आरबीआई बढ़ती महंगाई के चलते 2026 में दो बार बढ़ा सकता है ब्याज दर: रिपोर्ट
RBI Interest Rates: ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म नोमुरा के ग्लोबल मैक्रो रिसर्च प्रमुख रॉब सुब्बारमन ने मंगलवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि महंगाई का दबाव बढ़ने से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आने वाली दोनों मौद्रिक नीति बैठकों (अक्टूबर और दिसंबर) में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।
एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है। नोमुरा ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि आने वाले महीनों में महंगाई 6 प्रतिशत के पार जा सकती है। सुब्बारमन ने कहा कि भारत के पास वैश्विक निवेश आकर्षित करने और वैश्विक वैल्यू चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की संभावनाएं हैं।
भारत के पास विभिन्न क्षेत्रों में बड़े अवसर हैं, लेकिन अगर अमेरिका और उत्तर-पूर्व एशिया में एआई निवेश की कहानी बहुत मजबूत बनी रहती है, तो कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में भारत पीछे रह सकता है। उन्होंने कहा कि भारत अधिक पूंजी आकर्षित कर सकता है। एफसीएनआर-बी जमा में उम्मीद से बेहतर प्रवाह देखने को मिला है और मजबूत भुगतान संतुलन अधिशेष की भी संभावना है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा बैठक पर नजर
सुब्बारमन ने बताया कि बाजारों की नजर संयुक्त राष्ट्र महासभा में होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों और इस सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संभावित बैठक पर है। वैश्विक मौद्रिक नीति पर सुब्बारमन ने कहा कि इस साल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की कम से कम एक और ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद है, जो संभवतः दिसंबर में हो सकती है।
उन्होंने कहा कि अगर महंगाई ऊंची बनी रहती है तो दरों में और बढ़ोतरी का जोखिम है। उन्होंने कहा कि एफओएमसी के ताजा अनुमान व्यापक रूप से सख्त मौद्रिक नीति की दिशा की ओर संकेत करते हैं। 18 नीति निर्माताओं में से 12 ने इस साल एक और दर बढ़ोतरी की उम्मीद जताई है, जबकि चार ने दो और बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है और केवल दो ने आगे किसी बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं की है।
नीतिगत ब्याज दर बढ़ोतरी
अमेरिकी फेड ने पिछले सप्ताह अपनी नीतिगत ब्याज दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर इसे 3.75 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के दायरे में कर दिया था। सुब्बारमन ने कहा कि बाजारों को उम्मीद है कि कूटनीति वैश्विक तनाव और अमेरिका-चीन व्यापार प्रतिबंधों को कम करने में मदद कर सकती है, जिससे ऊर्जा की लागत और लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड में कमी आ सकती है।
उन्होंने कहा कि ईरान के पास अब भी दबाव बनाने की क्षमता है, क्योंकि ऊंची ऊर्जा कीमतें अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ईंधन की ऊंची कीमतें डाउनस्ट्रीम तेल कारोबार पर दबाव डाल रही हैं। अमेरिका में गैसोलीन की कीमत करीब 4.50 डॉलर और डीजल की कीमत रिकॉर्ड स्तर के करीब 6.50 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई है।
(DISCLAIMER: खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
उत्तराखंड में अत्याचार के मामलों की होगी समयबद्ध समीक्षा, CM धामी ने दिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम बनाने के निर्देश
Uttarakhand News: उत्तराखंड में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ अत्याचार से जुड़े मामलों की निगरानी और कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित लोगों को समय पर न्याय, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जाए. साथ ही लंबित मामलों और विशेष न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों की नियमित और समयबद्ध समीक्षा की जाए.
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक हुई. बैठक में कानून के तहत दर्ज मामलों की स्थिति, लंबित विवेचनाओं और प्रभावित परिवारों को मिलने वाली सहायता की समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति की बैठक केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. मामलों में कार्रवाई की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और लंबित विवेचनाओं को समय पर पूरा करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए.
लंबित मामलों की नियमित समीक्षा के निर्देश
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 से अब तक अधिनियम के अंतर्गत दर्ज जिन मामलों में विवेचना लंबित है, उनके लंबित रहने के कारणों की समीक्षा करते हुए प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। लंबे समय से लंबित एवं गंभीर प्रकृति के मामलों में पुलिस, प्रशासन और अभियोजन विभाग आपसी समन्वय से प्रभावी कार्रवाई करें। मुख्यमंत्री ने विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों की भी नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुराने मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए पुलिस और अभियोजन विभाग के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए। मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए आवश्यकता के अनुसार विशेष लोक अभियोजकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
भुगतान में न हो देरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पीड़ितों को अनुमन्य राहत राशि के भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में राहत देने में विलंब हुआ है, उनकी अलग से समीक्षा की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों की सहायता केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आवश्यकता के अनुसार उन्हें चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास और अन्य पात्र सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाए।
गंभीर एवं संवेदनशील मामलों में पीड़ित और उसके परिवार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी घटना के कारण प्रभावित परिवार के बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो तथा पात्र बच्चों को छात्रवृत्ति एवं अन्य शैक्षिक सहायता योजनाओं से जोड़ा जाए। प्रभावित परिवारों की काउंसलिंग, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा तथा सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास की व्यवस्थाओं पर भी विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में अधिनियम से संबंधित मामलों की नियमित निगरानी के लिए वरिष्ठ स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अधिनियम के प्रावधानों, संवेदनशील मामलों की विवेचना और पीड़ितों के साथ व्यवहार के संबंध में नियमित प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। समाज कल्याण, पुलिस एवं अभियोजन विभाग आपसी समन्वय से समय-समय पर रिफ्रेशर प्रशिक्षण आयोजित करें। मुख्यमंत्री ने मामलों की विवेचना, न्यायालयीन स्थिति, राहत राशि और अन्य सहायता की शासन स्तर से प्रभावी निगरानी के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में मामलों के निस्तारण, विवेचना अथवा राहत वितरण में अपेक्षित प्रगति नहीं है, उनकी अलग से समीक्षा की जाए। अच्छा कार्य करने वाले जिलों की प्रभावी व्यवस्थाओं को अन्य जिलों के साथ साझा किया जाए।
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में अधिनियम के प्रावधानों, कानूनी अधिकारों और पीड़ितों को मिलने वाली सहायता के संबंध में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिस, समाज कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को कहा। यदि किसी जिले या विभाग को अतिरिक्त मानव संसाधन, प्रशिक्षण अथवा बजट की आवश्यकता है तो उसका प्रस्ताव शासन को शीघ्र उपलब्ध कराया जाए।
निर्णय केवल कार्यवृत्त तक सीमित न रहें- धामी
मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में लिए गए निर्णय केवल कार्यवृत्त तक सीमित न रहें। प्रत्येक निर्णय के लिए जिम्मेदारी और समय-सीमा निर्धारित करते हुए उनकी नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ित को न्याय और सहायता के लिए भटकना न पड़े तथा शासन-प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ उसके साथ खड़ा दिखाई दे, यह सुनिश्चित करना सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024 में अधिनियम के तहत 189 और वर्ष 2025 में 157 अभियोग पंजीकृत हुए। वर्ष 2026 में 15 सितम्बर तक 116 अभियोग पंजीकृत हुए हैं, जिनमें 25 प्रकरण विवेचनाधीन हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2024-25 में 205 पीड़ितों को 228.71 लाख रुपये, वर्ष 2025-26 में 127 पीड़ितों को 143.16 लाख रुपये तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 18 सितम्बर तक 104 पीड़ितों को 99.528 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है। मुख्य सचिव और जनपद स्तर पर जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में बैठकों का नियमित आयोजन किया गया। बैठक में समाज कल्याण मंत्री खजान दास, विधायक ममता राकेश, सचिव गृह शैलेश बगौली, सचिव समाज कल्याण श्रीधर बाबू अद्दांकी, सचिव एवं आयुक्त राजस्व परिषद रंजना राजगुरू, अपर पुलिस महानिदेशक ए पी अशुमन, आईजी बरिंदरजीत सिंह, निदेशक समाज कल्याण संजय कुमार, निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
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