अदाणी और GMR के लिए खुल सकता है एयरलाइन कारोबार का रास्ता, सरकार नियम बदलने पर कर रही विचार
सरकार दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन में 10% से ज्यादा हिस्सेदारी रखने की छूट देने पर विचार कर रही है। नियम बदला तो अदाणी और GMR के एयरलाइन कारोबार में उतरने का रास्ता साफ हो सकता है। सरकार का लक्ष्य IndiGo और Air India के दबदबे को कम करना है।
एशियन गेम्स- पीटी उषा ने आवास मॉडल पर सवाल उठाया:कहा- ज्यादातर देशों ने इसका विरोध किया था, हम विलेज सिस्टम चाहते थे
इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा ने एशियन गेम्स के आवास मॉडल पर सवाल उठाए हैं। जापान के आइची-नागोया में हो रहे गेम्स में इस बार एथलीट्स विलेज नहीं बनाया गया है। खिलाड़ी अलग-अलग जगहों पर ठहरे हैं। मुख्य आवास के तौर पर क्रूज शिप का इस्तेमाल हो रहा है। उषा ने कहा कि इस फैसले का ज्यादातर देशों ने विरोध किया था और हम विलेज सिस्टम चाहते थे। उषा बोलीं- विलेज सिस्टम हमेशा अच्छा रहता है उषा गेम्स की कोऑर्डिनेशन कमेटी का हिस्सा थीं। उन्होंने बताया कि कमेटी के ज्यादातर सदस्यों ने भी इस मॉडल पर आपत्ति जताई थी। उषा ने कहा- ‘ज्यादातर देशों ने विरोध किया था। मैंने भी किया था। विलेज सिस्टम हमेशा अच्छा रहता है।’ उषा ने बताया कि उन्होंने 1982 से अब तक ज्यादातर एथलीट्स विलेज देखे हैं। उनके मुताबिक, इस बार का शिप मॉडल उनसे बिल्कुल अलग है। ऊषा ने कहा- विलेज खिलाड़ियों को जोड़ता है उषा के मुताबिक, एथलीट्स विलेज सिर्फ रहने की जगह नहीं होता। वहां अलग-अलग देशों के खिलाड़ी एक-दूसरे से मिलते हैं। उन्होंने कहा, “सभी लोग एक जगह आ सकते हैं, एक-दूसरे से मिल सकते हैं और घुल-मिल सकते हैं। यही चीज विलेज को खास बनाती है।” उषा ने माना कि मौजूदा व्यवस्था में खिलाड़ियों के रहने के लिए पर्याप्त सुविधाएं हैं। लेकिन सेंट्रलाइज्ड विलेज नहीं होने से लॉजिस्टिक्स और समन्वय मुश्किल हो सकता है। वेन्यू दूर होने से गेम्स देखना मुश्किल उषा ने गेम्स के वेन्यू के बीच दूरी को भी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि पहले के एशियन गेम्स, ओलिंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स में वेन्यू पास होते थे। उन्होंने कहा, “हमारे समय में सुविधाएं ज्यादा नहीं थीं, लेकिन वेन्यू बहुत पास होते थे। अगर एक वेन्यू से दूसरे जाना हो, तो आसानी होती थी।” मौजूदा गेम्स के बारे में उन्होंने कहा, “यहां अगर मुझे शूटिंग से क्रिकेट जाना हो, तो दूसरा रास्ता लेना पड़ेगा। इसलिए कई गेम्स देखने की इच्छा हो, तो मैं सिर्फ एक वेन्यू जा सकती हूं।” उन्होंने माना कि अलग-अलग जगहों पर आयोजन से वहां खेलों का इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो सकता है। हालांकि, इससे वेन्यू तक पहुंचना मुश्किल होता है। ‘विलेज कल्चर नहीं बदलेगा’ उषा ने कहा कि जापान में अपनाया गया यह मॉडल पारंपरिक एथलीट्स विलेज का विकल्प बनने की शुरुआत नहीं है। उन्होंने कहा- ‘मुझे नहीं लगता कि विलेज कल्चर बदलेगा, क्योंकि जब हम कमेटी में थे, तब किसी को भी यह विचार पसंद नहीं आया था।’
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Moneycontrol









