साउथ अफ्रीकी क्रिकेटर कोलिन इंग्राम ने संन्यास लिया:IPL में दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेले; टी-20 में ओवरऑल 9 हजार से ज्यादा रन बनाए
साउथ अफ्रीका के क्रिकेटर कोलिन इंग्राम ने प्रोफेशन क्रिकट से संन्यास ले लिया है। उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने मौजूदा काउंटी चैंपियनशिप सीजन में ग्लेमोर्गन के लिए आखिरी मैच खेला। इस सीजन में उन्होंने 12 मैचों में 628 रन बनाए। इंग्राम IPL में दिल्ली कैपिटिल्स के लिए 15 मैच खेल चुके हैं। उन्होंने ओवरऑल 378 टी-20 मैचों में 9,017 रन बनाए। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 138.50 रहा। इंग्राम अब कोचिंग शुरु करेंगे इंग्राम ने अपने पोस्ट में कहा- ‘20 साल से ज्यादा समय तक इस खेल का हिस्सा रहा।अब इसससे विदा होने का समय आ गया है। 41 मेरी जर्सी नंबर रही, जो मेरे लिए सपनों का प्रतीक है। अब 41 की उम्र में उस सपने को जीकर क्रिकेट से दूर हो रहा हूं।’ कोलिन ने अपने फ्यूचर प्लान पर बात करते हुए कहा- ‘अब मेरे करियर का अगला अध्याय बाउंड्री के बाहर शुरू होगा। मैं कोचिंग के जरिए क्रिकेट से जुड़ा रहूंगा।’ साउथ अफ्रीका के लिए 40 मैच खेले इंग्राम ने 2004-05 सीजन में घरेलू क्रिकेट में डेब्यू किया था। अक्टूबर 2010 में जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्हें साउथ अफ्रीका की टीम में जगह मिली। उन्होंने 2010 से 2013 के बीच टीम के लिए 31 वनडे और 9 टी-20 इंटरनेशनल खेले। वनडे में इंग्राम ने 31 मैचों में 843 रन बनाए। उनका औसत 32.42 रहा। वहीं 9 टी-20 इंटरनेशनल में उन्होंने 210 रन बनाए और स्ट्राइक रेट 129.62 रहा। IPL में दिल्ली के लिए 205 रन बनाए इंटरनेशनल क्रिकेट से अलग होने के बाद इंग्राम ने फ्रेंचाइजी टी-20 क्रिकेट में लंबा करियर बनाया। उन्होंने IPL में दिल्ली कैपिटल्स के लिए 15 मैच खेले। इस दौरान उन्होंने 113.89 की स्ट्राइक रेट से 205 रन बनाए। 47 रन उनका बेस्ट स्कोर रहा। इसके अलावा उन्होंने बिग बैश लीग, ILT20, कैरेबियन प्रीमियर लीग, द हंड्रेड, पाकिस्तान सुपर लीग और SA20 समेत कई लीग में हिस्सा लिया। -------------------------- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… एशियन गेम्स-2026 में भारत को पहला गोल्ड:भारतीय विमेंस क्रिकेट टीम ने लगातार दूसरी बार सोना जीता; श्रीलंका को 147 रन से हराया भारतीय विमेंस क्रिकेट टीम ने लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत लिया है। टीम ने मंगलवार को फाइनल में श्रीलंका को 147 रन से हराया। भारत ने 2022 हांगझोउ एशियन गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता था। पूरी खबर पढ़ें…
SC/ST Act में 2018 के संशोधन को फिर चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका, अग्रिम जमानत पर उठाया था सवाल
SC/ST एक्ट में वर्ष 2018 में किए गए संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि इस संशोधन को सुप्रीम कोर्ट वर्ष 2020 में ही बरकरार रख चुका है। ऐसे में कोर्ट ने मामले में दोबारा हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
याचिकाकर्ता ने मुख्य रूप से SC/ST एक्ट के तहत अग्रिम जमानत पर लगी रोक को चुनौती दी थी। उनकी ओर से पेश एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने इसे ‘रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन’ बताते हुए कानून के दुरुपयोग की आशंका जताई। उन्होंने एक्ट के तहत दर्ज मामलों में सजा की दर और पीड़ितों को दिए गए मुआवजे का मुद्दा भी कोर्ट के सामने रखा, लेकिन बेंच इन दलीलों के आधार पर मामले को दोबारा खोलने के लिए तैयार नहीं हुई।
आखिर 2018 में SC/ST एक्ट में क्या बदला था?
इस विवाद की शुरुआत मार्च 2018 में सुप्रीम कोर्ट के डॉ. सुभाष काशीनाथ महाजन बनाम महाराष्ट्र सरकार मामले में दिए गए फैसले से हुई थी। कोर्ट ने उस समय SC/ST एक्ट के तहत कुछ मामलों में FIR दर्ज करने से पहले शुरुआती जांच और आरोपी की गिरफ्तारी से पहले अनुमति की व्यवस्था की थी। जरूरत पड़ने पर अग्रिम जमानत की गुंजाइश भी रखी गई थी।
इसके बाद संसद ने उसी साल SC/ST एक्ट में संशोधन कर सेक्शन 18A जोड़ दिया। इसके जरिए FIR दर्ज करने से पहले शुरुआती जांच की जरूरत खत्म कर दी गई और गिरफ्तारी से पहले किसी अधिकारी की मंजूरी लेने की शर्त भी हटा दी गई। संशोधन के बाद एक्ट के तहत अग्रिम जमानत पर लगी रोक भी बहाल हो गई।
2020 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था मामला
संसद से हुए इस संशोधन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन फरवरी 2020 में कोर्ट ने इसे बरकरार रखा। कोर्ट ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया था कि अगर शिकायत को देखने पर पहली नजर में SC/ST एक्ट के तहत अपराध बनता ही नहीं है, तो ऐसे मामले में अदालत अग्रिम जमानत पर विचार कर सकती है।
इसी संशोधन को अब एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि अग्रिम जमानत पर रोक एक तरह का ‘रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन’ है और कानून के इन प्रावधानों के दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है। बेंच ने इस पर दोबारा विचार करने से इनकार करते हुए वर्ष 2020 के फैसले का हवाला दिया।
सजा की दर और मुआवजे पर भी उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने SC/ST एक्ट के तहत दर्ज मामलों में सजा की कम दर का भी जिक्र किया। राज्यसभा में दिए गए एक जवाब का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मुआवजे के तौर पर करीब 493 करोड़ रुपये बांटे गए हैं। याचिकाकर्ता ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दलील दी कि इससे FIR दर्ज कराने को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट इन दलीलों से 2018 के संशोधन को दोबारा जांचने के लिए तैयार नहीं हुआ और याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।
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