100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा
SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।
हैशटैग लगाओ, दुनिया बदलो… कितना आसान है न? क्या सोशल मीडिया लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है?
लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
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