भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार अगले एक दशक में तीन गुना होने का अनुमान: जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डिमन
मुंबई, 22 सितंबर (आईएएनएस)। अमेरिकी बैंक जेपी मॉर्गन चेस के सीईओ जेमी डिमन ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था का आकार अगले एक दशक में करीब तीन गुना हो सकता है और कंपनी देश में अपना विस्तार कर रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, डिमोन ने कहा कि बैंक को अगले दशक में भारत में अपने कवरेज और परिचालन में तीव्र वृद्धि की उम्मीद है और बताया कि उसकी रिसर्च में 400 कंपनियां शामिल होंगी, जबकि 2,000 कंपनियों को कवर किया जाएगा।
सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक, डिमन ने कहा कि जेपी मॉर्गन सरकार और भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर काम करने की योजना बना रहा है। उन्होंने 2005 में अपनी पहली भारत यात्रा के बाद से देश में कंपनी के कामकाज के तेजी से विस्तार पर फोकस किया है।
उन्होंने बताया कि 2005 में जेपी मॉर्गन के पास सिर्फ 6,000 कर्मचारी थे, और अब कंपनी कई टेक्निकल क्षेत्रों और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में 60,000 प्रोफेशनल्स को रोजगार देती है।
अमेरिका की यह इन्वेस्टमेंट बैंक फिलहाल अपने रिसर्च ऑपरेशन्स के जरिए लगभग 200 भारतीय कंपनियों को कवर करती है। साथ ही, यह उन मल्टीनेशनल कॉर्पोरेशन्स और भारतीय कंपनियों के साथ भी काम करती है जो विदेशों में अपना कारोबार बढ़ाना चाहती हैं।
सीईओ ने नई दिल्ली और वॉशिंगटन से ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने का भी आग्रह किया और ट्रेड व इन्वेस्टमेंट नियमों में निरंतरता बनाए रखने पर जोर दिया। डिमन ने कहा, मैं चाहूंगा कि यह पूरा हो जाए, और दोनों सरकारों से बैठकर इसे पूरा करने की कोशिश करने का आग्रह किया।
डिमन ने यह भी बताया कि ग्लोबल इकॉनमी को कई खतरों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे कि लगातार महंगाई, सरकार का ज्यादा कर्ज, जियोपॉलिटिकल तनाव और कैपिटल की बढ़ती मांग।
उन्होंने अनुमान लगाया कि ब्याज दरें और बॉन्ड यील्ड लंबे समय तक ऊंचे बने रह सकते हैं।
डिमन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और रीमिलिटराइजेशन से कैपिटल की मांग बढ़ सकती है, और इनके और बढ़ने की संभावना लोगों की सोच से कहीं ज्यादा है।
उन्होंने कहा कि एआई इन्वेस्टमेंट में तेजी से आखिरकार प्रोडक्टिविटी बढ़ सकती है और डिफ्लेशनरी दबाव पैदा हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि हाइपरस्केलर इकोसिस्टम में खर्च अगले साल लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि इस साल यह लगभग 700 बिलियन डॉलर था।
--आईएएनएस
एबीएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
चेन्नई में फ्लू, डेंगू और सांस की बीमारियों के कारण अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़
चेन्नई, 22 सितंबर (आईएएनएस)। चेन्नई के प्राइवेट अस्पतालों में फ्लू, सांस से जुड़े संक्रमण और डेंगू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके कारण ओपीडी में लंबी कतारें लग रही हैं, वार्ड भरे हुए हैं और भर्ती के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
कुछ अस्पतालों में तो इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को बेड के लिए 12 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, आईसीयू से जनरल वार्ड में शिफ्ट होने वाले मरीजों को भी कमरों की कमी के कारण देरी हो रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर संक्रमण हल्के हैं और मरीज दवा, आराम तथा पानी पीने से ठीक हो रहे हैं। हालांकि, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से ग्रस्त लोगों के लिए ये बीमारियां गंभीर हो सकती हैं। कमजोर मरीजों में मौत के मामले कम हैं लेकिन खतरा बना हुआ है।
मरीजों में तेज बुखार, गले में खराश, जुकाम, लगातार खांसी, बदन और पैरों में तेज दर्द, सीने में तकलीफ, थकान और भूख न लगने जैसे लक्षण दिख रहे हैं। बच्चों और किशोरों में लंबे समय तक बुखार और बहुत ज्यादा थकान देखी जा रही है। कुछ बच्चों में बुखार के कारण घबराहट या भ्रम की स्थिति भी बन रही है। कुछ मरीजों को नेबुलाइजेशन या फ्लूइड की जरूरत पड़ रही है, जिससे अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या बढ़ रही है।
चेन्नई के एक प्राइवेट अस्पताल की संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. आर. राजम्मल ने बताया कि वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है।
उन्होंने कहा, जब मरीज इमरजेंसी में आते हैं तो कमरे या बेड के लिए 12 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसी तरह आईसीयू से बाहर शिफ्ट होने वाले मरीजों को भी जनरल वार्ड में बेड के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। ओपीडी में भी इंतजार का समय काफी बढ़ गया है।
डॉक्टरों के अनुसार, मौजूदा मामलों में बड़ा हिस्सा रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (आरएसवी), एडेनोवायरस, राइनोवायरस और पैराइन्फ्लुएंजा जैसे वायरस के कारण हो रहा है। इसके अलावा इन्फ्लुएंजा, जिसमें एच1एन1 भी शामिल है, और डेंगू के मामले भी काफी आ रहे हैं।
डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि बुखार को नजरअंदाज न करें और खुद से दवा न लें, खासकर जब लक्षण बने रहें। लोगों से हाथों की सफाई रखने, संक्रमित लोगों से दूरी बनाए रखने और भीड़ वाली जगहों पर मास्क पहनने की अपील की गई है।
--आईएएनएस
वीकेयू/पीएम
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