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SC Stance on NTA Reforms: NTA दफ्तर पहुंच सकते हैं SC के जज, कहा- हम खुद ऑफ‍िस जाकर देखेंगे NTA का स‍िस्टम

देशभर की पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि NTA को अब "क्विक फिक्स" या अस्थायी उपायों की नहीं, बल्कि एक स्थायी और मजबूत संस्थागत ढांचे की जरूरत है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने NTA में चल रहे सुधारों की निगरानी करते हुए कई महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं।

"हम खुद आकर मैनपावर और व्यवस्था देखेंगे" - सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को जानकारी दी कि NTA को दिल्ली के मिंटो रोड के पास नया और स्थायी दफ्तर मिल गया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा ने कहा, "हम खुद किसी दिन NTA के दफ्तर आकर देखेंगे कि बनाया गया सिस्टम वास्तव में काम कर रहा है या नहीं, मैनपावर कैसी है और व्यवस्थाएं जमीनी स्तर पर मौजूद हैं या केवल कागजों पर।"

पीठ ने इस बात पर बल दिया कि पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन समिति और नंदन नीलेकणी समिति की सिफारिशें सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

हाई-पावर कमेटी को 2 हफ्ते की मोहलत, महीने के अंत तक रिपोर्ट
सॉलिसिटर जनरल ने शीर्ष अदालत को अवगत कराया कि नंदन नीलेकणी के नेतृत्व वाली उच्चस्तरीय टास्क फोर्स सभी हितधारकों के साथ गहन विचार-विमर्श कर रही है और इस महीने के अंत तक अपनी व्यापक रिपोर्ट सौंपेगी। सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर कमेटी के साथ समन्वय कर रहे संयुक्त सचिव को दो सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट के 7 प्रमुख निर्देश
अदालत ने परीक्षाओं के सुरक्षित संचालन और NTA में बड़े बदलावों के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश तय किए हैं:-

  1. वेबसाइट पर हलफनामा: NTA अब तक किए गए सभी सुधारों और प्रगति का ब्योरा अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करे, ताकि अभ्यर्थियों और अभिभावकों में पारदर्शिता रहे।
  2. स्थायी स्टाफ की नियुक्ति: NTA को प्रतिनियुक्ति पर निर्भरता कम करके कम से कम 50% स्थायी और विशेषज्ञ कर्मचारियों को नियुक्त करना होगा।
  3. वैधानिक आधार: NTA को कानूनी रूप से अधिक मजबूत और स्वायत्त बनाने के लिए वैधानिक दर्जा देने की संभावना पर विचार होगा।
  4. चरणबद्ध डिजिटल शिफ्टिंग: लिखित/पेन-पेपर परीक्षाओं को चरणबद्ध तरीके से कंप्यूटर आधारित टेस्ट में बदलने की योजना पर काम किया जाए।
  5. सुलभ सुझाव तंत्र: वकीलों, राज्यों, विशेषज्ञों और छात्रों के सुझाव लेने के लिए एक विशेष ई-मेल आईडी सार्वजनिक की जाएगी।
  6.  संस्थागत समन्वय: राज्यों और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स का बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।
  7. जवाबदेही तय होना: किसी भी स्तर पर चूक होने पर व्यक्तिगत और संस्थागत जवाबदेही तय की जाएगी।

छात्रों के भविष्य और प्रणाली में सुधार की उम्मीद
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बार-बार की गड़बड़ियों से छात्रों और उनके परिवारों को जो मानसिक पीड़ा होती है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट का मुख्य उद्देश्य NTA का ऐसा स्थायी संस्थागतीकरण करना है, जिससे आने वाले सालों में पेपर लीक और सिस्टम की नाकामियों की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो सके।

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TMC Row: ममता बनर्जी गुट को कौन सा नया नाम और सिंबल मिला? ‘डेमोक्रेटिक TMC’ को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के लिए अलग-अलग पार्टी नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं। यह व्यवस्था आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनाव के लिए की गई है।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न मिला है। वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।

TMC के दोनों गुटों को मिला नया नाम और चुनाव चिह्न
चुनाव आयोग के फैसले के बाद आगामी उपचुनाव में दोनों गुट अलग नाम और अलग चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरेंगे।

गुट     नया पार्टी नाम     चुनाव चिह्न
ममता बनर्जी गुट  ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस फुटबॉल खिलाड़ी
दूसरा TMC गुट  डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस  लिफाफा

दोनों गुटों को नए नाम और चिह्न आवंटित करने का फैसला चुनाव आयोग के उस अंतरिम आदेश के बाद आया है, जिसमें मूल पार्टी नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई थी।

क्यों बदला TMC का नाम और चुनाव चिह्न?
तृणमूल कांग्रेस के भीतर संगठन और पार्टी की पहचान को लेकर दो गुटों के बीच विवाद चल रहा है। इसी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को अंतरिम तौर पर फ्रीज कर दिया।

आयोग ने दोनों पक्षों को नए पार्टी नाम और उपलब्ध चुनाव चिह्नों के विकल्प देने को कहा था। इसके बाद आयोग ने आगामी उपचुनाव की प्रक्रिया को देखते हुए दोनों गुटों के लिए अलग पहचान तय की।

पुराने TMC नाम और ‘फूल-घास’ सिंबल का क्या हुआ?
फिलहाल दोनों गुट ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। यह रोक अंतरिम व्यवस्था के तौर पर लागू की गई है।

इसका मतलब है कि 6 अक्टूबर को होने वाले पश्चिम बंगाल उपचुनाव में EVM पर पुराने TMC नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं होगा। दोनों गुट अपने-अपने आवंटित नाम और चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ेंगे।

6 अक्टूबर के उपचुनाव पर क्या होगा असर?
चुनाव आयोग का यह फैसला आगामी 6 अक्टूबर के पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण है। दोनों गुटों को अलग नाम और चुनाव चिह्न मिलने से चुनावी प्रक्रिया में उनकी पहचान अलग रहेगी।

हालांकि, यह व्यवस्था फिलहाल अंतरिम है। मूल ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न पर अंतिम अधिकार को लेकर चुनाव आयोग का अंतिम फैसला अभी बाकी है।

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  Sports

IND vs JPN: वैभव सूर्यवंशी बाहर या संजू करेंगे ओपन? जानें कैसी होगी भारत की प्लेइंग XI

एशियन गेम्स से पहले भारतीय क्रिकेट टीम को जापान के खिलाफ एकमात्र टी20 मैच खेलना है. इस मैच के लिए दोनों ही टीमों के खिलाड़ी उत्साहित हैं. इसके साथ ही फैंस के मन में फिर से यह सवाल उठ रहा है कि क्या वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में मौका मिलेगा या फिर संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा के साथ पारी की शुरुआत करेंगे. Mon, 21 Sep 2026 22:20:30 +0530

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