नवरात्रि हिंदुओं का एक प्रमुख और पावन पर्व है, जो साल में चार बार आती है। साल में दो मुख्य नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) के अलावा दो गुप्त नवरात्रि माघ और आषाढ़ मास में आती हैं। माघ महीने में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि विशेष तौर पर तंत्र-मंत्र, साधना और गुप्त सिद्धियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसमें दस महाविद्याओं और मां दुर्गा के नौ रुपों की गुप्त रूप से पूजा की जाती है। इसे “गुप्त” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें की जाने वाली साधनाएँ सार्वजनिक न होकर गुप्त रूप से की जाती हैं। इन नौ दिनों में दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। साधक व्रत रखते हैं, मंत्र जप करते हैं और सिद्धि प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। यह पर्व आत्मिक शुद्धि और शक्ति जागरण का प्रतीक माना जाता है। यह समय उन साधकों के लिए अत्यंत फलदायी है जो मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन की की गुप्त बाधाओं को दूर करना चाहते हैं। आइए आपको बताते हैं कब से शुरु हो रही है माघ मास की गुप्त नवरात्रि।
माघ गुप्त नवरात्रि कब है?
इस बार माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 19 जनवरी, सोमवार के दिन से हो रही है और इसका समापन 27 जनवरी मंगलवार के दिन को होगा। इस अवधि में श्रद्धालु नौ दिनों तक उपवास रखते हुए देवी मां के विभिन्न स्वरूपों की साधना करते हैं। गुप्त नवरात्रि में भव्य या सार्वजनिक पूजन के स्थान पर अंतर्मन से की जाने वाली उपासना और रहस्यमय साधनाओं को अधिक महत्व दिया जाता है। इसी कारण इस नवरात्रि को “गुप्त” कहा गया है, जहां भक्त एकांत में रहकर मंत्र जप और ध्यान द्वारा शक्ति की आराधना करते हैं।
माघ गुप्त नवरात्रि 2026 पूजा नियम
यह खासतौर पर गुप्त नवरात्रि है, इसलिए इस दौरान अपनी पूजा और संकल्प को गोपनीय रखना चाहिए। इस समय दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए या फिर 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' मंत्र का मानसिक जाप करने से अत्यंत लाभ प्राप्त होता है। इस दौरान सात्विक आहार लें और मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें।
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