जमुई कांड के बीच गरमाई राजनीति, विपक्ष के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने दिया जवाब
बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा और उसके दोस्त के साथ हुई कथित छेड़छाड़ और मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद से बिहार की राजनीति गरमा गई है. घटना को लेकर विपक्षी नेता तेजस्वी यादव बिहार सरकार को घेर रही है. विपक्ष सवाल और कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रही है. मामले में केंद्रीय मंत्री और जदयू नेता ललन सिंह ने विपक्ष पर घटना का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है.
पुलिस ने SIT का किया गठन
पुलिस के अनुसार, घटना 19 सितंबर की शाम जमुई-लखीसराय सीमा के पास हुई. दोनों नाबालिग छात्र-छात्रा कोचिंग से घर लौट रहे थे. इस दौरान, कुछ युवकों ने उन्हें कथित रूप से रोक लिया और बदतमीजी की. वीडियो सामने आते ही पुलिस ने मामले में स्वत संज्ञान लिया और कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. वहीं, अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है. मामले में POCSO एक्ट और BNS की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है. पुलिस ने मामले की जांच के लिए महिला अधिकारी की लीडरशिप में SIT का गठन किया है.
तेजस्वी यादव ने सरकार पर साधा निशाना
घटना को लेकर तेजस्वी यादव ने सरकार पर निशाना साधा और बिहार में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर सवाल किए. उन्होंने कहा कि सरकार और पुलिस-प्रशासन को मामले को दबाने की बजाए दबाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.
जमुई कांड के वक्त जातीय सम्मेलन कर रहे सम्राट चौधरी ने रात में पुलिस अधिकारी को फ़ोन घुमाकर पूछा
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) September 22, 2026
CM: लड़की छेड़ने वाले ने किस रंग का गमछा लपेटा हुआ था?
पुलिस- सर…..भगवा! एकदम आप जैसा
CM:- फिर तो वह भगवा बलात्कारी ना हुआ। मतलब विचार से तो सात्विक और मोदी समर्थक ही होगा ना…
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने किया बचाव
तेजस्वी यादव और विपक्ष के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का बयान सामने आया. उन्होंने घटना को दुखद और गंभीर बताया. उन्होंने कहा कि विपक्ष को इस मुद्दे पर राजनीति करने से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि ‘उनको शायद पता नहीं है कि बिहार में कानून का राज है जिसे नीतीश कुमार जी ने 2006 में लागू किया था. पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि बिहार में ऐसी घटना करने वाले अपराधी बख्शे नहीं जाएंगे. विरोधी दल के नेता 2005 से पहले का बिहार याद कर लें, जब सूर्यास्त के बाद कोई बहू-बेटी घर से नहीं निकलती थी. पीड़ित परिवार के साथ हम सब खड़े हैं, सरकार खड़ी है. बिहार में सम्राट चौधरी जी की सरकार अपराधियों को उनकी जगह पहुंचाएगी.’
राज्य महिला आयोग ने भी लिया संज्ञान
मामले में अन्य राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. राज्य महिला आयोग ने घटना का संज्ञान लिया है और पीड़िता से मुलाकात करके मामले की जानकारी जुटाने की बात की है.
पूर्व विधायक रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा AAP में शामिल, भगवंत मान ने किया स्वागत; माझा में सियासी समीकरणों पर नजर
पंजाब की राजनीति में 22 सितंबर को एक अहम घटनाक्रम सामने आया है. खडूर साहिब से पूर्व विधायक और दिवंगत अकाली नेता रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा के बेटे रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा अपने समर्थकों के साथ आम आदमी पार्टी (AAP) में शामिल हो गए. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चंडीगढ़ में उन्हें और उनके साथ आए नेताओं का पार्टी में स्वागत किया.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पंजाब की राजनीति में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं. रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा को सितंबर के मध्य में शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने कथित पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया था.
भगवंत मान ने क्या कहा?
रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा और उनके समर्थकों का पार्टी में स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब और समाज के लिए अच्छी सोच रखने वाले लोगों का AAP में स्वागत है.
मान के मुताबिक, ब्रह्मपुरा के पार्टी में आने से माझा क्षेत्र के साथ-साथ पंजाब में AAP को मजबूती मिलेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता और कार्यकर्ता मिलकर पंजाब के विकास तथा ‘रंगला पंजाब’ के लक्ष्य के लिए काम करेंगे.
मुख्यमंत्री ने नए शामिल हुए नेताओं से पार्टी की नीतियों और सरकार के काम को लोगों तक पहुंचाने की भी अपेक्षा जताई.
कौन-कौन से नेता AAP में आए?
रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा के साथ कई स्थानीय नेता और समर्थक भी AAP में शामिल हुए. इनमें कंवरदीप सिंह ब्रह्मपुरा, अमरीक सिंह सरपंच, हरजिंदर सिंह बादशाह, बलबीर सिंह बल्ली, जतिंदर सिंह कैरों, फतेह, परमिंदर सिंह कैरों, गुरभेज सिंह कैरों, लवप्रीत सिंह कैरों, बलजिंदर सिंह गोहलवार, गौरवदीप सिंह खैरा, जगमीत हुंदल और गुरप्रीत सिंह के नाम शामिल हैं.
इन नेताओं के शामिल होने से पार्टी का माझा क्षेत्र में स्थानीय संगठन और राजनीतिक नेटवर्क बढ़ने की संभावना है. हालांकि इसका चुनावी असर कितना होगा, यह आने वाले समय में सामने आएगा.
कुछ दिन पहले SAD ने किया था निष्कासन
रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा का AAP में शामिल होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ ही दिन पहले वह शिरोमणि अकाली दल में थे. 15 सितंबर को SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया था.
SAD की ओर से उनके खिलाफ पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप लगाए गए थे. पार्टी ने कहा था कि खडूर साहिब विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की ओर से उनके खिलाफ लिखित शिकायतें मिली थीं.
ब्रह्मपुरा ने निष्कासन के बाद क्या कहा था?
पार्टी से निष्कासन के बाद रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया था. उन्होंने कहा था कि वह खडूर साहिब क्षेत्र में नशे और गैंगस्टरवाद के खिलाफ आवाज उठा रहे थे.
इससे पहले अप्रैल 2026 में भी ब्रह्मपुरा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर खडूर साहिब क्षेत्र में नशे और गैंगस्टरवाद के मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की थी.
माझा की राजनीति में क्या है महत्व?
माझा पंजाब का एक प्रमुख क्षेत्र है, जिसमें अमृतसर, गुरदासपुर, पठानकोट और तरनतारन जैसे इलाके आते हैं. इस क्षेत्र में अलग-अलग राजनीतिक दलों का अपना संगठनात्मक और सामाजिक आधार रहा है.
रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा का राजनीतिक परिवार से संबंध भी इस घटनाक्रम को अहम बनाता है. उनके पिता रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेताओं में रहे हैं और खडूर साहिब क्षेत्र की राजनीति में उनकी पहचान रही है. ऐसे में ब्रह्मपुरा का AAP में जाना स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बना है.
पार्टी ने विकास को बताया मुख्य एजेंडा
AAP में शामिल होने के बाद नए नेताओं की ओर से पार्टी की नीतियों को लोगों तक पहुंचाने और पंजाब के विकास के लिए काम करने की बात कही गई है.
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी अपने संदेश में विकास और ‘रंगला पंजाब’ की परिकल्पना को प्रमुखता दी. ऐसे में पार्टी के लिए इस नए राजनीतिक जुड़ाव को संगठन विस्तार और आगामी राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में देखा जा रहा है.
रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा के AAP में शामिल होने के बाद अब माझा क्षेत्र में पार्टी की स्थानीय राजनीति पर नजर रहेगी. खास तौर पर खडूर साहिब क्षेत्र में इसका संगठनात्मक असर किस तरह दिखाई देता है, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा.
फिलहाल इतना तय है कि ब्रह्मपुरा का दल बदल पंजाब की मौजूदा राजनीतिक हलचल में एक नया घटनाक्रम है. एक तरफ उन्होंने SAD से अलग होकर AAP का दामन थामा है, वहीं AAP नेतृत्व ने इसे पार्टी के विस्तार और पंजाब के विकास के लिए नए नेताओं के जुड़ने के रूप में पेश किया है.
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