ऊंचे कर और ऊर्जा लागत के चलते कई वैश्विक कंपनियों ने पाकिस्तान छोड़ा: वित्त मंत्री
नई दिल्ली, 17 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने स्वीकार किया है कि ऊंचे करों और महंगी ऊर्जा लागत के कारण कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां देश छोड़कर चली गई हैं। उनके इस बयान से यह साफ हो गया है कि पाकिस्तान में वैश्विक कंपनियों के लिए कारोबार करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
इस्लामाबाद में पॉलिसी रिसर्च एंड एडवाइजरी काउंसिल (पीआरएसी) द्वारा आयोजित पाकिस्तान पॉलिसी डायलॉग को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि कुछ कंपनियां पाकिस्तान से जा रही हैं और “यह सच है।” पाकिस्तान ऑब्जर्वर की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “हमें यह स्वीकार करना होगा कि ऊंचा कर ढांचा, अधिक ऊर्जा लागत और महंगी फाइनेंसिंग वास्तविक समस्याएं रही हैं।” उन्होंने कंपनियों से अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव कर उन्हें ‘आधुनिक दुनिया’ के अनुरूप ढालने का आह्वान भी किया।
हाल के वर्षों में प्रॉक्टर एंड गैम्बल, एली लिली, शेल, माइक्रोसॉफ्ट, उबर और यामाहा जैसी बड़ी कंपनियों सहित दर्जनों विदेशी कंपनियों ने “अत्यधिक कराधान” के चलते अपने कार्यालय पाकिस्तान से खाड़ी देशों और अन्य गंतव्यों में स्थानांतरित कर लिए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊंचे कर और अवरोधक ऊर्जा शुल्क के मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि स्थानीय निवेशक भी लंबे समय से कारोबार की लागत कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग करते रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक वृद्धि “अपने आप नहीं आएगी” और निवेश आकर्षित करने तथा मजबूत औद्योगिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए ठोस और व्यावहारिक कदम उठाने होंगे।
इस बीच, टेलीनॉर ग्रुप ने भी पाकिस्तान से अपना कारोबार पूरी तरह समेट लिया है। कंपनी ने टेलीनॉर पाकिस्तान को पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन कंपनी लिमिटेड (पीटीसीएल) को बेचने की प्रक्रिया पूरी होने की घोषणा की है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कारोबार का माहौल लगातार कठिन होता जा रहा है।
कतर स्थित अल थानी ग्रुप पाकिस्तान से बाहर निकलने वाली विदेशी कंपनियों की सूची में ताजा नाम है। आर्थिक अनिश्चितता और राजनीतिक अस्थिरता के चलते कंपनी ने पाकिस्तान सरकार द्वारा बकाया भुगतान में देरी पर असंतोष जताया और भुगतान में चूक होने की स्थिति में परिचालन निलंबित करने की चेतावनी दी थी। यह जानकारी ब्रिटेन स्थित एशियन लाइट अखबार में प्रकाशित एक हालिया लेख में दी गई है।
--आईएएनएस
डीएससी
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Delhi News: फॉरेंसिक रिपोर्ट पर सियासत का आरोप, स्पीकर की भूमिका पर ‘आप’ ने उठाए सवाल
Delhi News: आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता पर फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. पार्टी का आरोप है कि रिपोर्ट को विशेषाधिकार समिति को भेजने के बजाय प्रेस वार्ता के जरिए सार्वजनिक कर उसका राजनीतिक उपयोग किया गया, जिससे विधानसभा की गरिमा प्रभावित हुई है.
प्रेस वार्ता में हुई ये चर्चा
शनिवार को आम आदमी पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि विधानसभा स्पीकर का दायित्व निष्पक्ष रहने का होता है, लेकिन इस पूरे मामले में उन्होंने पहले ही अपना मत सार्वजनिक कर दिया. ऐसे में अब रिपोर्ट को विशेषाधिकार समिति को भेजने का कोई औचित्य नहीं रह जाता. उन्होंने कहा कि जब फैसला पहले ही मीडिया के सामने रख दिया गया है, तो समिति में चर्चा केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी.
रिपोर्ट पूरी तरह मौन
अनुराग ढांडा ने कहा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में यह जरूर कहा गया है कि ऑडियो और वीडियो असली हैं, लेकिन रिपोर्ट में कहीं भी यह स्पष्ट नहीं किया गया कि संबंधित वक्तव्य में “गुरु” शब्द का इस्तेमाल हुआ या नहीं. इस अहम बिंदु पर रिपोर्ट पूरी तरह मौन है. उनका कहना है कि इससे आम आदमी पार्टी के उस शुरुआती रुख की पुष्टि होती है कि संबंधित वक्तव्य में “गुरु” शब्द का प्रयोग नहीं किया गया था.
दोनों रिपोर्ट्स का एक ही दिशा की ओर इशारा
मीडिया प्रभारी ने यह भी कहा कि जालंधर कोर्ट में पहले से दाखिल फॉरेंसिक रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर उल्लेख है कि उस बयान में “गुरु” शब्द नहीं है. दिल्ली में कराई गई जांच भी इस बिंदु पर कुछ नहीं कहती. ऐसे में दोनों रिपोर्टें एक ही दिशा की ओर इशारा करती हैं.
जालंधर कोर्ट में पेश हो रिपोर्ट
आम आदमी पार्टी ने मांग की कि यदि स्पीकर को विधानसभा की मर्यादा की सच में चिंता है, तो जिस फॉरेंसिक रिपोर्ट का हवाला दिया जा रहा है, उसे तुरंत सार्वजनिक किया जाए और जालंधर कोर्ट में पेश किया जाए. इससे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो सकेगी और सच्चाई सामने आएगी.
संवैधानिक अदालत के जरिए हो फैसला
पार्टी का कहना है कि किसी भी तरह का फैसला राजनीतिक मंच से नहीं बल्कि संवैधानिक अदालत के माध्यम से होना चाहिए. आम आदमी पार्टी ने दोहराया कि वह इस मुद्दे पर पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास रखती है और रिपोर्ट को सार्वजनिक करना इसी दिशा में जरूरी कदम है.
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