एशियन गेम्स- पीटी उषा ने आवास मॉडल पर सवाल उठाया:कहा- ज्यादातर देशों ने इसका विरोध किया था, हम विलेज सिस्टम चाहते थे
इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा ने एशियन गेम्स के आवास मॉडल पर सवाल उठाए हैं। जापान के आइची-नागोया में हो रहे गेम्स में इस बार एथलीट्स विलेज नहीं बनाया गया है। खिलाड़ी अलग-अलग जगहों पर ठहरे हैं। मुख्य आवास के तौर पर क्रूज शिप का इस्तेमाल हो रहा है। उषा ने कहा कि इस फैसले का ज्यादातर देशों ने विरोध किया था और हम विलेज सिस्टम चाहते थे। उषा बोलीं- विलेज सिस्टम हमेशा अच्छा रहता है उषा गेम्स की कोऑर्डिनेशन कमेटी का हिस्सा थीं। उन्होंने बताया कि कमेटी के ज्यादातर सदस्यों ने भी इस मॉडल पर आपत्ति जताई थी। उषा ने कहा- ‘ज्यादातर देशों ने विरोध किया था। मैंने भी किया था। विलेज सिस्टम हमेशा अच्छा रहता है।’ उषा ने बताया कि उन्होंने 1982 से अब तक ज्यादातर एथलीट्स विलेज देखे हैं। उनके मुताबिक, इस बार का शिप मॉडल उनसे बिल्कुल अलग है। ऊषा ने कहा- विलेज खिलाड़ियों को जोड़ता है उषा के मुताबिक, एथलीट्स विलेज सिर्फ रहने की जगह नहीं होता। वहां अलग-अलग देशों के खिलाड़ी एक-दूसरे से मिलते हैं। उन्होंने कहा, “सभी लोग एक जगह आ सकते हैं, एक-दूसरे से मिल सकते हैं और घुल-मिल सकते हैं। यही चीज विलेज को खास बनाती है।” उषा ने माना कि मौजूदा व्यवस्था में खिलाड़ियों के रहने के लिए पर्याप्त सुविधाएं हैं। लेकिन सेंट्रलाइज्ड विलेज नहीं होने से लॉजिस्टिक्स और समन्वय मुश्किल हो सकता है। वेन्यू दूर होने से गेम्स देखना मुश्किल उषा ने गेम्स के वेन्यू के बीच दूरी को भी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि पहले के एशियन गेम्स, ओलिंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स में वेन्यू पास होते थे। उन्होंने कहा, “हमारे समय में सुविधाएं ज्यादा नहीं थीं, लेकिन वेन्यू बहुत पास होते थे। अगर एक वेन्यू से दूसरे जाना हो, तो आसानी होती थी।” मौजूदा गेम्स के बारे में उन्होंने कहा, “यहां अगर मुझे शूटिंग से क्रिकेट जाना हो, तो दूसरा रास्ता लेना पड़ेगा। इसलिए कई गेम्स देखने की इच्छा हो, तो मैं सिर्फ एक वेन्यू जा सकती हूं।” उन्होंने माना कि अलग-अलग जगहों पर आयोजन से वहां खेलों का इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो सकता है। हालांकि, इससे वेन्यू तक पहुंचना मुश्किल होता है। ‘विलेज कल्चर नहीं बदलेगा’ उषा ने कहा कि जापान में अपनाया गया यह मॉडल पारंपरिक एथलीट्स विलेज का विकल्प बनने की शुरुआत नहीं है। उन्होंने कहा- ‘मुझे नहीं लगता कि विलेज कल्चर बदलेगा, क्योंकि जब हम कमेटी में थे, तब किसी को भी यह विचार पसंद नहीं आया था।’
28 से 30 सितंबर तक बैंकों में 3-दिन हड़ताल:5-डे वर्किंग लागू न होने पर यूनियंस का फैसला; शनिवार-रविवार समेत 5 दिन सेवाएं प्रभावित रहेंगी
देश भर के बैंक कर्मचारी 28, 29 और 30 सितंबर को 3 दिन की देशव्यापी हड़ताल करेंगे। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस यानी UFBU ने कहा कि वह हड़ताल टालने के मूड में नहीं है। 22 सितंबर को इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS) के साथ हुई सुलह वार्ता बेनतीजा रही, जिसके बाद यूनियंस ने यह फैसला लिया है। बैंक यूनियंस लंबे समय से हफ्ते में 5 दिन काम यानी 5-डे वर्किंग की मांग कर रही हैं। यूनियंस का कहना है कि मार्च 2024 में बाइलेटरल वेज रिवीजन एग्रीमेंट के तहत 5-डे बैंकिंग पर सहमति बनी थी और इस पर हस्ताक्षर भी हुए थे, लेकिन सरकार ने इसे अब तक लागू नहीं किया है। इससे पहले यूनियंस ने 11 सितंबर को 1 दिन की हड़ताल की थी और मांग न माने जाने पर 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी भी दी है। X पर लिखा- यह शांत बैठने का समय नहीं ग्राहकों पर असर: लगातार 5 दिन प्रभावित हो सकती हैं बैंकिंग सेवाएं क्या है 5-डे बैंकिंग की मांग? वर्तमान नियम: फिलहाल बैंकों में हर महीने के पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को काम होता है, जबकि दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी रहती है। कर्मचारियों की मांग: बैंक कर्मचारी संगठन सभी शनिवारों को छुट्टी घोषित करने और हफ्ते में केवल 5 दिन (सोमवार से शुक्रवार) काम की व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसके बदले वे रोजाना के कामकाजी समय में 30 से 45 मिनट अतिरिक्त देने को तैयार हैं।
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