दतिया भाजपा के नए जिलाध्यक्ष बने माधवेंद्र सिंह परिहार, प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने की घोषणा
दतिया: मध्यप्रदेश के दतिया जिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नये जिला अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर दिया है। भाजपा ने माधवेंद्र सिंह परिहार को दतिया का नया जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उनकी नियुक्ति की घोषणा की है।
बता दें कि हाल ही में हुए विधानसभा उपचुनाव के बाद जिला कार्यकारिणी समेत संगठन की कई इकाइयों को भंग कर दिया गया था। इसके बाद से नए जिलाध्यक्ष और जिला संगठन की नई टीम के गठन का इंतजार किया जा रहा था। माधवेंद्र परिहार लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े हुए हैं और उन्होंने संगठन में रहते हुए अलग-अलग जिम्मेदारियां भी संभाली हैं। अब उन्हें दतिया भाजपा जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री @Hkhandelwal1964 जी ने भाजपा जिला अध्यक्ष की घोषणा की है, जो निम्न अनुसार है! pic.twitter.com/tpN31PUm7b
— BJP Madhya Pradesh (@BJP4MP) September 22, 2026
मंडल से बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने पर रहेगा फोकस
बता दें कि माधवेंद्र परिहार के नये जिलाध्यक्ष के रूप में नियुक्त होने के के साथ पार्टी के सामने जिले में संगठन को मजबूत करने और आगामी गतिविधियों के लिए नई टीम तैयार करने की जिम्मेदारी होगी। इसके अलावा, मंडल से लेकर बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना और कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाये रखना माधवेंद्र के लिये अग्निपरीक्षा साबित हो सकती है।
शरजील इमाम को 7 दिन की जमानत मिली:चचेरे भाई की शादी में शामिल होने मिली राहत, देशद्रोह और दिल्ली दंगों का है आरोपी
दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने दिल्ली दंगे के आरोपी शरजील इमाम को अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए 7 दिन की अंतरिम जमानत दे दी है। कोर्ट ने उसे चार अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक के लिए राहत दी है। इससे पहले इस साल मार्च में भी इमाम को अंतरिम जमानत दी गई थी। उस समय दिल्ली की एक अदालत ने उसे अपने भाई की शादी में शामिल होने और अपनी बीमार मां की देखभाल करने के लिए 10 दिन की अंतरिम जमानत दी थी। शरजील इमाम जनवरी 2020 से जेल में बंद है। उस पर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हुए धरना-प्रदर्शनों की आड़ में फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों की साजिश रचने का आरोप है। जुलाई में खारिज हो गई थी जमानत याचिका इससे पहले जुलाई में कड़कड़डूमा अदालत ने इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जमानत खारिज करते हुए अदालत ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के पहले से दिए आदेश के चलते वह जमानत अर्जियों पर न तो विचार कर सकती है और न ही कोई राहत दे सकती है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट की राय थी कि अभियोजन पक्ष ने जिन सुरक्षित गवाहों पर भरोसा किया है, उनकी गवाही पूरी होने या इस आदेश की तारीख से एक साल बीतने पर ही याचिकाकर्ता दोबारा जमानत याचिका दायर कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पांच जनवरी 2026 को यह आदेश दिया था। दिल्ली दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी शरजील इमाम को 28 जनवरी 2020 को बिहार के जहानाबाद जिले के काको गांव से दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस समय उसके खिलाफ देशद्रोह (IPC की धारा 124A) समेत अन्य धाराओं में मामले दर्ज किए गए थे। बाद में 2020 के दिल्ली दंगा मामले में भी उसके खिलाफ UAPA के तहत अलग मामला दर्ज किया गया था। पूर्वोत्तर दिल्ली हिंसा को लेकर 750 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए। इस हिंसा में करीब 53 लोग मारे गए और कई लोग घायल हुए थे। दंगों से जुड़े मामलों में अब तक 250 से ज्यादा चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं। इनमें 1,153 लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है ---------------- ये खबर भी पढ़ें... सुप्रीम कोर्ट बोला- उमर खालिद को बेल मिल सकती थी:दिल्ली दंगा मामले के अपने फैसले पर आपत्ति जताई सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगा साजिश मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को जमानत देने से इनकार करने वाले अपने पिछले फैसले पर आपत्ति जताई। कोर्ट ने सोमवार को यह बयान सैयद इफ्तिखार अंद्राबी से जुड़े नार्को-टेररिज्म मामले पर सुनवाई के दौरान दिया। पूरी खबर पढ़ें…
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