Ports और Harbour प्रोजेक्ट्स के लिए Environmental Clearance की वैधता बढ़कर हुई 20 साल
पर्यावरण मंत्रालय ने बंदरगाहों, ‘हार्बर’, ‘ब्रेकवाटर’ और ‘ड्रेजिंग’ परियोजनाओं के लिए दी जाने वाली पर्यावरण मंजूरी की वैधता अवधि मौजूदा 10 साल से बढ़ाकर 20 साल कर दी है। ‘हार्बर’ जहाजों के सुरक्षित ठिकाने को कहा जाता है जबकि ‘ब्रेकवाटर’ तेज लहरों से बंदरगाह, तट या जहाजों को बचाने के लिए समुद्र में बनाई गई सुरक्षा दीवार या संरचना को कहते हैं। ‘ड्रेजिंग’ समुद्र, नदी या बंदरगाह के तल से मिट्टी, गाद, रेत और अन्य जमा सामग्री को निकालने की प्रक्रिया को कहा जाता है।
यह कदम मंत्रालय की ओर से मई में एक मसौदा अधिसूचना जारी किए जाने के चार महीने बाद उठाया गया है। मसौदा अधिसूचना में ऐसी परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी की वैधता को बढ़ाकर 15 साल करने का प्रस्ताव था, जिसके बाद पांच साल के विस्तार का विकल्प था। हालांकि, हितधारकों के साथ परामर्श के बाद पर्यावरण मंजूरी की वैधता बढ़ाकर 20 साल करने का निर्णय लिया गया।
बदलावों से संबंधित अधिसूचना सोमवार को जारी की गयी, जिसमें मंत्रालय ने कहा कि बंदरगाह और हार्बर परियोजनाओं के लंबे निर्माण समय और चरणबद्ध विकास की विशेषताओं के कारण यह निर्णय लिया गया। इस कदम पर कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने मंगलवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि नवीनतम संशोधन ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के लिए किया गया है जो पूरी संभावना है कि एक मोडाणी (मोदी-अदाणी) उद्यम होगा।
नीमच में महिला स्व-सहायता समूह और महिला रसोइयों का प्रदर्शन, बेलन-चकला लेकर पहुंची कलेक्ट्रेट, मानदेय बढ़ाने और लंबित भुगतान की मांग
नीमच: नीमच महिला स्व-सहायता समूह एवं महिला रसोइयों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उनकी यह हड़ताल मानदेय बढ़ाने और लंबित भुगतान सहित कई मांगों को लेकर शुरू हुई है। प्रदर्शन के दौरान संगठन की पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में बेलन-चकला बजाकर विरोध जताया। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है।
हिला स्व-सहायता समूह संगठन का कहना है कि करीब 96 हजार महिला समूह संचालक और 2 लाख 32 हजार महिला रसोइया बच्चों, गर्भवती और धात्री माताओं के पोषण के साथ स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इसके बावजूद उन्हें बहुत कम मानदेय मिलता है। इसमें भी महीनों की देरी होने से परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जल्द ही उनकी मांगों को स्वीकार किया जाये नहीं तो उनकी यह हड़ताल जारी रहेगी।
क्या हैं इनकी प्रमुख मांगें?
संगठन ने मांग की है कि योजनाओं की राशि हर माह निश्चित तारीख पर समय से जारी की जाए और लंबित भुगतान तत्काल किया जाए। आंगनवाड़ी रसोइयों के 500 रुपये मासिक मानदेय में बढ़ोतरी, मध्यान्ह भोजन रसोइयों का मानदेय 10 की बजाय 12 माह करने, ईंधन और परिवहन के लिए अलग राशि देने की भी मांग की गई है।
इसके अलावा पोषण आहार की लागत बढ़ाने, ड्रेस के लिए 1000 रुपये वार्षिक राशि, अतिरिक्त कार्य के लिए मानदेय, अनुभवी रसोइयों को प्राथमिकता और अनुबंध नवीनीकरण को सरल कर 5 साल करने की मांग रखी गई है।
संगठन ने की खास यह अपील
संगठन ने कहा कि महिलाओं को अपनी जायज मांग उठाने पर अनुबंध समाप्त करने या काम से हटाने की धमकी न दी जाए। संगठन का कहना है कि वह शासन के विरुद्ध नहीं, बल्कि योजनाओं को मजबूत करने और काम करने वाली महिलाओं को समय पर भुगतान व सम्मानजनक कार्य-परिस्थितियां दिलाने के पक्ष में है।
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