सहारनपुर PNB करेंसी चेस्ट में नकली नोटों की साजिश, NIA ने एक और आरोपी को किया गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) करेंसी चेस्ट से नकली भारतीय करेंसी की बरामदगी और उसकी सप्लाई से जुड़ी साजिश के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है. NIA ने उत्तराखंड के हरिद्वार निवासी नीतू पुत्र सरफराज को गिरफ्तार किया है.
NIA के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी नीतू मुख्य आरोपी आदेश चौधरी और मामले में गिरफ्तार किए गए अन्य प्रमुख आरोपियों का करीबी सहयोगी है. एजेंसी को आशंका है कि वह करेंसी चेस्ट के जरिए नकली नोटों को सर्कुलेट करने की साजिश में शामिल था.
7.29 करोड़ रुपये के नकली नोट मिलने से खुला मामला
यह मामला 29 अगस्त 2026 को सामने आया था. सहारनपुर के सदर बाजार थाना पुलिस को पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट से बड़ी मात्रा में नकली भारतीय करेंसी बरामद होने की सूचना मिली थी. जांच के दौरान करीब 7.29 करोड़ रुपये अंकित मूल्य के नकली नोट मिलने की बात सामने आई. मामले की जांच में PNB के तीन बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई थी, जिसके बाद बैंक की ओर से तीनों कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया था.
पहले स्थानीय थाने में दर्ज हुआ था केस
इस मामले में शुरुआत में 29 अगस्त 2026 को थाना सदर बाजार, सहारनपुर में FIR संख्या 0431/2026 दर्ज की गई थी. यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 178 के तहत तीन आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुई थी. इसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मामले को अपने हाथ में लेते हुए 3 सितंबर 2026 को RC-02/2026/NIA/LKW के रूप में दोबारा दर्ज किया और जांच शुरू की.
अब तक कई आरोपी गिरफ्तार
NIA की जांच में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. एजेंसी ने इससे पहले FIR में नामजद आरोपी अमित कुमार तथा मामले के प्रमुख आरोपियों आदेश चौधरी, मुकेश कुमार और राजेंद्र को गिरफ्तार किया है. NIA के अनुसार, गिरफ्तारियों का सिलसिला 7, 15 और 20 सितंबर 2026 को हुआ.
पूरी साजिश का पता लगाने में जुटी NIA
NIA अब यह पता लगाने में जुटी है कि पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में नकली नोट कैसे पहुंचे, इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और नकली करेंसी को आगे कहां और किस तरीके से सर्कुलेट किया जाना था. जांच एजेंसी के मुताबिक, मामले की जांच अभी जारी है. NIA शेष सह-आरोपियों और संदिग्धों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है. एजेंसी का उद्देश्य नकली करेंसी से जुड़े पूरे नेटवर्क और इसके पीछे की साजिश का पर्दाफाश करना है.
बैंक फ्रॉड केस में तीन बैंक अधिकारियों को 7 साल की सजा, 85-85 हजार रुपये जुर्माना
जयपुर की सीबीआई अदालत ने बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (OBC) के तीन तत्कालीन कर्मचारियों को दोषी करार देते हुए सात-सात साल के कठोर कारावास (RI) की सजा सुनाई है. अदालत ने तीनों दोषियों पर 85-85 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
अदालत ने रामजी लाल मीणा, तत्कालीन शाखा प्रबंधक, मुरारी लाल मीणा, तत्कालीन स्पेशल असिस्टेंट और थान सिंह लश्कर, तत्कालीन चपरासी-कम-हाउसकीपर को दोषी ठहराया. तीनों आरोपी OBC की श्योसिंहपुरा शाखा, लालसोट, दौसा में तैनात थे.
क्या है पूरा मामला?
सीबीआई ने यह मामला 1 फरवरी 2019 को ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के तत्कालीन डिप्टी जनरल मैनेजर की शिकायत के आधार पर दर्ज किया था. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन स्पेशल असिस्टेंट मुरारी लाल मीणा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अनधिकृत 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' जारी किए. इन प्रमाणपत्रों के जरिए बैंक के पास गिरवी रखी गई संपत्तियों को उस समय रिलीज करने की सुविधा दी गई, जब संबंधित ऋण खातों में देनदारी अभी बकाया थी. सीबीआई के मुताबिक, इस प्रक्रिया के चलते बैंक को 12,14,660.71 रुपये का गलत तरीके से नुकसान हुआ. यह नुकसान तीन अलग-अलग ऋण खातों से संबंधित था.
2022 में दाखिल हुई थी चार्जशीट
मामले की जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने 5 मई 2022 को तीनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. चार्जशीट में तत्कालीन स्पेशल असिस्टेंट मुरारी लाल मीणा, तत्कालीन शाखा प्रबंधक रामजी लाल मीणा और तत्कालीन चपरासी-कम-हाउसकीपर थान सिंह लश्कर को आरोपी बनाया गया था.
मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद जयपुर की सीबीआई अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया और 18 सितंबर 2026 को उन्हें सात-सात साल के कठोर कारावास तथा 85-85 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई. सीबीआई के अनुसार, अदालत का यह फैसला मामले में हुई सुनवाई और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आया है.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation










