Fortis Audit केस पहुंचा Supreme Court, InGovern ने लिस्टेड कंपनियों के लिए चेताया
प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म InGovern ने चेतावनी दी है कि अगर फोर्टिस हेल्थकेयर के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का फोरेंसिक-ऑडिट का आदेश कायम रहता है, तो भारत की कोई भी लिस्टेड कंपनी अपने प्रमोटरों के पर्सनल कर्ज से जुड़ी कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकती है। यह चिंता अब और भी अहम हो गई है क्योंकि फोर्टिस ने खुद इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 31 अगस्त, 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने फोर्टिस के पूर्व प्रमोटरों, मलविंदर मोहन सिंह और शिवविंदर मोहन सिंह के खिलाफ दाइची सैंक्यो (Daiichi Sankyo) के आर्बिट्रल अवॉर्ड से जुड़ी कार्रवाई के तहत एक फोरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया। यह ऑडिट मई 2016 की गतिविधियों से जुड़ा है और इसमें पूर्व प्रमोटरों की फोर्टिस में हिस्सेदारी से जुड़े गिरवी रखने, ट्रांसफर, बिक्री और उससे मिली रकम के इस्तेमाल की जांच शामिल है। खास तौर पर, इसमें 2018 में हुए कंट्रोल बदलने वाले ट्रांज़ैक्शन को भी शामिल किया गया है, जिसके तहत IHH हेल्थकेयर ने नॉर्दर्न TK वेंचर के ज़रिए फोर्टिस का अधिग्रहण किया था।
इसे भी पढ़ें: Calcutta High Court का आदेश: जमानत मिलने पर नंदीग्राम से चुनाव लड़ सकेंगे Congress प्रत्याशी
उस ट्रांज़ैक्शन को बोर्ड और शेयरहोल्डर्स की मंज़ूरी, CCI की मंज़ूरी और SEBI से मंज़ूर ओपन ऑफ़र मिल चुका था। फोर्टिस ने ज़ोर देकर कहा है, और कोर्ट ने भी माना है कि ऑडिट असल में तथ्यों का पता लगाने की एक प्रक्रिया है और इससे कंपनी या उसके अधिकारियों पर अपने-आप कोई ज़िम्मेदारी नहीं आती। ऑर्डर पर एक नोट में, InGovern ने तर्क दिया कि इसके पीछे की सोच से बड़े पैमाने पर कॉर्पोरेट इंडिया के लिए जोखिम पैदा हो सकता है। फर्म ने कहा, "अगर इस तर्क को सही माना जाता है, तो भारत की किसी भी लिस्टेड कंपनी को उसके मालिकों की निजी ज़िम्मेदारियों से जुड़ी कानूनी कार्रवाई में घसीटा जा सकता है।" फर्म ने आगे कहा कि बोर्ड के सदस्यों और कंप्लायंस अधिकारियों से असल में यह उम्मीद की जा सकती है कि वे "प्रमोटर-शेयरहोल्डर्स के निजी वादों और ज़िम्मेदारियों पर नज़र रखें और उन्हें लागू करवाएं - एक ऐसी ज़िम्मेदारी जो भारत का कोई भी मौजूदा कानून या नियम उन पर नहीं डालता है। InGovern ने कहा कि कॉर्पोरेट इंडिया लंबे समय से इस बात पर काम कर रहा है कि कंपनी अपने प्रमोटरों के निजी मामलों की गारंटर नहीं होती है, और चेतावनी दी कि यह ऑर्डर "उस समझ को रातों-रात बदलने का खतरा पैदा करता है।
North East Delhi riots 2020 case: शरजील इमाम को बड़ी राहत, इस वजह से 7 दिन रहेंगे जेल से बाहर, मिली अंतरिम जमानत
दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने मंगलवार को शरजील इमाम को 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक अपने चचेरे भाइयों की शादी में शामिल होने के लिए अंतरिम ज़मानत दे दी। उन्होंने नई दिल्ली और बिहार में अपने दो चचेरे भाइयों की शादी के कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए अंतरिम ज़मानत मांगी थी। एडिशनल सेशंस जज (ASJ) समीर बाजपेयी ने शरजील इमाम को 7 दिन की अंतरिम ज़मानत दी, जिसके लिए 50,000 रुपये का ज़मानत बॉन्ड और उतनी ही राशि की एक ज़मानत (श्योरिटी) देनी होगी।
इसे भी पढ़ें: सुरक्षा आदेश के बाद भी फेंके गए अंडे, Mahua Moitra ने Nadia घटना पर Calcutta High Court में लगाई याचिका
कोर्ट ने कहा कि अंतरिम ज़मानत के लिए यह उनकी दूसरी अर्ज़ी है और यह उनके सगे चचेरे भाइयों की शादी में शामिल होने के लिए है; इसलिए उन्हें ज़मानत दी गई है। कोर्ट ने शरजील इमाम को 10 अक्टूबर की शाम को जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कुछ शर्तें भी लगाई हैं, जैसे कि शरजील मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति या गवाह से संपर्क नहीं करेंगे; वह सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करेंगे और अपने परिवार के सदस्यों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति से नहीं मिलेंगे। शरजील इमाम ने वकील अहमद इब्राहिम और आयशा ज़ैदी के ज़रिए एक अर्ज़ी दाखिल की थी। इसमें उन्होंने दानिश इमाम और फहाद इमाम की शादी में शामिल होने के लिए 30 सितंबर से 13 अक्टूबर तक दो हफ़्ते की अंतरिम ज़मानत मांगी थी। बताया गया कि शादियां 4 अक्टूबर को दिल्ली में और 7 अक्टूबर को सासाराम, बिहार में होनी हैं। दिल्ली पुलिस ने शादियों की बात की पुष्टि करते हुए जवाब दाखिल किया। हालांकि, स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (SPP) अनिरुद्ध मिश्रा ने इस अर्ज़ी का विरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं और कोर्ट ने कई बार उसकी रेगुलर ज़मानत की अर्ज़ी खारिज की है। SPP ने कहा कि न तो उसकी मौजूदगी की ज़रूरत है और न ही आरोपी से किसी आर्थिक मदद की। आरोपी के कई चचेरे भाई-बहन हैं; अगर उसे शादी के आधार पर ज़मानत दी जाती है, तो वह बार-बार ऐसी ही मांग करता रहेगा।
इसे भी पढ़ें: Calcutta High Court का आदेश: जमानत मिलने पर नंदीग्राम से चुनाव लड़ सकेंगे Congress प्रत्याशी
शरजील इमाम 2020 के दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश के मामले में आरोपी हैं। उन पर UAPA के तहत चार्जशीट दाखिल की गई है। उनकी रेगुलर ज़मानत की अर्ज़ी दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, उमर खालिद और शरजील इमाम पर फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी कथित बड़ी साज़िश के सिलसिले में UAPA के तहत आरोप लगाए गए हैं। इन दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi









