Healthy Diet Tips: सुबह या शाम, फल खाने का कौन सा समय है बेहतर? जानें क्या कहता है हेल्थ रूटीन
Best Time to Eat Fruits: फलों में विटामिन, मिनरल, फाइबर और दूसरे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। फल सेहतमंद डाइट का अहम हिस्सा हैं, लेकिन कई बार समझ नहीं आता कि इन्हें सुबह, दोपहर या शाम कब खाना बेहतर है। इन्हें खाने के लिए कोई एक तय समय सभी लोगों पर लागू नहीं होता।
हालांकि, दिन की अलग-अलग timing के हिसाब से फल को डाइट में शामिल करने के ये कुछ आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं।
1. सुबह फल खाना हो सकता है अच्छा विकल्प
सुबह नाश्ते के साथ या नाश्ते के कुछ हिस्से के तौर पर फल शामिल किए जा सकते हैं। केला, सेब, पपीता, संतरा या मौसमी जैसे फल दिन की शुरुआत में डाइट को पोषण से भरने का आसान तरीका हैं।
2. दोपहर में भी खा सकते हैं फल
अगर सुबह फल नहीं खा पाए हैं तो दोपहर में इसे स्नैक के तौर पर लिया जा सकता है। ऑफिस या काम के बीच बिस्किट और पैकेज्ड स्नैक्स की जगह एक पूरा फल आसान विकल्प हो सकता है।
3. एक्सरसाइज से पहले फल दे सकता है Energy
वर्कआउट से पहले कुछ लोगों के लिए केला या कोई दूसरा फल हल्का स्नैक हो सकता है। इससे कार्बोहाइड्रेट मिलता है, जो शरीर के लिए ऊर्जा का स्रोत है।
हालांकि, एक्सरसाइज से ठीक पहले ज्यादा मात्रा में फल खाने से कुछ लोगों को पेट भारी या असहज महसूस हो सकता है। इसलिए अपनी सुविधा के अनुसार समय और मात्रा तय करें।
4. शाम की भूख में फल बन सकता है Snack
शाम को चाय के साथ बार-बार नमकीन या मीठी चीजें खाने की आदत है तो उसकी जगह पूरा फल लिया जा सकता है। इससे डाइट में फाइबर और दूसरे पोषक तत्व जोड़ने में मदद मिलती है।
5. रात में फल खाना पूरी तरह गलत नहीं
रात में फल खाने को लेकर कई तरह की बातें कही जाती हैं, लेकिन हर व्यक्ति के लिए इसे पूरी तरह गलत नहीं माना जा सकता। अगर आपको रात में फल खाने से पाचन संबंधी परेशानी नहीं होती और आपकी कुल डाइट संतुलित है, तो इसे अपनी जरूरत के अनुसार शामिल किया जा सकता है।
फल खाते समय इन बातों का रखें ध्यान
पूरा फल खाएं, सिर्फ Juice पर निर्भर न रहें। पूरा फल खाने से उसका फाइबर भी मिलता है। इसके मुकाबले फलों का जूस आसानी से ज्यादा मात्रा में पिया जा सकता है और उसमें पूरे फल वाला फाइबर कम हो सकता है।
Seasonal Fruits को दें जगह
मौसम के अनुसार मिलने वाले अलग-अलग फलों को डाइट में शामिल करना अच्छा तरीका हो सकता है। एक ही फल रोज खाने के बजाय अलग-अलग फल बदलकर खाने से डाइट में variety बनी रहती है।
जरूरत से ज्यादा फल भी न खाएं
फल पौष्टिक होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इन्हें असीमित मात्रा में खाया जाए। आपकी उम्र, activity level और कुल डाइट के हिसाब से मात्रा तय करना बेहतर है।
सबसे जरूरी बात क्या है?
फल खाने के लिए किसी एक “Perfect Time” के पीछे भागने के बजाय उन्हें नियमित और संतुलित डाइट का हिस्सा बनाना ज्यादा जरूरी है।
सुबह खाएं या शाम, ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि आपकी पूरी डाइट में पर्याप्त फल, सब्जियां, प्रोटीन, फाइबर और दूसरे जरूरी पोषक तत्व शामिल हों।
नोट: जिन्हें किसी खास स्वास्थ्य समस्या के कारण डाइट को लेकर सावधानी बरतनी है, उन्हें डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह के अनुसार फल चुनने चाहिए।
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Child Screen Time: बच्चा हर वक्त मोबाइल मांगता है? ज्यादा स्क्रीन टाइम से हो सकती हैं ये 5 परेशानियां, ऐसे समझें खतरे की घंटी
Child Screen Time: बच्चे का रोते ही मोबाइल थमा देना या खाना खिलाने के लिए फोन का सहारा लेना आज कई घरों में आम हो गया है। शुरुआत में यह आसान तरीका लगता है, लेकिन धीरे-धीरे बच्चा मोबाइल का आदी होने लग सकता है और स्क्रीन से दूर रखना माता-पिता के लिए चुनौती बन जाता है।
जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम सिर्फ बच्चे की आंखों तक सीमित समस्या नहीं है। लंबे समय तक मोबाइल, टैबलेट या टीवी देखने का असर नींद, शारीरिक गतिविधि, व्यवहार और पढ़ाई जैसी रोजमर्रा की आदतों पर भी पड़ सकता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि बच्चा स्क्रीन पर कितना समय बिता रहा है और उसका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है।
बच्चों को हो सकती हैं ये 5 परेशानियां
नींद का बिगड़ सकता है पैटर्न
सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल या अन्य स्क्रीन देखने से बच्चे की नींद की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। देर रात तक वीडियो या गेम देखने की आदत सोने के समय को आगे बढ़ा सकती है। पर्याप्त और नियमित नींद बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी है।
शारीरिक गतिविधि हो सकती है कम
जब बच्चे का काफी समय मोबाइल देखने में गुजरता है, तो खेलकूद और दूसरी शारीरिक गतिविधियों के लिए समय कम हो सकता है। लंबे समय तक बैठे रहने की आदत बच्चे की रोजाना की सक्रियता को प्रभावित कर सकती है। आउटडोर खेल, साइकिलिंग और परिवार के साथ एक्टिविटी स्क्रीन टाइम का बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
ध्यान और व्यवहार पर पड़ सकता है असर
बहुत तेज गति से बदलते वीडियो, गेम और लगातार मिलने वाले डिजिटल स्टिमुली बच्चे को लंबे समय तक एक ही गतिविधि पर ध्यान बनाए रखने में मुश्किल महसूस करा सकते हैं। कुछ बच्चों में स्क्रीन बंद करने पर चिड़चिड़ापन या गुस्सा भी देखने को मिल सकता है। हालांकि हर बच्चे पर इसका असर एक जैसा नहीं होता।
आंखों पर पड़ सकता है दबाव
लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में थकान, सूखापन या असहजता महसूस हो सकती है। बच्चे अक्सर स्क्रीन देखते समय पलकें कम झपकाते हैं और मोबाइल को आंखों के बहुत करीब भी ले आते हैं। इसलिए बीच-बीच में स्क्रीन से ब्रेक लेना और पर्याप्त दूरी बनाए रखना जरूरी है।
परिवार और पढ़ाई के समय में हो सकती है कमी
अगर बच्चा हर खाली समय मोबाइल पर बिताने लगे तो परिवार के साथ बातचीत, किताब पढ़ने, रचनात्मक गतिविधियों और पढ़ाई के लिए उपलब्ध समय कम हो सकता है। खासतौर पर भोजन के समय या होमवर्क के दौरान मोबाइल की आदत बच्चे की दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है।
माता-पिता क्या करें?
बच्चे को अचानक मोबाइल से पूरी तरह दूर करने के बजाय घर में स्पष्ट स्क्रीन नियम बनाना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है। भोजन और सोने से पहले स्क्रीन-फ्री समय तय करें, बच्चे के साथ रोजाना खेलें और उसकी पसंद की गैर-डिजिटल गतिविधियों को बढ़ावा दें। सबसे जरूरी बात यह है कि माता-पिता खुद भी फोन के इस्तेमाल का उदाहरण पेश करें।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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