आईफोन-18 खरीदने के लिए भीड़ पर सोनू सूद का तंज:नई EMI से समाज नहीं बदलेगा; विक्की कौशल ने ली सेल्फी, रितेश-जेनेलिया ने शेयर की तस्वीरें
मुंबई के बीकेसी स्थित एपल स्टोर के बाहर नए आईफोन-18 की बिक्री शुरू होते ही लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। एक तरफ जहां आम लोग रातभर लाइन में लगकर नए हैंडसेट का इंतजार करते दिखे, वहीं दूसरी तरफ बॉलीवुड के कई सितारे भी इस ट्रेंड में शामिल होते नजर आए। एक्टर विक्की कौशल स्टोर पहुंचकर फैंस के साथ सेल्फी लेते दिखाई दिए, जबकि रितेश देशमुख, जेनेलिया, नेहा धूपिया और करिश्मा तन्ना जैसे कलाकारों ने सोशल मीडिया पर अपने नए हैंडसेट की तस्वीरें शेयर कीं। इस बीच एक्टर सोनू सूद ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर इस होड़ पर सवाल उठाया और लोगों को समाज सुधारने पर ध्यान देने की सलाह दी। सोनू सूद बोले- ईएमआई और वही पुराने बिल स्टोर के बाहर लगी लंबी लाइनों की तस्वीर शेयर करते हुए सोनू सूद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि नया फोन और नई ईएमआई से पुराने बिल नहीं बदलते। उन्होंने लिखा कि अब समय आ गया है कि लोग सिर्फ अपने फोन को अपग्रेड करने के बजाय समाज में बदलाव लाने के लिए लाइन में लगें, क्योंकि असली अपग्रेड एक बेहतर समाज बनाना है। स्टोर पर पहुंचे विक्की कौशल, सेल्फी ली मुंबई के बीकेसी स्टोर पर बिक्री के पहले ही दिन सैकड़ों लोगों का हुजूम देखने को मिला। इस दौरान एक्टर विक्की कौशल भी वहां पहुंचे और उन्होंने फैंस के साथ सेल्फी क्लिक की। स्टोर के बाहर कई लोग ऐसे भी थे जो सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करके पहुंचे थे और अपने शहर में पहला हैंडसेट खरीदने के लिए रातभर लाइन में खड़े रहे। बॉलीवुड में नए आईफोन का ट्रेंड फिल्म इंडस्ट्री के सितारों का लग्जरी लाइफस्टाइल और महंगे गैजेट्स से पुराना रिश्ता रहा है। बाजार में नया मॉडल आते ही कई स्टार्स इसके अलग-अलग कलर वेरिएंट्स के साथ नजर आने लगे हैं। एक्टर रितेश देशमुख ने सोशल मीडिया पर नीले रंग के फोन के साथ अपनी फोटो पोस्ट की और लिखा कि मेरे वाला ब्लू। वहीं उनकी पत्नी जेनेलिया देशमुख, एक्ट्रेस नेहा धूपिया और करिश्मा तन्ना ने बरगंडी कलर के मॉडल को पसंद किया और अपनी तस्वीरें शेयर कीं। इससे पहले इस महीने आयोजित हुए कंपनी के एक इवेंट में सिंगर एपी ढिल्लों और एक्ट्रेस तृप्ति डिमरी भी शामिल हुए थे, जहां उन्होंने कंपनी के सीईओ से मुलाकात की थी। मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु स्टोर्स के बाहर लगी कतारें भारत में आज शुक्रवार 18 सितंबर से एपल के नए फ्लैगशिप स्मार्टफोन आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स की बिक्री शुरू हो गई है। देश भर के एपलल स्टोर्स और अधिकृत रिटेलर्स के बाहर नए आईफोन को सबसे पहले खरीदने के लिए खरीदारों की भीड़ है। लॉन्च डे पर एपल के रिटेल स्टोर्स तय समय से पहले यानी सुबह 8 बजे खोल दिए गए। भारत में एपल के कुल 6 रिटेल स्टोर है। मुंबई में दो, दिल्ली, नोएडा, बेंगलुरु और पुणे में एक स्टोर है। ये खबर भी पढ़ें आईफोन 18 के लॉन्च इवेंट में पहुंची तृप्ति डिमरी:एपी ढिल्लों भी नजर आए; एपल के सीईओ जॉन टर्नस से मुलाकात की एक्ट्रेस तृप्ति डिमरी और सिंगर एपी ढिल्लों बुधवार को अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित क्यूपर्टिनो पहुंचे। दोनों ने यहां आयोजित एपल के आईफोन 18 लॉन्च इवेंट में हिस्सा लिया। पूरी खबर पढ़ें
मूवी रिव्यू-'वाइब':कुणाल खेमू की फिल्म पहले हंसाती है, लेकिन इंटरवल के बाद समझना मुश्किल हो जाता है- क्या हो रहा है?
रेटिंग: 2/5 अवधि: 2 घंटे 25 मिनट शैली: कॉमेडी निर्देशक: कुणाल खेमू मुख्य कलाकार: कुणाल खेमू, स्पर्श श्रीवास्तव, प्रीति जिंटा, वंशिका धीर, यशपाल शर्मा, दिनेश लाल यादव रिलीज डेट: 18 सितंबर 2026 कुणाल खेमू की फिल्म ‘वाइब’ शुरू होते ही पुरानी याद ताजा करती है। ‘मडगांव एक्सप्रेस’ में तीन दोस्तों की जिंदगी में बवाल था, यहां दो दोस्त हैं और बवाल सीधा देश की सुरक्षा तक पहुंच गया है। हार्दिक और बग्स की जोड़ी शुरू में कमाल लगती है। दोनों की केमिस्ट्री, कुणाल का टाइमिंग वाला ह्यूमर और कुछ मजेदार संवाद फिल्म को अच्छी रफ्तार देते हैं। पहला हाफ देखकर लगता हैचलो भाई, कुणाल फिर फॉर्म में हैं। फिर इंटरवल होता है और फिल्म अपना ट्रैक बदल देती है। फिल्म की कहानी कैसी है हार्दिक यानी कुणाल खेमू नशे की लत से बाहर निकलकर जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है। उसका दोस्त बग्स यानी स्पर्श श्रीवास्तव उसे अपनी सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी दिला देता है। लेकिन हार्दिक का ध्यान नौकरी से ज्यादा नई इंटर्न करीना यानी वंशिका धीर पर है। दोनों के बीच बात आगे बढ़ती है और फिर एक ऐसा मामला सामने आता है, जिसकी वजह से हार्दिक और बग्स की एंट्री हो जाती है मैडम एच यानी प्रीति जिंटा की दुनिया में। अब ये दोनों पहुंच जाते हैं एक ऐसे मिशन में, जिसके लिए शायद इनसे ज्यादा गलत लोगों को चुनना मुश्किल था। यहीं तक फिल्म काफी मजेदार है। इसके बाद कहानी में गैंगस्टर, आतंकवाद, एआई, सॉफ्टवेयर अटैक, बड़ी साजिश और सुपर-स्ट्रेंथ वाला सीरम तक आ जाता है। मतलब दो दोस्तों की कॉमेडी से शुरू हुई फिल्म अचानक बोलती है,भाई, अब देश बचाना है। फिल्म में एक्टिंग कैसी है कुणाल खेमू हार्दिक के रोल में शानदार काम किया है। वह बेवकूफ दिखते हुए भी प्यारे लगते हैं और उनकी बॉडी लैंग्वेज कई बार खुद ही हंसा देती है। हालांकि परेशानी यह है कि उनका यह अंदाज अब थोड़ा जाना-पहचाना लगता है। ‘मडगांव एक्सप्रेस’, ‘लूटकेस’ और ‘गो गोवा गॉन’ के बाद इस बार वही मजाकिया कुणाल कुछ नया कम देते हैं। स्पर्श श्रीवास्तव सबसे बड़ा सरप्राइज हैं। बग्स के रोल में उनकी घबराहट और चेहरे के एक्सप्रेशन कई बार कुणाल से भी ज्यादा हंसा देते हैं। प्रीति जिंटा की मैडम एच स्टाइलिश है और उनका एक्शन सीन फिल्म के मजेदार हिस्सों में आता है। वंशिका धीर खूबसूरत दिखती हैं, लेकिन उनके रोल में करने को ज्यादा कुछ नहीं है। यशपाल शर्मा और दिनेश लाल यादव ठीक हैं, जबकि शर्मिला टैगोर का छोटा-सा कैमियो अच्छा लगता है। फिल्म का निर्देशन कैसा है कुणाल खेमू को कॉमेडी की समझ है। दिक्कत यह है कि उन्हें अपनी फिल्म पर थोड़ा और भरोसा करना चाहिए था। पहले हाफ में हार्दिक और बग्स ही काफी हैं। उनकी छोटी-छोटी बेवकूफियां ही फिल्म चला रही हैं। लेकिन दूसरे हाफ में फिल्म परत-दर-परत चीजें जोड़ती जाती है। एक गैंगस्टर चाहिए। डाल दो। एआई चाहिए। डाल दो। सॉफ्टवेयर अटैक चाहिए। डाल दो। सीरम चाहिए। वो भी डाल दो। नतीजा कहानी आगे कम बढ़ती है, सामान ज्यादा बढ़ता जाता है। फिल्म का सबसे बड़ा मजा वहीं था जहां वह खुद को ज्यादा गंभीर नहीं ले रही थी। काश, कुणाल ने उसी रास्ते पर फिल्म को आखिर तक चलाया होता। फिल्म का तकनीकी पक्ष कैसा है फिल्म दिखने में अच्छी है। लोकेशन अच्छी हैं, कैमरा वर्क बढ़िया है और एक्शन सीक्वेंस में पैसा साफ दिखाई देता है। लेकिन दूसरे हाफ में फिल्म की रफ्तार गिर जाती है। कुछ सीन्स जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं और कहानी कई जगह खिंचती हुई महसूस होती है। फिल्म में कमियां क्या हैं सबसे बड़ी कमी है ओवरडोज। फिल्म में कॉमेडी चाहिए थी, लेकिन बाद में एक्शन भी चाहिए, थ्रिल भी चाहिए, बड़ा विलेन भी चाहिए और देश बचाने वाला ड्रामा भी चाहिए। सब कुछ चाहिए और जब फिल्म सब कुछ देने लगती है, तो जो सबसे अच्छा था हार्दिक और बग्स की कॉमेडी वही पीछे छूट जाती है। रोमांस भी थोड़ा लंबा है और क्लाइमेक्स तक आते-आते फिल्म जरूरत से ज्यादा ओवर-द-टॉप हो जाती है और कुणाल का शर्ट उतारकर मसल्स दिखाने वाला सीन। भाई, ये कॉमेडी फिल्म है या अचानक फिटनेस विज्ञापन? फिल्म का म्यूजिक कैसा है म्यूजिक ठीक है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं जो फिल्म खत्म होने के बाद साथ बाहर आए। कुछ गाने अच्छे लगते हैं, लेकिन कुछ जगह ये कहानी की रफ्तार को और धीमा करते हैं। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘वाइब’ का पहला हाफ बताता है कि कुणाल खेमू एक और शानदार कॉमेडी दे सकते थे। दूसरा हाफ बताता है कि उन्होंने खुद ही फिल्म को ज्यादा बड़ा बनाने के चक्कर में मामला बिगाड़ दिया। कुणाल और स्पर्श की जोड़ी फिल्म की जान है। कुछ संवाद और सीन्स सच में मजेदार हैं। बस दिक्कत यही है कि फिल्म को जितना कम दिखाना चाहिए था, उससे ज्यादा दिखा दिया गया। शुरुआत में वाइब सेट होती है, इंटरवल के बाद फिल्म खुद ही उसे बिगाड़ देती है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 









