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डिजिटल क्लास से लेकर इंटरनेट तक की सुविधा, यूपी के 14 हजार से ज्यादा प्राइमरी स्कूल होंगे स्मार्ट

UP Primary Schools: उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में अब पढ़ाई का तरीका पहले से ज्यादा तकनीक आधारित होने जा रहा है. राज्य सरकार ने पहले चरण में 14,429 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने के लिए 300 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. इसका मकसद बच्चों को आधुनिक डिजिटल संसाधनों से जोड़ना और कक्षा में पढ़ाई को ज्यादा इंटरैक्टिव बनाना है.

नई व्यवस्था के तहत स्कूलों में सिर्फ डिजिटल स्क्रीन ही नहीं लगाई जाएगी, बल्कि इंटरनेट, डिजिटल कंटेंट और लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी. इससे शिक्षक पाठ्यक्रम को वीडियो, एनीमेशन और अन्य डिजिटल माध्यमों से बच्चों को समझा सकेंगे.

65 इंच की स्क्रीन से होगी पढ़ाई

चयनित स्कूलों में कम से कम 65 इंच की 4K UHD इंटरैक्टिव स्क्रीन लगाई जाएगी. इसके साथ ओपीएस कंप्यूटर, वायरलेस माइक्रोफोन, वेबकैम और स्पीकर भी उपलब्ध कराए जाएंगे. बिजली की समस्या के कारण डिजिटल पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए इन्वर्टर-बैटरी की व्यवस्था भी होगी. एक घंटे के इन्वर्टर और कम से कम चार घंटे के बैटरी बैकअप का प्रावधान किया गया है. स्कूलों को वाई-फाई, LAN और ब्लूटूथ से भी जोड़ा जाएगा. इसके अलावा 12 महीने के लिए कम से कम 30 Mbps अनलिमिटेड ब्रॉडबैंड की सुविधा देने की योजना है.

बच्चों के लिए डिजिटल कंटेंट भी होगा उपलब्ध

स्मार्ट स्कूलों में सिर्फ उपकरण लगाने पर ही जोर नहीं है, बल्कि पढ़ाई के लिए डिजिटल सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी. कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के लिए NCERT और SCERT आधारित पाठ्य सामग्री तैयार रहेगी. इसमें वीडियो, एनीमेशन और वर्कशीट जैसी सामग्री शामिल होगी.

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लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए ई-दीक्षा और ई-विद्या आधारित पाठ योजनाओं के साथ क्विज, मूल्यांकन, उपस्थिति और विद्यार्थियों की प्रगति का विश्लेषण किया जा सकेगा. शिक्षकों को इन सुविधाओं के इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा.

तीन साल तक तकनीकी सहायता

एक स्मार्ट स्कूल को तैयार करने की अनुमानित लागत 2,07,910 रुपये रखी गई है. परियोजना के लिए श्रीट्रान इंडिया लिमिटेड को कार्यदायी संस्था बनाया गया है. तकनीकी व्यवस्था लंबे समय तक चलती रहे, इसके लिए तीन साल की हेल्प डेस्क सुविधा भी दी जाएगी. किसी तकनीकी समस्या या शिकायत के समाधान के लिए तीन स्तर की शिकायत निस्तारण व्यवस्था भी रखी गई है.

पहले से डिजिटल सुविधाओं पर काम

सरकारी प्राथमिक स्कूलों को स्मार्ट बनाने की यह योजना राज्य में चल रहे डिजिटल शिक्षा विस्तार का अगला चरण है. उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में पहले ही 32 हजार से ज्यादा स्कूलों में स्मार्ट क्लास और 15 हजार से ज्यादा विद्यालयों में ICT लैब विकसित की जा चुकी हैं.

इसके अलावा 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध है और करीब 2.61 लाख शिक्षकों को टैबलेट दिए जा चुके हैं. इससे शिक्षकों को डिजिटल संसाधनों के जरिए पढ़ाई की तैयारी और कंटेंट तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है.

ऑपरेशन कायाकल्प से बुनियादी सुविधाओं पर जोर

उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने का काम केवल डिजिटल सुविधाओं तक सीमित नहीं है. ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी काम किया गया है. इस अभियान के तहत स्कूल भवन, कक्षाओं, पेयजल, शौचालय, बिजली और दूसरी जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया. राज्य सरकार के अनुसार, करीब 1.32 लाख प्राथमिक विद्यालयों का कायाकल्प किया जा चुका है.

इस तरह सरकारी स्कूलों में सुधार का फोकस अब दो स्तरों पर दिखाई दे रहा है. एक तरफ स्कूलों में भवन, बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ स्मार्ट क्लास, ICT लैब, डिजिटल लाइब्रेरी और ऑनलाइन कंटेंट के जरिए पढ़ाई को तकनीक से जोड़ा जा रहा है. 

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जमुई में नाबालिग छात्रा से बदसलूकी मामले में बड़ा एक्शन, मुख्य आरोपी नंदन यादव का एनकाउंटर

Bihar Jamui Case: बिहार जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ हुई बदसलूकी के मामले में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है. बताया जा रहा है कि छात्र-छात्रा के साथ बदसलूकी के मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी नंदन यादव और पुलिस के बीच मुठभेड़ हो गई. जानकारी के मुताबिक, इस मुठभेड़ के दौरान नंदन यादव पैर में गोली लगने से घायल हो गया है. इसके अलावा इस मामले में फरार एक अन्य आरोपी हरेराम यादव के पैर टूटने की भी जानकारी सामने आई है. फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों को जमुई सदर अस्पताल लेकर गई है. बिहार पुलिस के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर ने पुलिस की कार्रवाई की पुष्टि की है.

वीडियो वायरल होने के बाद तीन आरोपी गिरफ्तार

बता दें कि बिहार के जमुई में शनिवार देर शाम एक नाबालिग छात्र अपनी सहपाठी छात्रा के साथ मड़वा पहाड़ी की ओर जा रहा था, जब वह लौटकर आया तो कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया और उनके साथ बदसलूकी की. बता दें कि दोनों छात्र शहर के एक कोचिंग संस्थान में साथ में पढ़ते हैं. इस घटना का एक वीडियो सोमवार को वायरल हुआ. उसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों की पहचान के बाद एक्शन लेते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. हालांकि इस मामले का मुख्य आरोपी नंदन यादव और दूसरा हरेराम यादव फरार चल रहे थे. जिन्हें मंगलवार को मुठभेड़ के बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

भागने की कोशिश कर रहा था नंदन यादव

बिहार पुलिस के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के मुताबिक, पुलिस टीम आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई कर रही थी. इसी दौरान नंदन यादव पुलिस को देखकर भागने की कोशिश करने लगा. इस दौरान पुलिस और आरोपियों के बीच मुठभेड़ हो गई. इस मुठभेड़ में नंदन यादव के पैर में गोली लग गई. उसके बाद पुलिस ने नंदन यादव को गिरफ्तार कर लिया. जानकारी के मुताबिक, हरेराम यादव के साथ भी पुलिस की मुठभेड़ हो गई. इस दौरान उसके पैर टूटने  की जानकारी मिली है. उसके बाद पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंची है.

आरोपियों में कुछ नाबालिग 

एडीजी के मुताबिक, जमुई मामले में शामिल आरोपियों में कुछ नाबालिग हैं. सोशल मीडिया में वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच की और आरोपियों की पहचान के बाद उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू की. पुलिस का कहना है कि इस मामले में अब कोई आरोपी फरार नहीं है सभी की गिरफ्तारी हो चुकी है.

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