बैंक फ्रॉड केस में तीन बैंक अधिकारियों को 7 साल की सजा, 85-85 हजार रुपये जुर्माना
जयपुर की सीबीआई अदालत ने बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (OBC) के तीन तत्कालीन कर्मचारियों को दोषी करार देते हुए सात-सात साल के कठोर कारावास (RI) की सजा सुनाई है. अदालत ने तीनों दोषियों पर 85-85 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
अदालत ने रामजी लाल मीणा, तत्कालीन शाखा प्रबंधक, मुरारी लाल मीणा, तत्कालीन स्पेशल असिस्टेंट और थान सिंह लश्कर, तत्कालीन चपरासी-कम-हाउसकीपर को दोषी ठहराया. तीनों आरोपी OBC की श्योसिंहपुरा शाखा, लालसोट, दौसा में तैनात थे.
क्या है पूरा मामला?
सीबीआई ने यह मामला 1 फरवरी 2019 को ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के तत्कालीन डिप्टी जनरल मैनेजर की शिकायत के आधार पर दर्ज किया था. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन स्पेशल असिस्टेंट मुरारी लाल मीणा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अनधिकृत 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' जारी किए. इन प्रमाणपत्रों के जरिए बैंक के पास गिरवी रखी गई संपत्तियों को उस समय रिलीज करने की सुविधा दी गई, जब संबंधित ऋण खातों में देनदारी अभी बकाया थी. सीबीआई के मुताबिक, इस प्रक्रिया के चलते बैंक को 12,14,660.71 रुपये का गलत तरीके से नुकसान हुआ. यह नुकसान तीन अलग-अलग ऋण खातों से संबंधित था.
2022 में दाखिल हुई थी चार्जशीट
मामले की जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने 5 मई 2022 को तीनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. चार्जशीट में तत्कालीन स्पेशल असिस्टेंट मुरारी लाल मीणा, तत्कालीन शाखा प्रबंधक रामजी लाल मीणा और तत्कालीन चपरासी-कम-हाउसकीपर थान सिंह लश्कर को आरोपी बनाया गया था.
मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद जयपुर की सीबीआई अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया और 18 सितंबर 2026 को उन्हें सात-सात साल के कठोर कारावास तथा 85-85 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई. सीबीआई के अनुसार, अदालत का यह फैसला मामले में हुई सुनवाई और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आया है.
फिर एक बार ट्रंप ने भारत-पाक युद्ध रुकवाने का क्रेडिट लिया, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को कहा- फैंटास्टिक मैन
एक बार फिर से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान का युद्ध रुकवाने का दावा कर दिया है. उन्होंने साथ ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को फैंटास्टिक मैन भी बताया. दरअसल, ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक सत्र को संबोधित किया. इस दौरान, उन्होंने फिर से भारत-पाक युद्ध रुकवाने का दावा किया. खास बात है कि ट्रंप ऑपरेशन सिंदूर के खत्म होने वाले दिन से लेकर अब तक 150 से अधिक बार भारत-पाक युद्ध रुकवाने का दावा कर चुके हैं. हालांकि, भारत ने साफ कहा है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी विवाद के समाधान में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की गई है.
ट्रंप बोले- ईरान पहले जैसा ताकतवर नहीं
ट्रंप ने अपने संबोधन में ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की शक्ति को काफी कम कर दिया है. ईरान अब पहले की तरह प्रभावशाली नहीं रहा. ट्रंप ने कहा कि एक वक्त था, जब ईरान पश्चिम एशिया में दबदबा रखने वाला देश हुआ करता था लेकिन अब परिस्थितियों में बदलाव आ गया है.
ईरान के भविष्य को लेकर ट्रंप ने दो विकल्प दिए. उन्होंने कहा कि अमेरिका के सामने ईरान के साथ समझौता करने या फिर उसे खत्म कर देने का रास्ता है. ट्रंप ने कहा कि इस मुद्दे पर उनको जल्द फैसला लेना होगा, जिससे ईरान को फिर से लोगों और दूसरे देशों को नुकसान पहुंचाने का मौका न मिल सके.
जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला ने ईरान युद्ध का किया जिक्र
ट्रंप के भाषण के बाद जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया. ईरान से जुड़े संघर्ष के व्यापक प्रभावों का उन्होंने उल्लेख किया. किंग अब्दुल्ला ने कहा कि युद्ध का असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इसका प्रभाव दिखाई दे रहा है. उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का असर मुंबई से लेकर अमेरिका के मिनेसोटा असर महसूस हो रहा है.
वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई का भी जिक्र
अमेरिका के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबोधन के दौरान, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का भी जिक्र किया और उसके परिणामों की प्रशंसा भी की. उन्होंने कहा कि जीतने वाले को ही सब मिलता है. बता दें, अमेरिका ने जनवरी में वेनेजुएला के तात्कालीन राष्ट्रपति मादुरो को सत्ता से हटाकर गिरफ्तार कर लिया था. वे अब भी अमेरिका की जेल में ही बंद है. मादुरो के साथ उनकी पत्नी भी अमेरिकी कारागार में बंद हैं.
'अमेरिका में कम्युनिज्म नहीं चलेगा'
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में कम्युनिज्म कभी नहीं आएगा, जबकि क्यूबा में आजादी जरूर आएगी. ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका अपने पड़ोसी देशों को ऐसी जगह नहीं बनने देगा, जहां से दूसरे देश अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकें.
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