Bluetooth Earphones Cancer Risk: क्या ब्लूटूथ से हो सकता है कैंसर का खतरा? एक्सपर्ट से जानें इसके पीछे का कारण
Bluetooth Earphones Cancer Risk: आज के दौर में बिना ब्लूटूथ के लोगों का गुजारा नहीं हो पाता है फिर चाहे वो ऑफिस कॉल हो या फिर म्यूजिक सुनना हो, घंटों कान में लगे रहने वाले ब्लूटूथ को लेकर लोगों के मन में एक सवाल उठता रहता है कि क्या ब्लूटूथ से कैंसर का खतरा हो सकता है या नहीं? इंटरनेट पर वायरल दावों में तो यहां तक कहा जा रहा है कि इन्हें पहनना सिर के पास माइक्रोवेव रखने जैसा है. चलिए एक्सपर्ट से जानते हैं इसके पीछे की सच्चाई के बारे में.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक एक्सपर्ट ने वीडियो के जरिए वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर स्थिति के बारे में बताया कि जिसमें एयरपॉड्स पहनने को माइक्रोवेव के संपर्क में आने जैसा बताया गया था. डॉ के अनुसार, यह तुलना पूरी तरह गलत है. उन्होंने बताया कि वायरलेस ईयरफोन से निकलने वाले रेडिएशन नॉन-आयोनाइजिंग होता है जो डीएनए को नुकसान नहीं पहुंचाता है. यही वजह है कि इसे कैंसर से सीधे तौर पर जोड़ने के सबूत अब तक नहीं मिले हैं.
क्या ब्लूटूथ से हो सकता है कैंसर का खतरा?
एक्सपर्ट का कहना है कि ब्लूटूथ ईयरफोन से निकलने वाला रेडिएशन मोबाइल फोन की तुलना में बेहद कम होता है. आंकड़ों के मुताबिक, एयरपॉड्स जैसे डिवाइस से मिलने वाला रेडिएशन मोबाइल फोन से करीब 10 से 400 गुना तक कम हो सकता है. ऐसे में अगर मोबाइल फोन के इस्तेमाल से कैंसर का कोई सबूत नहीं मिला है.
इन चीजों का दिया गया उदाहरण
अक्सर कैंसर से जुड़े दावों को लेकर रिसर्च किया जाता है जिसमें चूहों को लंबे समय तक रेडियोफ्रीक्वेंसी रेडिएशन के संपर्क में रखा जाता है. इसमें नर चहों में कुछ खास तरह के कैंसर के मामलों में हल्की बढ़ोतरी देखी थी जबकि मादा चूहों में ऐसा कोई स्पष्ट असर नहीं दिखा. एक्सपर्ट के मुताबिक, मौजूदा साइंटफिक प्रमाणों के आधार पर यह कहना गलत होगा कि वायरलेस ईयरफोन कैंसर का कारण बनते हैं.
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किशोरावस्था में व्यायाम से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम: नई स्टडी में खुलासा
नई दिल्ली, 17 जनवरी (आईएएनएस)। एक नए अध्ययन से पता चला है कि किशोरावस्था में नियमित शारीरिक गतिविधि (फिजिकल एक्टिविटी) ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम कर सकती है, क्योंकि यह ब्रेस्ट टिश्यू की संरचना और तनाव से जुड़े बायोमार्कर्स को प्रभावित करती है।
यह अध्ययन कोलंबिया यूनिवर्सिटी मेलमैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और हर्बर्ट इर्विंग कॉम्प्रिहेंसिव कैंसर सेंटर के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया, जो जनवरी 2026 में प्रकाशित हुआ।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी की ताजा स्टडी ब्रेस्ट कैंसर रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हुई है। इसमें किशोरियों (उम्र 14-19) पर आरपीए (रीक्रिएशनल फिजिकल एक्टिविटी) और ब्रेस्ट टिश्यू कंपोजिशन (बीटीसी), ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (15-एफ2टी-आइसोप्रोस्टेन) और इंफ्लेमेशन बायोमार्कर्स का अध्ययन किया गया।
सप्ताह में 2 घंटे या अधिक आरपीए करने वाली लड़कियों में ब्रेस्ट में पानी की मात्रा कम और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम पाया गया।
अध्ययन से इस बात पर नई रोशनी पड़ती है कि किशोरावस्था के दौरान शारीरिक गतिविधि—जो ब्रेस्ट डेवलपमेंट का एक अहम समय होता है—भविष्य में ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से जुड़े बायोलॉजिकल तरीकों को कैसे प्रभावित कर सकती है।
शोधकर्ता रेबेका केहम ने कहा कि यह स्टडी आरपीए को ब्रेस्ट कैंसर रिस्क के जैविक पाथवे से जोड़ती है, जो भविष्य में जोखिम कम करने के लिए नीतियां बनाने में मदद करेगी।
केहम ने आगे कहा, हमारे नतीजों से पता चलता है कि मनोरंजक रीक्रिएशनल फिजिकल एक्टिविटी का संबंध किशोर लड़कियों में ब्रेस्ट टिश्यू की बनावट और स्ट्रेस बायोमार्कर में बदलाव से है, जो बॉडी फैट से अलग है, जिसका ब्रेस्ट कैंसर पर असर हो सकता है।
यह स्टडी वयस्क महिलाओं पर पहले की गई रिसर्च से मेल खाती है, जिसमें दिखाया गया है कि ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी का संबंध कम मैमोग्राफिक ब्रेस्ट डेंसिटी से है, जो ब्रेस्ट कैंसर के खतरे का एक मुख्य संकेत है।
किशोरावस्था के दौरान, प्रतिभागियों ने बीते एक हफ्ते में की गई शारीरिक गतिविधियों पर बात की, जिसमें संगठित और असंगठित दोनों तरह की गतिविधियां शामिल थीं। इन्होंने क्लिनिक विजिट पूरी कीं, जिसमें खून और यूरिन के सैंपल लेने के साथ-साथ ब्रेस्ट टिश्यू का असेसमेंट भी शामिल था।
इस स्टडी में लड़कियों की औसत उम्र 16 साल थी। आधे से अधिक (51 प्रतिशत) ने बीते हफ्ते कोई मनोरंजक शारीरिक गतिविधि न करने की बात कही। तिहत्तर प्रतिशत ने संगठित गतिविधियों में कोई हिस्सा नहीं लिया, और 66 प्रतिशत ने असंगठित गतिविधियों में कोई हिस्सा नहीं लिया।
सुसान जी. कोमेन फाउंडेशन के अनुसार, बचपन और किशोरावस्था में सक्रिय महिलाओं में बाद में जोखिम कम होता है।
यह खोज स्वास्थ्य नीतियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दिखाती है कि स्कूलों में खेल-कूद को बढ़ावा देकर ब्रेस्ट कैंसर को रोका जा सकता है।
--आईएएनएस
केआर/
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