Ayodhya Ram Temple Donation Theft Case | SIT ने सुप्रीम कोर्ट में सौंपी रिपोर्ट, CCTV फुटेज में 105 बार चोरी की पुष्टि, 25 सितंबर तक चार्जशीट
अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी और अनधिकृत निकासी के बहुचर्चित मामले में विशेष जांच टीम (SIT) ने मंगलवार को अपनी स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दी है। SIT ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि मामले की गहन जांच पूरी हो चुकी है और 25 सितंबर तक इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि इस संबंध में 25 जून 2026 को अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी। जांच के दौरान CCTV फुटेज, गवाहों के बयान, बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई।
CCTV में 105 बार पैसे निकालते हुए देखा गया
SIT की रिपोर्ट में कहा गया है कि मंदिर की PFC बिल्डिंग में बने काउंटिंग रूम के CCTV फुटेज की जांच की गई। इसमें 105 ऐसे मामले सामने आए जिनमें काउंटिंग रूम से बिना इजाज़त कैश निकाला या छिपाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इन घटनाओं में कुछ अन्य लोगों ने भी मदद की थी। SIT ने CCTV और अन्य सबूतों के आधार पर आठ आरोपियों की पहचान की है। रिपोर्ट में उनके बैंक डिपॉजिट और संपत्ति का भी ब्योरा शामिल है।
803 कीमती सामानों की जांच में कोई गड़बड़ी नहीं मिली
रिपोर्ट के मुताबिक, 803 कीमती सामानों की रसीदों और रिकॉर्ड की जांच की गई। ये सामान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के लॉकर में रखे गए हैं और लॉकर की भी तलाशी ली गई। SIT के मुताबिक, इन 803 सामानों में कोई गड़बड़ी नहीं मिली। 86 कीमती सामान ऐसे हैं जिनकी रसीदें जारी नहीं की गई थीं। इन सामानों की अलग से पहचान की गई और फिजिकली वेरिफाई किया गया।
200 किलो चांदी की जांच में कोई गड़बड़ी नहीं मिली
SIT ने लगभग 944.411 किलो सफेद धातु (जिसे चांदी बताया गया है) से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की है। इसके अलावा, मीडिया और सोशल मीडिया पर चांदी के दान से जुड़े जो दावे सामने आए थे, उनकी भी जांच की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, 200 किलो और 38.288 किलो चांदी की ईंटों, चांदी के मनकों, चरण पादुकाओं और रामचरितमानस से जुड़े दान की जांच में कोई गड़बड़ी नहीं मिली।
173 लोगों के बयान दर्ज किए गए
SIT ने 14 सितंबर तक 173 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। इनमें ट्रस्ट के अधिकारी, अकाउंट्स डिपार्टमेंट के कर्मचारी, बैंक अधिकारी, सिक्योरिटी स्टाफ, CCTV ऑपरेटर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और दूसरे संबंधित लोग शामिल हैं।
2 नवंबर को फिर से सुनवाई
SIT ने कहा कि जांच का ज़्यादातर काम पूरा हो चुका है और चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी, अगर कानून के तहत ज़रूरत पड़ी, तो आगे की जांच की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट की एक कॉपी कोर्ट के सामने भी रखी जाए। इस मामले में अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।
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IIT Bombay में छात्र की मौत के बाद मानसिक स्वास्थ्य सुधारों पर जोर, छात्रों ने उठाई मांग
मुंबई के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के विद्यार्थियों ने छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद उत्पन्न चिंताओं का हवाला देते हुए संस्थान की छात्र कल्याण प्रणाली में बदलाव और मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दिए जाने की मांग की है। छात्रों ने यह भी कहा कि इस मामले को लेकर एक प्रोफेसर को निशाना बनाना ‘पूरी तरह गलत’ है। आईआईटी (मुंबई) में ऊर्जा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के दूसरे साल का बीटेक विद्यार्थी वाकोडे 18 सितंबर की शाम को छात्रावास के अपने कमरे में फंदे पर लटका मृत मिला था।
यह घटना ‘मिड-सेमेस्टर’ परीक्षा के दौरान उसे चैटजीपीटी का इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए पकड़े जाने के कुछ घंटों बाद हुई। आत्महत्या की घटना के बाद आईआईटी परिसर में विद्यार्थियों ने विरोध-प्रदर्शन किया। साहिल के परिवार की शिकायत पर मुंबई पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के खिलाफ ‘अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम’ और भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाने) के तहत मामला दर्ज किया है।
उन्हें प्रशासनिक मामलों के डीन के पद से हटा दिया गया है। एक छात्र ने सोमवार को कहा, ‘‘भले ही इस मुद्दे पर विद्यार्थियों की राय अलग-अलग हो, लेकिन हम सब एक बात पर सहमत हैं कि विद्यार्थियों की भलाई के लिए बदलाव की जरूरत है, जिसमें कल्याण प्रकोष्ठ, मनोविज्ञानी की मदद और ऐसी ही दूसरी चीजें शामिल हैं। निर्णय लेते समय विद्यार्थियों की बात सुनी जानी चाहिए।’’ उसने कहा, ‘‘लेकिन, मुझे लगता है कि प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के साथ किए गए बर्ताव को लेकर विद्यार्थी सहमत नहीं हैं।
मीडिया में जो जाति का कोण दिखाया गया है, वह गलत है और ऐसा कुछ भी नहीं है।’’ छात्र ने दावा किया कि प्रोफेसर डूला को डीन (प्रशासनिक मामले) के पद से हटाना पूरी तरह गलत था क्योंकि वह अपना काम कर रहे थे। एक और छात्र ने भी मीडिया से कहा कि जातिगत भेदभाव की खबरें गलत हैं। उसने कहा, ‘‘संस्थान में जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता इसलिए आईआईटी-मुंबई में जातिगत भेदभाव के बारे में मीडिया में प्रसारित खबरें पूरी तरह गलत हैं।’’ एक अन्य छात्र ने कहा कि साहिल वाकोडे ने यह कदम तनाव के कारण उठाया होगा।
हालांकि, कुछ विद्यार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रोफेसर डूला का विद्यार्थियों को मामूली वजहों से निलंबित करने और उन्हें छात्रावास से निकालने का पुराना रिकॉर्ड रहा है। उन्होंने दावा किया कि ‘डीन ऑफ स्टूडेंट्स अफेयर्स’ के तौर पर प्रोफेसर डूला के कार्यकाल में उठाए गए कदमों से डर का माहौल बन गया था। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें लगा कि अगर वे इस घटना के बाद इस बारे में बात करते, तो वह उन्हें निलंबित करने का आदेश दे सकते थे।
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