मारिया मचाडो से पहले इन लोगों ने बेच दिया था अपना नोबेल पुरस्कार, लिस्ट में शामिल हैं इतने नाम
वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारियो कोरीना मचाडो को पिछले महीने शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, लेकिन उन्होंने अपना नोबेल पुरस्कार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गिफ्ट में दे दिया. उन्होंने ट्रंप को तब अपना नोबेल पदक भेंट किया है जब उसे लेकर नियम है कि नोबेल पुरस्कार से सम्मानित व्यक्ति अपने नोबेल पदक को किसी के साथ शेयर नहीं कर सकता और ना ही उसे ट्रांसफर किया जा सकता है. हैरानी की बात ये है कि इसे बेचा जा सकता है. मारिया मचाडो से पहले पांच लोग अपने नोबेल पुरस्कार को बेच चुके हैं.
ट्रंप को नोबेल पदक भेंट कर क्या बोलीं मचाडो?
बता दें कि वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने गुरुवार को व्हाइट हाउस के बंद कमरे में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की और अपना नोबेल शांति पुरस्कार मेडल उन्हें भेंट कर दिया. मचाडो ने ट्रंप को नोबेल भेट करने को दोनों देशों की आजादी की साझा लड़ाई का ऐतिहासिक प्रतीक करार दिया. मचाडो ने कहा कि दो सदी पहले फ्रांसीसी जनरल मार्क्विस डी लाफिएट ने वेनेजुएला के स्वतंत्रता नेता सिमोन बोलिवर को जॉर्ज वाशिंगटन की तस्वीर वाला एक मेडल गिफ्त किया था. अब 200 साल बाद बोलिवर के लोग वाशिंगटन के उत्तराधिकारी को यह पदक वापस कर रहे हैं. वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने भी नोबेल पदक को अपने लिए सम्मान बताया.
ये विजेता बेच चुके हैं अपना नोबेल पुरस्कार
दिमित्री मुरातोव
मारिया मचाडो से पहले साल 2022 में रूस के पत्रकार मुरातोव ने अपना नोबेल शांति पदक नीलाम कर दिया था. उन्होंने इस पदक को यूक्रेन युद्ध से प्रभावित बच्चों की मदद के लिए नीलाम किया था. जून 2022 में न्यूयॉर्क में हुई इस नीलामी में एक अज्ञात खरीदार ने इसे रिकॉर्ड 103.5 मिलियन डॉलर में खरीद लिया था. मुरातोव ने अपने नोबल पुरस्कार की नीलामी से मिली पूरी रकम को यूक्रेन के शरणार्थी बच्चों की मदद के लिए यूनिसेफ को दान कर दिया था.
जेम्स वॉटसन
उससे पहले साल 2014 में जेम्स वॉटसन ने भी अपना नोबेल पुरस्कार बेच दिया था. बता दें कि जेम्स वॉटसन को डीएनए संरचना की खोज के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. वह जीवित रहते हुए अपना नोबेल पदक बेचने वाले पहले व्यक्ति थे. उन्होंने अपने नोबेल पदक को कुल 4.76 मिलियन डॉलर में बेच दिया था. जिसे रूस के अरबपति अलीशेर उस्मानोव ने खरीदा था. हालांकि विवाद के बाद उस्मानोव ने वॉटसन के सम्मान के रूप में उस पदक को उन्हें भेंट कर दिया था.
फ्रांसिस क्रिक
वॉटसन से ठीक एक साल पहले यानी 2013 में डीएनए की खोज में योगदान के लिए ब्रिटिश वैज्ञानिक फ्रांसिस क्रिक को मिले नोबेल पुरस्कार को उनके परिवार ने उनकी मौत के बाद नीलाम कर दिया था. बता दें कि फ्रांसिस क्रिक को भी वॉटसन के साथ ही नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उनके नोबल पुरस्कार को चीन की एक बायोमेडिकल कंपनी के सीईओ जैक वांग ने 2.27 मिलियन डॉलर में खरीद लिया था. वहीं इस नीलामी से मिली रकम को विभिन्न संस्थानों में वैज्ञानिक खोजों के लिए दान कर दिया गया था.
जॉन नैश
साल 2019 में जॉन नैश को मिले नोबेल पुरस्कार को नीलाम किया गया था. नैश को अर्थशास्त्र के लिए नोबल पुरस्कार मिला था. गणितज्ञ जॉन नैश 'ए ब्यूटीफुल माइंड' फिल्म से मशहूर हुए थे. उनके इस नोबेल पुरस्कार को क्रिस्टी की नीलामी के जरिए 7.35 लाख डॉलर में बेच दिया था. उनके निधन के बाद उनके परिवार ने विरासत को संभालने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए इसे बेचने का निर्णय लिया था.
नील्स बोहर
साल 1940 में महान फिजिसिस्ट नील्स बोहर को परमाणु संरचना पर अनूठे काम के लिए नोबेल मिला था. लेकिन उन्होंने अपने नोबेल पदक को नीलाम कर दिया. नीलामी में मिली रकम को उन्होंने फिनलैंड युद्ध राहत के लिए दान दे दिया था. इस नोबेल पुरस्कार को एक अज्ञात खरीदार ने खरीदा लेकिन बाद में उसने डेनमार्क के एक म्यूजियम को इसे सौंप दिया. जो आज भी वहां रखा हुआ है.
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हिंदू समूह ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पर अमेरिका से की कार्रवाई की मांग
वॉशिंगटन, 17 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंता जाहिर की जा रही है। वहीं, पाकिस्तान में पहले से ही ऐसी हिंसा जारी है। ऐसे में एक हिंदू एडवोकेसी ग्रुप ने चेतावनी दी है कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं की हालत हाल के महीनों में बहुत खराब हुई है। इस समूह ने अमेरिकी कांग्रेस और सरकार से बढ़ती हिंसा पर और सख्ती से जवाब देने की अपील की है।
वॉशिंगटन में एक एग्जिबिशन के मौके पर हिंदू एक्शन के उत्सव चक्रवर्ती ने कहा कि संगठन पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत दक्षिण एशिया में हिंदुओं की हालत के बारे में कांग्रेस के सदस्यों और स्टाफ को जागरूक करने के लिए इमर्सिव एग्जिबिट्स, फिल्मों और लॉमेकर्स के साथ सीधे एंगेजमेंट के जरिए काम कर रहा है।
उत्सव चक्रवर्ती ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू हजारों सालों से वहां के मूल निवासी, आदिवासी समुदाय हैं, फिर भी आज उन्हें किडनैपिंग, जबरन धर्मपरिवर्तन और तस्करी का सामना करना पड़ता है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं की संख्या मुश्किल से कुल आबादी का डेढ़ फीसदी रह गई है। उन्होंने कहा कि हिंदू एक्शन इन मुद्दों को हाईलाइट कर रहा है और साथ ही पाकिस्तान से भागकर भारत आए हिंदू शरणार्थियों के अनुभव को डॉक्यूमेंट भी कर रहा है।
उन्होंने कहा, हमारे यहां ऐसे लोग हैं जो भारत में शरणार्थियों के साथ-साथ पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ भी काम कर रहे हैं। हम कम उम्र की हिंदू लड़कियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें अक्सर किडनैप करके जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराया जाता है और फिर उनकी ट्रैफिकिंग की जाती है।
चक्रवर्ती ने याद दिलाया कि बांग्लादेश 1971 में पाकिस्तान से अलग हुआ था और पाकिस्तानी सेना और जमात इस्लामी के सहयोगी कट्टरपंथी इस्लामिस्ट ने सिर्फ 10 महीनों में बांग्लादेश में लगभग 2.8 मिलियन हिंदुओं की हत्या कर दी थी। उन्होंने चेतावनी दी कि देश में राजनीतिक बदलावों के बाद पिछले डेढ़ साल में स्थिति फिर से खराब हो गई है।
उन्होंने कहा, “पिछले डेढ़ साल में, हमने देखा है कि बांग्लादेश में जमात इस्लामी ने बहुत ताकत हासिल कर ली है; यह समूह फरवरी में कुछ हफ्तों में होने वाले चुनाव जीतने की अच्छी स्थिति में है। हाल ही में सत्ता में बदलाव के बाद, हिंदुओं की हालत काफी खराब हो गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में हिंदुओं को सार्वजनिक रूप से पीटा जा रहा है, बेइज्जत किया जा रहा है, मारा जा रहा है और फिर जला दिया जा रहा है, यह सब खुलेआम घिनौना और हिंसा दिखाने के लिए किया जा रहा है। इन घटनाओं से दुनिया भर के समुदायों में बहुत ज्यादा गुस्सा और दुख फैल गया है। हिंदूएक्शन की योजना इन चिंताओं को आने वाली कांग्रेस की ब्रीफिंग में दूर करने की है, जिसके बारे में चक्रवर्ती ने कहा कि यह 10 फरवरी के आसपास होने की उम्मीद है।
उत्सव चक्रवर्ती ने यह भी माना कि अमेरिकी सांसदों ने बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं के मुद्दे पर संवेदनशीलता नहीं दिखाई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस मौके पर उठ खड़े होने और दोनों देशों में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे जुल्म के बारे में ज्यादा आक्रामक और ज्यादा फैक्ट्स के साथ बोलने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “अमेरिकी कांग्रेस की ओर से पर्याप्त ध्यान न देना उनकी कमजोरी और नासमझी को दिखाता है। हिंदूएक्शन का आउटरीच इसी कमी को पूरा करने के मकसद से था। हमारा मानना है कि अमेरिका में हिंदुओं के तौर पर, यह पक्का करने में हमारी भूमिका है कि हमारे सांसदों, हमारे व्हाइट हाउस, हमारे स्टेट डिपार्टमेंट को पता हो कि क्या हो रहा है, और हम यह पक्का करने की पूरी कोशिश करते हैं कि वे इन समुदाय की रक्षा के लिए काम करें।”
--आईएएनएस
केके/एएस
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