एकीकृत रक्षा स्टाफ (नीति योजना और बल विकास) मुख्यालय आईडीएस के उप प्रमुख वाइस एडमिरल विनीत मैककार्टी, एवीएसएम ने कहा कि आधुनिक युद्ध डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोनॉमस सिस्टम, एआई और नेटवर्क और संचालन में तीव्र प्रगति से प्रेरित एक बदलाव से गुजर रहा है।
उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा, इसके मूल में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम है जिसके बारे में हम सभी आज बात कर रहे हैं और यह भूमि, वायु, समुद्र, साइबर और अंतरिक्ष जैसे पारंपरिक युद्ध क्षेत्रों के साथ-साथ युद्ध के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभरा है।
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम अब केवल एक सहायक कारक नहीं रह गया है; भविष्य के संघर्षों के तेज, अधिक जटिल और अधिक प्रतिस्पर्धी होने के साथ, ये युद्धक्षेत्र में बढ़त हासिल करने के लिए निर्णायक कारक हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि रक्षा बलों को अपनी परिचालन श्रेष्ठता बनाए रखने के लिए स्पेक्ट्रम की आवश्यकता का पुनर्मूल्यांकन करना होगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जैमिंग और जीपीएस स्पूफिंग में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध का व्यापक रूप से उपयोग किया गया था। एडवांस इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता भविष्य में सफलता सुनिश्चित कर सकती है।
भारतीय सेना के सिग्नल कोर के सिग्नल ऑफिसर-इन-चीफ और कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल विवेक डोगरा, एसएम के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया है कि कोई भी क्षेत्र सीमित नहीं है।
डोगरा ने कहा, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम ने सीमाओं को मिटा दिया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान, दोहरे उपयोग वाली वाणिज्यिक तकनीक ने नागरिक और सैन्य स्पेक्ट्रम के बीच की रेखाओं को धुंधला कर दिया है।
पीएचडीसीसीआई रक्षा एवं एचएलएस समिति के अध्यक्ष अशोक अटुलुरी ने कहा कि प्रतिभा, क्षमता या धन की कोई कमी नहीं है।
उन्होंने कहा, “हमें बस आगे बढ़ने और भारत में ही तकनीकी रूप से उन्नत युद्ध प्रणालियों को डिजाइन, विकसित और निर्मित करने की इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। सरकार द्वारा शुरू किए गए नए आरडीआई (अनुसंधान, विकास एवं नवाचार) कोष के माध्यम से पहले ही काफी डीप-टेक फंडिंग की जा चुकी है।”
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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