नीमच में महिला स्व-सहायता समूह और महिला रसोइयों का प्रदर्शन, बेलन-चकला लेकर पहुंची कलेक्ट्रेट, मानदेय बढ़ाने और लंबित भुगतान की मांग
नीमच: नीमच महिला स्व-सहायता समूह एवं महिला रसोइयों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उनकी यह हड़ताल मानदेय बढ़ाने और लंबित भुगतान सहित कई मांगों को लेकर शुरू हुई है। प्रदर्शन के दौरान संगठन की पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में बेलन-चकला बजाकर विरोध जताया। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है।
हिला स्व-सहायता समूह संगठन का कहना है कि करीब 96 हजार महिला समूह संचालक और 2 लाख 32 हजार महिला रसोइया बच्चों, गर्भवती और धात्री माताओं के पोषण के साथ स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इसके बावजूद उन्हें बहुत कम मानदेय मिलता है। इसमें भी महीनों की देरी होने से परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जल्द ही उनकी मांगों को स्वीकार किया जाये नहीं तो उनकी यह हड़ताल जारी रहेगी।
क्या हैं इनकी प्रमुख मांगें?
संगठन ने मांग की है कि योजनाओं की राशि हर माह निश्चित तारीख पर समय से जारी की जाए और लंबित भुगतान तत्काल किया जाए। आंगनवाड़ी रसोइयों के 500 रुपये मासिक मानदेय में बढ़ोतरी, मध्यान्ह भोजन रसोइयों का मानदेय 10 की बजाय 12 माह करने, ईंधन और परिवहन के लिए अलग राशि देने की भी मांग की गई है।
इसके अलावा पोषण आहार की लागत बढ़ाने, ड्रेस के लिए 1000 रुपये वार्षिक राशि, अतिरिक्त कार्य के लिए मानदेय, अनुभवी रसोइयों को प्राथमिकता और अनुबंध नवीनीकरण को सरल कर 5 साल करने की मांग रखी गई है।
संगठन ने की खास यह अपील
संगठन ने कहा कि महिलाओं को अपनी जायज मांग उठाने पर अनुबंध समाप्त करने या काम से हटाने की धमकी न दी जाए। संगठन का कहना है कि वह शासन के विरुद्ध नहीं, बल्कि योजनाओं को मजबूत करने और काम करने वाली महिलाओं को समय पर भुगतान व सम्मानजनक कार्य-परिस्थितियां दिलाने के पक्ष में है।
8th Pay Commission Update: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट, 10 अक्टूबर से पहले करना होगा यह जरूरी काम
8th Pay Commission Update: देश भर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें इस समय आठवें वेतन आयोग पर टिकी हुई हैं. सरकारी कर्मचारी अपनी सैलरी बढ़ोतरी, फिटमेंट फैक्टर और नए भत्तों को लेकर आयोग से जुड़े हर नए अपडेट को बारीकी से देख रहे हैं. इसी बीच वेतन आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक महत्वपूर्ण नोटिस जारी किया है. इस नोटिस के सामने आते ही कर्मचारी संगठनों में हलचल बढ़ गई है, क्योंकि आयोग अब सीधे तौर पर जमीनी स्तर पर जाकर हितधारकों से बातचीत करने जा रहा है.
दशहरा के बाद मुंबई में जुटेगा वेतन आयोग
आठवें वेतन आयोग की ओर से जारी किए गए आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, आयोग की टीम आगामी 22 और 23 अक्टूबर को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का दौरा करेगी. यह बैठक 20 अक्टूबर को दशहरा का त्योहार बीतने के ठीक बाद आयोजित की जाएगी. इस दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान वेतन आयोग अलग-अलग केंद्रीय विभागों के कर्मचारियों, संगठनों, पेशेवर संस्थानों और कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ आमने-सामने बैठकर विचार-विमर्श करेगा.
10 अक्टूबर तक आवेदन करना अनिवार्य
वित्त मंत्रालय के अधीन काम कर रहे आठवें केंद्रीय वेतन आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि मुंबई में बातचीत का हिस्सा बनने के लिए एक तय प्रक्रिया का पालन करना होगा. जो भी यूनियन या कर्मचारी संगठन आयोग के समक्ष अपनी बात रखना चाहते हैं, उन्हें ऑनलाइन माध्यम से समय यानी अपॉइंटमेंट लेना पड़ेगा. इसके लिए अंतिम तारीख 10 अक्टूबर तय की गई है. 10 अक्टूबर के बाद मिलने वाले किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा.
यूनिक मेमो आईडी के बिना नहीं मिलेगा मौका
आयोग ने अपने निर्देश में यह भी साफ किया है कि आवेदन पत्र भरते समय संगठनों को अपनी 'यूनिक मेमो आईडी' दर्ज करना जरूरी होगा. यह आईडी तब मिलती है जब कोई संगठन पहले से अपना मांग पत्र या मेमोरेंडम वेबसाइट पर जमा कर देता है. इसके बिना बैठक के लिए अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा. सभी आवेदनों की जांच पूरी होने के बाद आयोग खुद चयनित प्रतिनिधियों को बैठक के स्थान और समय की पूरी जानकारी भेजेगा.
देशभर में चल रहा बैठकों का दौर
मुंबई से पहले भी वेतन आयोग देश के कई प्रमुख शहरों में जाकर कर्मचारियों की नब्ज टटोल चुका है. आयोग ने सितंबर के शुरुआती हफ्ते में पुडुचेरी में और उसके बाद चंडीगढ़ में लगातार तीन दिनों तक बैठकें आयोजित की थीं. वहीं मुंबई जाने से पहले 7 और 8 अक्टूबर को आयोग की टीम बेंगलुरु में विभिन्न कर्मचारी संगठनों से मुलाकात करने वाली है. इन बैठकों का मुख्य मकसद कर्मचारियों की वास्तविक समस्याओं और महंगाई के दौर में उनके जीवन यापन के खर्च को समझना है.
वेतन और भत्तों से जुड़े अहम सुझाव होंगे पेश
मुंबई बैठक में कर्मचारी संगठनों की ओर से कई बड़ी मांगें रखे जाने की उम्मीद है. इसमें बेसिक पे में भारी इजाफा, फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाना, मकान किराया भत्ता यानी एचआरए के नियमों में सुधार और पुरानी पेंशन से जुड़े मुद्दे शामिल हो सकते हैं. कर्मचारियों की मांग है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई को देखते हुए उनके वेतन ढांचे में ऐसा बदलाव हो जिससे निचले स्तर के कर्मियों को भी ठोस राहत मिल सके.
कब तक आएंगी सिफारिशें और कब होगा अमल
वेतन आयोग के नियमों के मुताबिक, आयोग को अपने गठन की तारीख से 18 महीनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होती है. इस हिसाब से वेतन आयोग की रिपोर्ट आने की अंतिम समय-सीमा मई 2027 के आसपास बनती है. रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सरकार उसकी समीक्षा करती है और कैबिनेट की मंजूरी के बाद उसे लागू किया जाता है. ऐतिहासिक रिकॉर्ड को देखें तो सिफारिशों को पूरी तरह से लागू होने में करीब दो साल का समय लग सकता है, यानी कर्मचारियों के खातों में नई व्यवस्था का पूरा फायदा 2029 या 2030 तक दिखने की पूरी संभावना है.
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