हिमाचल की ऊंची चोटियों पर स्नोफॉल:शिंकुला में 4 इंच ताजा बर्फ, 12 गाड़ियों में टूरिस्ट फंसे, पुलिस ने रेस्क्यू किया, 6 दिन बारिश-बर्फबारी
हिमाचल प्रदेश के ऊंचे क्षेत्रों में मौसम बदला है। लाहौल स्पीति और चंबा की अधिक ऊंची चोटियों पर बीती रात में हल्की बर्फबारी हुई। लाहौल स्पीति के शिंकुला दर्रा में भी शाम के वक्त बर्फबारी के कारण 12 टूरिस्ट व्हीकल और इनमें 25 से ज्यादा लोग फंस गए थे, जिन्हें देर शाम तक पुलिस ने सुरक्षित रेस्क्यू किया। शिंकुला दर्रा में 4 इंच तक ताजा हिमपात दर्ज किया गया है। मौसम विभाग (IMD) ने किन्नौर और लाहौल स्पीति की अधिक ऊंची चोटियों पर अगले चार-पांच घंटे तक बर्फबारी का यलो अलर्ट जारी किया है। IMD के अनुसार, प्रदेश में अगले 6 दिन तक अधिक ऊंचे पहाड़ों पर बर्फबारी और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश के आसार है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर 20 और 22 जनवरी को ज्यादा व्यापक रहेगा। इन 2 दिनों के दौरान पूरे प्रदेश में मौसम खराब रहेगा, जबकि 17 से 19 तारीख तक और 21 जनवरी को अधिक ऊंचे व मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में ही मौसम खराब रहेगा। प्रदेशवासियों को बंधी बारिश-बर्फबारी की उम्मीद मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने प्रदेशवासियों को बारिश-बर्फबारी की उम्मीद जरूर जगाई है। मगर, ज्यादातर जगह पर ड्राइ स्पेल टूटने के कम आसार है। बारिश-बर्फबारी केवल अधिक ऊंचाई वाले भागों में ही होने का पूर्वानुमान है। हालांकि, शिमला में आज सुबह से ही हल्के बादल छाए हुए है। वहीं, देशभर से पहाड़ों पर आने टूरिस्ट भी बर्फबारी के इंतजार में टकटकी लगाए बैठे है और अब तक बर्फबारी नहीं होने से मायूस है। ऐसे में यदि अच्छी बर्फबारी होती है तो पर्यटक भी बर्फ देख सकेंगे। 13 शहरों में पारा 3 डिग्री या इससे भी नीचे बारिश-बर्फबारी के बाद तापमान में गिरावट आएगी। अभी प्रदेश के 13 शहरों में न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस या इससे नीचे गिर चुका है। मंडी के सुंदरनगर का पारा 1.6 डिग्री, भुंतर 1.0, कल्पा 0.6, सोलन 0.1, बरठी में 1.1 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। इसी तरह लाहौल स्पीति के कुकुमसैरी में माइनस -3.8 डिग्री और ताबो में माइनस -5.2 डिग्री दर्ज किया गया।
हिमाचल की अफसरशाही पर भड़के पूर्व DIG धवन:बोले- IAS-IPS की प्रतिक्रिया असंवैधानिक, अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला, ब्रिटिश मानसिकता की झलक
हिमाचल प्रदेश में PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह और अफसरशाही के बीच उपजे विवाद पर अब एक रिटायर्ड IPS अधिकारी खुलकर सामने आए हैं। पूर्व DIG विनोद धवन ने हिमाचल की IAS और IPS एसोसिएशन के बयान की निंदा करते हुए अनुचित, असंवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। विनोद धवन ने कहा- किसी मंत्री द्वारा दिए गए बयान से असहमति हो सकती है, लेकिन संविधान सभी को अभिव्यक्ति की आजादी देता है। ऐसे में इस तरह की सामूहिक प्रतिक्रिया सही नहीं है। उन्होंने IPS एसोसिएशन द्वारा जारी बयानों को सेवा की गरिमा और संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ करार दिया। बता दें कि IPS एसोसिएशन ने मंत्री विक्रमादित्य के साथ ड्यूटी देने से इनकार कर दिया था। इसी तरह IAS एसोसिएशन ने भी मंत्री के शासक नहीं बनने के बयान की निंदा की थी। क्यों भड़के रिटायर्ड IPS अधिकारी? विनोद धवन ने बताया- IPS जैसी संवैधानिक संस्था ने एक लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित मंत्री के बयान पर सामूहिक रूप से ऐसी भाषा का प्रयोग किया, जो अप्रत्यक्ष रूप से नागरिकों को दी जाने वाली कानून व्यवस्था और सुरक्षा सेवाओं को रोकने जैसी चेतावनी की ओर इशारा करती है। उन्होंने कहा- यह प्रतिक्रिया न केवल संविधान के अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) का उल्लंघन है, बल्कि अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) जैसे मौलिक अधिकारों की भावना के भी खिलाफ है। IPS एसोसिएशन पर गंभीर सवाल रिटायर्ड IPS अधिकारी ने सवाल उठाया कि 'क्या IPS अधिकारी या उनकी एसोसिएशन को यह अधिकार है कि वे किसी नागरिक या राजनीतिक व्यक्ति के प्रति कानून के संरक्षण को लेकर सार्वजनिक रूप से चेतावनी या धमकी जैसा संदेश दें?' IPS की बयानबाजी ने ब्रिटिश काल की पुलिस मानसिकता की याद दिलाई: धवन धवन ने कहा- पुलिस सेवा का मूल उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है, न कि उन्हें डराने या सेवाओं के बहिष्कार का संकेत देना। उन्होंने IPS को 'संविधान की आत्मा और नागरिकों के अधिकारों का रक्षक' बताते हुए कहा कि हालिया बयानबाजी ब्रिटिश काल की पुलिस मानसिकता की याद दिलाती है। ‘पुलिस कोई पवित्र गाय नहीं’ रिटायर्ड अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'पुलिस अधिकारी पवित्र गाय नहीं हैं। यदि कुछ अधिकारी भ्रष्ट या पक्षपाती हैं और उन पर सवाल उठते हैं, तो पूरे तंत्र को सामूहिक रूप से आहत होकर संविधान की मर्यादाएं लांघने का अधिकार नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा- यदि किसी मंत्री का बयान गलत है, तो उसका जवाब संवैधानिक, कानूनी और मर्यादित तरीके से दिया जाना चाहिए, न कि ऐसी भाषा में, जिससे यह लगे कि पुलिस अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों से पीछे हट सकती है। संवैधानिक संकट की चेतावनी विनोद धवन ने इसे एक खतरनाक मिसाल बताया और कहा कि अगर सुरक्षा देने वाली संस्थाएं ही यह संकेत देने लगें कि वे नागरिकों को कानून का संरक्षण देने से पीछे हट सकती हैं, तो यह संवैधानिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर अंत में लिखा- IPS जैसी प्रीमियर सेवा से जुड़े अधिकारियों को किसी भी प्रतिक्रिया से पहले यह आत्ममंथन करना चाहिए कि 'क्या वे संगठन की रक्षा कर रहे हैं या संविधान और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रहे हैं?
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