Arvind Kejriwal SIR Notice: केजरीवाल और परिवार को ‘Unmapped’ नोटिस, AAP ने EC से पूछा सवाल
नई दिल्ली: दिल्ली में वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision (SIR) के तहत पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत उनके परिवार के पांच सदस्यों को नोटिस जारी किए गए हैं। ये नोटिस ‘Unmapped with Last SIR’ कैटेगरी के तहत जारी हुए हैं। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक इसका मतलब है कि संबंधित मतदाताओं का रिकॉर्ड पिछली SIR की मतदाता सूची से मैप नहीं हो पाया है।
केजरीवाल समेत परिवार के 5 सदस्यों को नोटिस
नोटिस पाने वालों में अरविंद केजरीवाल के अलावा उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, बेटे पुलकित केजरीवाल और माता-पिता गोबिंद राम केजरीवाल व गीता देवी शामिल हैं। ये सभी नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के पार्ट-51, KG मार्ग के उन 110 मतदाताओं में शामिल हैं, जिन्हें इस प्रक्रिया के तहत नोटिस भेजा गया है।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, नोटिस जारी होने का संबंध पिछली SIR सूची के साथ रिकॉर्ड के मैप न होने से है। एक चुनाव अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि नोटिस मिलने का अर्थ अपने आप वोट देने की पात्रता खत्म होना नहीं है और अंतिम सूची दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी की जाएगी।
The office of Delhi’s Chief Electoral Officer has issued notices under the SIR process to AAP convenor and former Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal and his family.
— ANI (@ANI) September 19, 2026
Notices have been issued to Arvind Kejriwal, his wife Sunita Kejriwal, his son Pulkit Kejriwal, and his parents,… pic.twitter.com/yLqjhgqosa
AAP ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
नोटिस सामने आने के बाद AAP ने चुनाव आयोग से सवाल किया। पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट में पूछा कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और उनके परिवार के सदस्यों के नाम वोटर लिस्ट में इस तरह की कैटेगरी में कैसे आ सकते हैं। पार्टी ने इस मामले में चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की मांग की है।
Is everything happening in this country just to keep the Supreme Lord happy?@ECISVEEP, how is it possible that the names of three-time Delhi Chief Minister @ArvindKejriwal Ji and his family members are missing from the Delhi voter list? https://t.co/J3oC8TQiC7
— AAP (@AamAadmiParty) September 19, 2026
दिल्ली SIR में 47.6 लाख नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर
दिल्ली में चल रही SIR प्रक्रिया के तहत 31 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी हुई थी। इसमें करीब 97.5 लाख मतदाताओं के नाम हैं, जबकि पहले करीब 1.45 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे। यानी लगभग 47.6-47.7 लाख नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हैं।
ड्राफ्ट सूची से बाहर किए गए मतदाताओं में अनुपस्थित, दूसरी जगह स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट जैसी श्रेणियां शामिल हैं। हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची में नाम न होने से अंतिम रूप से मतदाता की पात्रता समाप्त नहीं मानी जाती। प्रभावित मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दाखिल करने का अवसर दिया गया है।
30 सितंबर तक कर सकते हैं दावा
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से प्रभावित लोग 30 सितंबर 2026 तक Form 6 और जरूरी दस्तावेजों के साथ दावा दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद चुनाव अधिकारी प्राप्त दावों और आपत्तियों की जांच करेंगे। दिल्ली की फाइनल वोटर लिस्ट 4 नवंबर 2026 को जारी की जानी है।
हाथ में अंडे-टमाटर और शराब की बोतल... सीएम मान के काफिले के पास प्रदर्शन करते ही गिरफ्तार हुए बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू
Ravneet Bittu detained: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट देखने को मिली है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को शनिवार को लुधियाना में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के गेट के पास से हिरासत में ले लिया गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक कार्यक्रम के दौरान उनके काफिले के गुजरने के वक्त वे वहां विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान बिट्टू अपने साथ शराब की एक बोतल, अंडे के छिलके और टमाटर लेकर पहुंचे थे, जिसके जरिए उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ अपना अनोखा रोष प्रकट किया।
क्यों कर रहे थे रवनीत बिट्टू प्रदर्शन?
यह पूरा विरोध प्रदर्शन एक दिन पहले यानी शुक्रवार को पठानकोट जाते समय रवनीत बिट्टू के काफिले पर हुए कथित हमले के विरोध में किया गया था। बिट्टू भाजपा की 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' में शामिल होने के लिए जा रहे थे।
हिरासत में लिए जाने से पहले मीडिया से बातचीत करते हुए रवनीत बिट्टू ने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी पंजाब से जुड़े जनहित के मुद्दों को पूरी मजबूती से उठाती रहेगी। बिट्टू ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब भी जरूरत होगी, बीजेपी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री मान के कार्यक्रमों और उनके कार्यालय के आसपास शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखेंगे।
#WATCH | Ludhiana, Punjab: Former Union Minister and BJP leader Ravneet Singh Bittu was detained by Punjab Police today after he protested near the Punjab Agricultural University (PAU) gate when Chief Minister Bhagwant Mann’s cavalcade was passing through the area.
— ANI (@ANI) September 19, 2026
(Source:… pic.twitter.com/OCmHrax3Du
उन्होंने आगे कहा, "कल मेरे काफिले पर अंडे और टमाटर फेंके गए थे। आज मैंने उन्हें वही चीजें वापस लौटाई हैं। अगर 'आप' कार्यकर्ता बीजेपी के नेताओं, रैलियों और यात्राओं का विरोध करेंगे, तो हमारे कार्यकर्ता भी पंजाब सरकार और उसके नेताओं के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का अपना हक निभाएंगे। हम चुप बैठने वाले नहीं हैं।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब सरकार को यह साफ संदेश है कि राजनीतिक विरोध को पुलिसिया कार्रवाई के जरिए दबाया नहीं जा सकता।
शुक्रवार को पठानकोट जाते समय हुआ था हमला
आपको बता दें कि इससे एक दिन पहले शुक्रवार को बटाला के पास रवनीत बिट्टू के काफिले पर हमला हुआ था, जिसके लिए बीजेपी ने सीधे तौर पर आम आदमी पार्टी को जिम्मेदार ठहराया था। भगवा पार्टी का आरोप था कि करीब 100 'आप' कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले को निशाना बनाया और उस पर पत्थर, अंडे तथा टमाटर फेंके।
बीजेपी ने आरोप लगाया कि पंजाब में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है और राज्य में खुलेआम 'माफिया राज' चल रहा है। पार्टी का यह भी कहना है कि 'आप' सरकार राज्य में बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की साजिश रच रही है।
तरुण चुघ ने आप सरकार पर बोला तीखा हमला
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने 'आप' सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पठानकोट में बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू के काफिले पर हुआ यह कायरतापूर्ण हमला, जो 'गुरुद्रोही' भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल के इशारे पर किया गया, आप पार्टी की घबराहट, निराशा और तानाशाही सोच का सबसे गंदा रूप है।
तरुण चुघ ने आगे कहा कि आज पंजाब में कानून का खौफ पूरी तरह से खत्म हो चुका है और खुला 'माफिया राज' चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह घटना इस बात का पुख्ता सबूत है कि राज्य में कानून-व्यवस्था दिवालिया हो चुकी है; जब जेड-प्लस (Z-plus) सुरक्षा प्राप्त एक नेता ही सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक की सुरक्षा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है, जो पूरी तरह भगवान के भरोसे छोड़ दिए गए हैं। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर आम आदमी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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