विश्व गुरु का युग शुरू: UNSC में भारत का विरोध करने वाला चीन क्यों बदल गया? V4 ने भी दिया साथ
यूएन जनरल असेंबली के दौरान भारत के साथ हुई पहली विदेश मंत्रियों की बैठक में विसेग्राड ग्रुप (V4) के चार सदस्यों ने UN सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का ज़ोरदार समर्थन किया। स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने कहा कि पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य, UNSC की सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन करने में एकजुट हैं। पहली विसेग्राड ग्रुप (V4) + भारत के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद, स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने कहा कि हम सभी V4 देश इस बात से सहमत हैं कि 'ग्लोबल साउथ' का हिस्सा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उभरती हुई महाशक्ति होने के नाते, भारत को UN सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के तौर पर वहां शामिल होना चाहिए।
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भारत की UNSC सदस्यता पर चीन का क्या कहना है?
इससे पहले, नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स समिट 2026 के दौरान चीन ने UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए हरी झंडी दे दी थी। हालांकि, यह देखना अभी बाकी है कि क्या चीन UN संस्था में भारत की स्थायी सदस्यता के प्रस्ताव पर औपचारिक रूप से अपनी सहमति देगा या नहीं।
भले ही अमेरिका, फ्रांस, रूस और यूनाइटेड किंगडम ने पहले भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया हो, लेकिन ब्रिक्स समिट 2026 तक चीन इसका विरोध कर रहा था। गौरतलब है कि UNSC में 15 सदस्य होते हैं, जिनमें पांच स्थायी सदस्य (अमेरिका, चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम) और दो साल के कार्यकाल के लिए चुने गए 10 अस्थायी सदस्य शामिल हैं। P5 (पांच स्थायी सदस्यों) के पास वीटो पावर होती है। इन घटनाक्रमों के बीच, भारत का तर्क है कि 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनाया गया UNSC का ढांचा आज की भू-राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को नहीं दर्शाता है। इसके अलावा, भारत स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार चाहता है, जिसमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व मिले। यह ध्यान देने वाली बात है कि पिछले आठ दशकों में, भारत आठ बार UNSC का अस्थायी सदस्य रहा है: 1950–51, 1967–68, 1972–73, 1977–78, 1984–85, 1991–92, 2011–12 और हाल ही में 2021–22 में।
कौन से देश UNSC में भारत की दावेदारी का समर्थन करते हैं?
UNSC की स्थायी सदस्यता के लिए, भारत को पहले ही कई बड़े देशों का समर्थन मिल चुका है, जिनमें P5 के पांच में से चार सदस्य शामिल हैं। फ्रांस, UK, US और रूस ने स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन किया है और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि रूस लंबे समय से इसका समर्थक रहा है। और अब, हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य ने भी न्यूयॉर्क में 81वीं UN महासभा के दौरान पहली भारत-V4 बैठक में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है। इसके अलावा, भारत ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ G4 समूह का भी हिस्सा है। ये चारों देश एक-दूसरे की दावेदारी का समर्थन करते हैं और दोनों श्रेणियों में परिषद के विस्तार की वकालत करते हैं। अफ्रीकी संघ ने भी अलग से स्थायी प्रतिनिधित्व की मांग की है, जिसमें अफ्रीका के लिए कम से कम दो स्थायी सीटें शामिल हैं।
भारत के लिए चीन का रुख़ क्यों अहम है?
चीन भारत की मुहिम में एक अहम सदस्य है। हाल ही में हुए ब्रिक्स (BRICS) समिट में फ्रांस, रूस, यूके और अमेरिका की तरह ही चीन ने भी पहली बार भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया। हालाँकि, उसने वीटो पावर के साथ भारत को नया स्थायी सदस्य बनाने का साफ़ तौर पर समर्थन नहीं किया। चीन मौजूदा P5 सदस्यों में से एक है और चार्टर में बदलाव की प्रक्रिया में उसकी भूमिका है।
क्या भारत को सभी P5 सदस्यों की सहमति की ज़रूरत है?
ज़रूरी नहीं, भारत को अपनी उम्मीदवारी के लिए पाँचों स्थायी सदस्यों के वोट की ज़रूरत है। स्थायी सदस्यता का दायरा बढ़ाने के लिए UN चार्टर में बदलाव की ज़रूरत होती है। आर्टिकल 108 के तहत, चार्टर में बदलाव को सबसे पहले UN जनरल असेंबली में दो-तिहाई बहुमत से मंज़ूरी मिलनी चाहिए। इसके बाद, इसे UN के सदस्य देशों में से दो-तिहाई देशों से मंज़ूरी (रैटिफिकेशन) मिलनी चाहिए, जिसमें सभी पाँचों स्थायी सदस्य शामिल हों। इसलिए, भले ही ज़्यादातर सदस्य भारत को स्थायी श्रेणी में शामिल करने का समर्थन करें, लेकिन जब तक अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और यूके सभी इस बदलाव को मंज़ूरी नहीं देते, तब तक यह सुधार लागू नहीं हो सकता।
Asian Games Women T20: भारत ने Sri Lanka को 147 रन से हराकर जीता Gold Medal
स्मृति मंधाना और ऋचा घोष की तूफानी पारियों के बाद स्पिनरों के फिरकी के जादू से गत चैंपियन भारत ने एशियाई खेलों की महिला टी20 क्रिकेट प्रतियोगिता के फाइनल में मंगलवार को यहां श्रीलंका को 147 रन से रौंदकर स्वर्ण पदक जीता जो मौजूदा खेलों में देश का सोने का पहला तमगा है। भारत के 217 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंका की टीम दीप्ति शर्मा (छह रन पर तीन विकेट), शेफाली वर्मा (तीन रन पर दो विकेट), श्रेयंका पाटिल (नौ रन पर दो विकेट) और श्री चरणी (13 रन पर दो विकेट) की बलखाती गेंदों के सामने 15.4 ओवर में सिर्फ 69 रन पर ढेर हो गई।
श्रीलंका की ओर से कप्तान चामरी अटापट्टू ने सर्वाधिक 29 रन बनाए जबकि उनके अलावा सिर्फ कौशिनी नुथ्यांगना (14) और कविशा दिलहारी (11) ही दोहरे अंक में पहुंच सकी। भारत ने इसी महीने श्रीलंका को ही हराकर एशिया कप का खिताब भी जीता था। भारत ने इससे पहले स्मृति (45 गेंद में 79 रन, सात छक्के, पांच चौके) के अर्धशतक और शेफाली (48 रन, 29 गेंद, तीन छक्के, तीन चौके) के साथ उनकी पहले विकेट की 99 रन की तेजतर्रार साझेदारी की बदौलत तीन विकेट पर 216 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। ऋचा घोष (22 गेंद में नाबाद 49 रन, छह चौके, तीन छक्के) ने डेथ ओवरों में तूफानी बल्लेबाजी करते हुए भारत का स्कोर 200 रन के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
श्रीलंका को रजत पदक मिला जबकि पाकिस्तान ने बांग्लादेश को 31 रन से हराकर कांस्य पदक जीता। लक्ष्य का पीछा करने उतरे श्रीलंका की शुरुआत बेहद खराब रही और टीम कभी लक्ष्य के करीब पहुंचने की स्थिति में भी नहीं दिखी। श्रीलंका ने पावर प्ले में दो विकेट खोकर 41 रन बनाए। क्रांति गौड़ के पहले ही ओवर में श्रेयंका पाटिल ने इमेशा दुलानी का आसान कैच टपकाया। कप्तान चामरी अटापट्टू ने नंदनी शर्मा पर दो चौके जड़े लेकिन शेफाली ने तीसरे ओवर में इमेशा (03) को ऋचा के हाथों स्टंप करा दिया। चामरी ने क्रांति पर भी दो चौके मारे लेकिन शेफाली ने हसिनी परेरा (00) को पवेलियन भेजकर श्रीलंका को दूसरा झटका दिया।
चामरी भी इसके बाद रन गति बढ़ाने के दबाव में दीप्ति शर्मा की गेंद को हवा में खेलकर भारती फुलमाली को आसान कैच दे बैठीं। श्रेयंका ने हर्षिता समरविक्रम (00) को अपनी ही गेंद पर लपका जबकि श्री चरणी ने हंसिमा करुणारत्ने (01) को भारती के हाथों कैच कराके नौवें ओवर में श्रीलंका का स्कोर पांच विकेट पर 49 रन कर दिया। दीप्ति ने कविशा दिलहारी (11) को अपनी ही गेंद पर लपका जबकि श्री चरणी ने काव्या काविंदी (02) को ऋषा के हाथों कैच कराके श्रीलंका को सातवां झटका दिया। श्रेयंका ने कौशिनी को बोल्ड करके मौजूदा खेलों में भारत के स्वर्ण पदक का खाता खोला।
इससे पहले गत चैम्पियन भारत ने टॉस जीतने के बाद पावरप्ले का पूरा फायदा उठाया। स्मृति और शेफाली ने छह ओवर में टीम का स्कोर बिना विकेट खोए 59 रन तक पहुंचाया। एशिया कप से ही शानदार फॉर्म में चल रहीं दोनों सलामी बल्लेबाजों ने 60 गेंद में 99 रन की साझेदारी करके फाइनल में टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। भारत को रोकने के लिए कुछ विशेष करने की जरूरत थी लेकिन श्रीलंकाई टीम की गेंदबाजी में साधारण नजर आई और उसने भारतीय सलामी बल्लेबाजों को अपनी शर्तों पर खेलने दिया।
भारत ने अंततः एशियाई खेलों के इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर खड़ा किया। शेफाली और स्मृति दोनों ने स्पिनरों की जमकर धुनाई की। स्मृति ने तीसरे ओवर में बाएं हाथ की स्पिनर सुगंधिका कुमारी की लगातार गेंदों पर दो छक्के जड़े। इनमें से पहला बैकफुट से सीधे मैदान के ऊपर से लगाया गया जबकि अगली गेंद पर उन्होंने स्लॉग स्वीप खेलकर गेंद को दर्शकों के बीच पहुंचाया। इसके बाद तेज गेंदबाज मिताली अयोध्या का ओवर और भी महंगा साबित हुआ। स्मृति ने एक्स्ट्रा कवर के ऊपर से शानदार छक्का जड़कर पारी का अपना तीसरा छक्का लगाया। श्रीलंका की कप्तान चामरी अटापट्टू स्वयं पांचवां ओवर करने आईं और 19 रन लुटा बैठीं जिसमें तीन छक्के शामिल थे।
इनमें से दो शेफाली के बल्ले से आए। उन्होंने पहले शॉर्ट गेंद को पुल करके सीमा के पार भेजा और अगली गेंद को मिडऑफ के ऊपर से छह रन के लिए भेजा। तीन गेंद बाद स्मृति ने श्रीलंकाई कप्तान तथा ऑफ स्पिनर की गेंद पर सीधा छक्का जड़ा। स्मृति ने कुल सात छक्के लगाए। एक और अर्धशतक के करीब पहुंच चुकी शेफाली ने बाएं हाथ की स्पिनर चामुडी प्रबोदा की गेंद पर रिवर्स स्वीप खेलने की कोशिश की लेकिन शॉट का सही संपर्क नहीं हुआ और वह कैच आउट हो गईं।
भारत के लिए नंबर तीन का स्थान कुछ समय से परेशानी का सबब रहा है। इस मुकाबले में कप्तान हरमनप्रीत कौर (17 गेंद में 19 रन) तीसरे नंबर पर उतरीं और भारत की बढ़त को मजबूत करने की कोशिश की लेकिन एशिया कप के बाद से जारी उनका संघर्ष यहां भी दिखा और वह 15वें ओवर में लॉन्ग ऑफ पर कैच दे बैठीं। स्मृति शानदार शतक की ओर बढ़ रही थीं लेकिन सुगंधिका की गेंद पर एक और स्लॉग स्वीप खेलने की कोशिश में डीप में कैच आउट हो गईं। इसके बाद ऋचा ने डेथ ओवरों में एक और अहम पारी खेलते हुए भारत को 200 रन के पार पहुंचा दिया।
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