ग्रीनलैंड पर अमेरिकी आक्रमण से नाटो को होगा नुकसान: स्पेनिश पीएम सांचेज
नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। ग्रीनलैंड को कब्जे में करने के फैसले का यूरोपीय यूनियन के सदस्यों ने पुरजोर विरोध किया है। विभिन्न देशों ने इसे गलत करार दिया है। इस बीच स्पेनिश पीएम पेड्रो सांचेज का एक साक्षात्कार चर्चा में है। इस इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया है कि अगर यूएस ग्रीनलैंड पर हमला कर उसे अपने अधीन लाता है तो इसके दूरगामी भू-राजनीतिक परिणाम होंगे, नाटो की एकता खतरे में पड़ेगी, और इससे सबसे ज्यादा खुश रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन होंगे, क्योंकि फिर उनके लिए यूक्रेन पर कब्जा करने की राह आसान हो जाएगी।
रविवार को एक अखबार में छपे इंटरव्यू में सांचेज ने कहा कि ऐसा कदम रूस के यूक्रेन पर हमले को सही ठहराएगा और ग्लोबल सुरक्षा के लिए एक नाजुक समय में पश्चिमी गठबंधन को कमजोर करेगा।
स्पेन के ला वैनगार्डिया अखबार से सांचेज ने कहा कि डेनमार्क के एक स्वायत्त इलाके ग्रीनलैंड के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दूरगामी जियोपॉलिटिकल नतीजे होंगे। उन्होंने कहा कि यह इलाका हथियाने के लिए ताकत के इस्तेमाल को सामान्य बनाकर एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा, जिसके लिए 2022 में यूक्रेन पर हमला शुरू करने के बाद से रूस की बड़े पैमाने पर निंदा की गई है। सांचेज के अनुसार, इससे पुतिन दुनिया के सबसे खुश आदमी बन जाएंगे, क्योंकि यह मास्को के खिलाफ नाटो के नैतिक और राजनीतिक रुख को कमजोर करेगा।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ने ग्रीनलैंड के समर्थन में खड़े हुए 27 में से आठ यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। उन्होंने टूथ सोशल पर लिखा, हमने डेनमार्क और यूरोपियन यूनियन के सभी देशों और दूसरों को कई वर्षों तक सब्सिडी दी है, उनसे टैरिफ या किसी और तरह का मेहनताना नहीं लिया। अब, सदियों बाद, डेनमार्क के लिए वापस देने का समय आ गया है; दुनिया की शांति दांव पर है। चीन और रूस ग्रीनलैंड चाहते हैं, और डेनमार्क इसके बारे में कुछ नहीं कर सकता। उनके पास अभी सुरक्षा के लिए दो डॉगस्लेज (तंज कसते हुए, यहां चीन और रूस को दो डॉगस्लेज कहा गया है) हैं, जिनमें से एक हाल ही में जोड़ा गया है।
इसके बाद ब्रिटेन के पीएम कीर स्टारमर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ग्रीनलैंड पर हमारी राय बहुत साफ है; यह डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा है और इसका भविष्य ग्रीनलैंडर्स और डेनमार्क का मामला है। हमने यह भी साफ कर दिया है कि आर्कटिक सिक्योरिटी पूरे नाटो के लिए मायने रखती है और सहयोगी देशों को आर्कटिक के अलग-अलग हिस्सों में रूस से खतरे से निपटने के लिए मिलकर और ज्यादा काम करना चाहिए। नाटो सहयोगियों की सुरक्षा के लिए टैरिफ लगाना पूरी तरह से गलत है। हम बेशक इस मामले को सीधे अमेरिकी सरकार के सामने उठाएंगे।
बदलते घटनाक्रम के बीच ईयू ने अपने सभी राजदूतों की आपातकालीन बैठक बुलाई है। यूरोपीय संघ के 27 देशों के राजदूत रविवार को एक इमरजेंसी मीटिंग के लिए इकट्ठा होंगे। साइप्रस, जिसके पास छह महीने के लिए ईयू की रोटेटिंग प्रेसिडेंसी है, ने शनिवार देर रात कहा कि उसने रविवार को यह मीटिंग बुलाई है।
--आईएएनएस
केआर/
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घरेलू स्तर पर मांग मजबूत, आम बजट 2026-27 में सुधारों को जारी रखने पर हो फोकस : सीआईआई
नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। भारत में व्यवसायों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और घरेलू स्तर पर मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। ऐसे में सरकार से आम बजट 2026-27 में सुधारों को जारी रखने की उम्मीद है। यह बयान भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने रविवार को जारी हुए ताजा बिजनेस आउटलुक सर्वे में दिया गया।
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर से दिसंबर) में सीआईआई का बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स लगातार तीसरी तिमाही बढ़कर 66.5 हो गया है, जो कि बीते पांच तिमाहियों में सबसे अधिक है।
रिपोर्ट में बताया गया कि कंपनियां मांग, मुनाफे और निवेश की परिस्थितियों को लेकर आशावादी हैं।
सीआईआई के सर्वे में बताया कि वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में दो-तिहाई कंपनियों ने मजबूत मांग दर्ज की है, चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 72 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि मांग आने वाले समय में बढ़ सकती है। इसकी वजह जीएसटी दरों में कटौती और त्योहारी सीजन के दौरान खर्च में बढ़ोतरी होना है।
इसके अलावा सर्वे में कहा गया कि कंपनियों की हायरिंग और निवेश की योजनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि बढ़ते आत्मविश्वास से उद्योग की वैश्विक चुनौतियों से निपटने की क्षमता उजागर होती है, जिसे मजबूत घरेलू मांग और घरेलू सुधारों का समर्थन प्राप्त है।
उन्होंने आगे कहा कि कंपनियां आने वाले महीनों में विकास की गति में और तेजी आने की उम्मीद करती हैं।
आने वाले आम बजट पर सीआईआई ने कहा कि उसे उम्मीद है कि सरकार भारत को विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए सुधारों को जारी रखेगी।
इंडस्ट्री बॉडी ने दीर्घकालिक विकास और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए नीति निर्माताओं को कई उपाय सुझाए हैं।
बजट को लेकर इंडस्ट्री बॉडी की एक प्रमुख सिफारिश यह है कि लगभग 150 लाख करोड़ रुपए की संशोधित राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (एनआईपी) 2.0 के माध्यम से उच्च पूंजीगत व्यय जारी रखा जाए।
सीआईआई ने कहा कि ध्यान ऐसी परियोजनाओं पर केंद्रित होना चाहिए जो तुरंत कार्यान्वित की जा सकें और राजस्व उत्पन्न करती हों, साथ ही विवादों का त्वरित समाधान किया जाए ताकि अवसंरचना में अधिक निजी निवेश आकर्षित हो सके।
सीआईआई ने घरेलू और विदेशी पूंजी जुटाने के लिए एक इंडिया डेवलपमेंट एंड स्ट्रैटेजिक फंड स्थापित करने का भी सुझाव दिया है।
यह फंड एमएसएमई, स्वच्छ ऊर्जा और कौशल विकास जैसी घरेलू प्राथमिकताओं को समर्थन देने के साथ-साथ भारतीय कंपनियों को रणनीतिक विदेशी निवेश करने में भी मदद कर सकता है।
अनुपालन के बोझ को कम करने और व्यापार करने में आसानी लाने के लिए, सीआईआई ने एकीकृत उद्यम पहचान, डिजिटल रिकॉर्ड और वास्तविक समय अनुपालन प्रणालियों सहित नियामक डिजिटलीकरण को मजबूत करने के लिए 1,000 करोड़ रुपए के डिजिटलीकरण कोष का प्रस्ताव रखा है।
इनोवेशन पर सीआईआई ने 10 उन्नत शिक्षा और अनुसंधान केंद्र बनाने की सिफारिश की, जिनमें से प्रत्येक का बजट 1,000 करोड़ रुपए होगा और जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
--आईएएनएस
एबीएस/
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