पाकिस्तान: ईशनिंदा कानूनों के गंभीर दुरुपयोग से परिवारों में डर का माहौल
इस्लामाबाद, 16 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान में ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग के चलते सैकड़ों परिवार भय के साए में जी रहे हैं। हालिया एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जबरन वसूली की मांग ठुकराने वाले लोगों को ईशनिंदा के झूठे मामलों में फंसाने वाले संगठित गिरोह अब भी सक्रिय हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बताया है कि वर्षों के दौरान 450 से अधिक लोगों, जिनमें अधिकांश पुरुष हैं को ईशनिंदा मामलों में फंसाया गया। इनमें 10 ईसाई भी शामिल थे, जिनमें से कम से कम पांच लोगों की हिरासत में मौत हो चुकी है।
एशिया की प्रमुख स्वतंत्र कैथोलिक मीडिया सेवा यूनियन ऑफ कैथोलिक एशियन (यूसीए) न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने 101 प्रभावित परिवारों की याचिका पर सुनवाई करते हुए संघीय सरकार को ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग की जांच के लिए एक आयोग गठित करने का आदेश दिया था। हालांकि, बाद में एक अपीलीय पीठ ने अंतरिम आदेश के जरिए इस जांच को निलंबित कर दिया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई मामलों में पाकिस्तान की प्रमुख जांच एजेंसी फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एफआईए) के साइबर क्राइम विंग के अधिकारी भी झूठे आरोप गढ़ने में शामिल पाए गए हैं।
रिपोर्ट में कई मामलों का जिक्र किया गया है, जिनमें 33 वर्षीय रिक्शा चालक आमिर शहजाद का मामला भी शामिल है, जिसने ईशनिंदा गिरोहों की गतिविधियों को उजागर किया।
आमिर शहजाद लाहौर में अपने घर से एक व्यक्ति के फोन पर पार्सल लेने के लिए निकले थे, जिसके बाद वे लापता हो गए। चार दिन बाद एफआईए ने परिवार को बताया कि शहजाद को फेसबुक पर कथित ईशनिंदात्मक पोस्ट साझा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
यूसीए न्यूज के अनुसार, शहजाद की मां हर मंगलवार उनसे मिलने जाती हैं। शहजाद ने बताया कि जेल में कई अन्य कैदी भी इसी तरह झूठे आरोपों में फंसाए गए हैं। शहजाद का परिवार और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि वह ‘ईशनिंदा गैंग’ कहे जाने वाले उस सिंडिकेट के कई पीड़ितों में से एक हैं, जो निजी स्वार्थों के लिए खासकर युवाओं को निशाना बनाता है।
--आईएएनएस
डीएससी
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दिल्ली की हवा फिर बनी जहर! GRAP-III लागू, गाड़ियों से लेकर जानिए कहां-कहां लगा ब्रेक
Delhi News: दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए Commission for Air Quality Management ने शुक्रवार को ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के स्टेज-III यानी GRAP-III को दोबारा सख्ती से लागू कर दिया. आयोग ने कहा कि आने वाले दिनों में एयर क्वालिटी इंडेक्स के गंभीर श्रेणी में पहुंचने का अनुमान है, जिसके चलते यह कदम उठाया गया है.
सर्दियों में बढ़ा प्रदूषण संकट
दिल्ली-एनसीआर बीते कई महीनों से भारी प्रदूषण से जूझ रहा है. दिसंबर में भी AQI गंभीर स्तर तक पहुंचने के बाद GRAP-III के सभी उपाय लागू किए गए थे. अधिकारियों के मुताबिक कम हवा की गति, स्थिर वातावरण और एडवर्स वेदर कंडीशन के कारण पोल्यूटेंट का फैलाव नहीं हो पा रहा है, जिससे एयर क्वालिटी और खराब हो गई है.
कंस्ट्रक्शन और फैक्टरियों लगे रोक
GRAP-III के तहत गैर-आवश्यक निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है. इसमें मिट्टी की खुदाई, पाइलिंग, खुली खाइयों का निर्माण, वेल्डिंग, पेंटिंग, प्लास्टर, टाइल और फ्लोरिंग कार्य शामिल हैं. रेडी-मिक्स कंक्रीट प्लांट्स के संचालन पर भी रोक रहेगी. इसके अलावा कच्ची सड़कों पर सीमेंट, रेत और फ्लाई ऐश जैसे निर्माण सामग्री के परिवहन पर प्रतिबंध लगाया गया है.
प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों जैसे स्टोन क्रशर, ईंट भट्टे, खनन गतिविधियां और बिना स्वीकृत ईंधन का उपयोग करने वाले उद्योगों को बंद करने के आदेश दिए गए हैं.
वाहनों पर भी प्रतिबंध
वाहनों पर भी सख्त पाबंदियां लागू की गई हैं. GRAP-III के अंतर्गत BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल चार पहिया वाहनों, गैर-जरूरी डीजल चालित मध्यम मालवाहक वाहनों और ऐसे अंतर-राज्य डीजल बसों पर रोक है जो CNG, इलेक्ट्रिक या BS-VI मानकों को पूरा नहीं करतीं.
हालांकि, आवश्यक सेवाओं को छूट दी गई है. मेट्रो, रेलवे, हवाई अड्डों, राजमार्गों, रक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े बुनियादी ढांचा और सार्वजनिक उपयोगिता परियोजनाएं सख्त धूल नियंत्रण और अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत जारी रहेंगी. दिव्यांग व्यक्तियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले वाहनों को भी प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है.
स्कूलों के लिए जारी हुए नियम
सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ कक्षा 5 तक के स्कूलों को हाइब्रिड या ऑनलाइन मोड में संचालित करने की सलाह दी गई है. CAQM ने कहा है कि वह वायु गुणवत्ता पर लगातार नजर रखेगा और यदि हालात और बिगड़ते हैं तो अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे.
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