Ram Mandir चढ़ावा चोरी केस: Akhilesh Yadav बोले- BJP के खिलाफ धर्म बचाने की जंग होगा चुनाव
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को कहा कि अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके संगी-साथियों की संलिप्तता अब जगजाहिर हो चुकी है और अगला चुनाव भाजपा के खिलाफ धर्म को बचाने की किसी जंग से कम नहीं होगा। यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की पहली सतही जांच में ही आँकडा 70 से 50 प्रतिशत आगे बढ़कर 105 प्रतिशत हो गया है।
ये बेहद निंदनीय है कि सरकारी देखरेख में ‘धर्म धन की चोरी’ का इतना अधर्मी कुकृत्य किया गया है। उन्होंने इसी पोस्ट में आगे कहा, भाजपाई और उनके संगी-साथियों की संलिप्तता पूरे अयोध्या में चर्चा का विषय है। जनता का भाजपा पर अब रत्ती भर भी विश्वास नहीं रह गया है। अयोध्या ही नहीं पूरे उत्तर प्रदेश, देश व दुनिया में भाजपा की थू-थू हो रही है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, संपूर्ण विश्व के सनातनियों को इस बात से गहरा आघात पहुंचा है कि उन्होंने जो दान-पुण्य का पैसा धर्म के विकास के लिए दिया था उस धन को भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों ने चुराकर अपना-अपना खजाना भर लिया है। उन्होंने कहा कि यह अपराध भी है और पाप भी, इसीलिए सबने संकल्प लिया है कि अब भाजपा को सदैव के लिए हराना और हटाना है।
यादव ने कहा, भाजपा के खिलाफ अगला चुनाव धर्म को बचाने की किसी जंग से कम नहीं होगा, इसीलिए धर्म-प्रधान लोग कह रहे हैं कि अब भाजपा के विरुध्द होगा धर्म युद्ध! राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी का मामला जून के पहले सप्ताह में सामने आया था, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने आरोपों की जांच के लिए 13 जून को एक विशेष अन्वेषण दल (एसआईटी) का गठन किया था।
23 जून को मिली उसकी प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को एक प्राथमिकी दर्ज करके आठ आरोपियों अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ टीनू यादव को गिरफ्तार किया गया था।
1980 Voter List विवाद: Sonia Gandhi पर BJP का वार, Pradeep Bhandari बोले- लोकतंत्र की चोरी हुई
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक प्रदीप भंडारी ने मंगलवार को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी अक्सर दूसरों पर वोट चोरी का आरोप लगाती हैं, जबकि खुद लोकतंत्र की चोरी में शामिल रही हैं। भंडारी की यह टिप्पणी राउज़ एवेन्यू में MP/MLA मामलों की विशेष अदालत के उस फैसले के बाद आई है, जिसमें मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द कर दिया गया था, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया गया था।
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एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, भंडारी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत में वोट देने के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए नागरिकता एक बुनियादी ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान कहता है कि वोट देने के लिए व्यक्ति का भारत का नागरिक होना ज़रूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि गांधी को 1980 में वोट देने की इजाज़त कैसे मिली, जबकि कहा जाता है कि उस समय वह भारत की नागरिक नहीं थीं। उन्होंने पूछा कि 1980 में अदालत में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें पूछा गया था कि सोनिया गांधी को किस आधार पर वोट देने की इजाज़त दी गई, जबकि वह भारत की नागरिक नहीं थीं। क्या उन्होंने दस्तावेज़ों में हेराफेरी करने की कोशिश की थी?
कोर्ट के आदेश का ज़िक्र करते हुए भंडारी ने कहा कि इससे जांच की ज़रूरत का पता चलता है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने पाया कि मजिस्ट्रेट कोर्ट संज्ञेय अपराध (cognisable offence) की पहचान करने का अपना मुख्य काम करने में नाकाम रहा। उन्होंने कहा कि कल दिल्ली की एक कोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट को यह जांचने का आदेश दिया कि क्या कोई संज्ञेय अपराध हुआ था। जो लोग 'वोट चोरी' की बात कर रहे हैं, वे असल में लोकतंत्र की चोरी कर रहे हैं। अगर आप कोर्ट की टिप्पणी देखें, तो उसमें कहा गया है कि जिस मजिस्ट्रेट कोर्ट ने केस खारिज किया, उसने मामले पर ठीक से विचार नहीं किया और संज्ञेय अपराध का पता लगाने का अपना मुख्य काम नहीं किया। कोर्ट का भी मानना है कि इसकी जांच होनी चाहिए।
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इससे पहले सोमवार को स्पेशल कोर्ट ने शिकायत खारिज किए जाने की आलोचना की थी। कोर्ट ने कहा कि यह फ़ैसला सिर्फ़ बिना पुष्टि वाली फ़ोटोकॉपी पर आधारित था और इसे "बिना पुष्टि वाले रिकॉर्ड की फ़ोटोकॉपी के आधार पर किया गया बेबुनियाद दावा" बताया। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि वोटर लिस्ट सिर्फ़ भारतीय नागरिकों के लिए होती है। कोर्ट ने उन आरोपों का भी ज़िक्र किया जिनके मुताबिक, अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिकता मिलने से पहले ही, 1980 में वोटर लिस्ट में सफ़दरजंग रोड, नई दिल्ली के पते पर गांधी का नाम शामिल था। कोर्ट ने बताया कि कथित तौर पर उनका नाम 1980 में लिस्ट में जोड़ा गया, 1982 में हटा दिया गया और 1983 में फिर से जोड़ दिया गया।
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