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Marathi Film Selected For Oscars 2027 | ऑस्कर के लिए मराठी फिल्म 'गोंधल' चुनी गई भारत की आधिकारिक एंट्री, FFI ने की घोषणा

मराठी सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण में, मराठी फिल्म 'गोंधल' (Gondhal) को 99वें एकेडमी अवॉर्ड्स (Oscars 2027) में 'बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म' कैटेगरी के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री (Official Entry) के रूप में चुना गया है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) ने शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को इस फैसले की औपचारिक घोषणा की। सिलेक्शन कमिटी के चेयरमैन पी. शेषद्रि के अनुसार, ऑस्कर की रेस में शामिल 33 दावेदार फिल्मों में से 'गोंधल' का चयन सर्वसम्मति से किया गया।

ऑस्कर 2027 के लिए फ़िल्म के चुने जाने पर 'गोंधल' के डायरेक्टर की प्रतिक्रिया
इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए, फ़िल्म के डायरेक्टर संतोष दवखर ने अपने इंस्टाग्राम पर बधाई देने वाली पोस्ट शेयर की। उन्होंने 'गोंधल' के पोस्टर वाला एक क्रिएटिव शेयर किया, जिस पर लिखा था, "हुर्रे! क्या खबर है! टीम गोंधल के लिए।" 

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ध्यान देने वाली बात है कि फ़िल्म को 'बेस्ट इंटरनेशनल फ़ीचर फ़िल्म' कैटेगरी के लिए चुना गया है, जिसे पहले 'बेस्ट फ़ॉरेन लैंग्वेज फ़िल्म' कैटेगरी के नाम से जाना जाता था। गौरतलब है कि अब तक कोई भी भारतीय फ़िल्म इस कैटेगरी में जीत नहीं पाई है। पिछले साल, नीरज घायवान की 'होमबाउंड' को ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर चुना गया था। हालाँकि, यह फ़ाइनल नॉमिनेशन में जगह नहीं बना पाई थी।

मराठी फ़िल्म 'गोंधल' के बारे में
संतोष दवखर द्वारा लिखित और निर्देशित यह फ़िल्म ग्रामीण महाराष्ट्र पर आधारित है। इसकी कहानी एक नवविवाहित जोड़े से जुड़े पारंपरिक अनुष्ठान की एक रात के दौरान आगे बढ़ती है। इसमें सुरेश विश्वकर्मा, कैलाश वाघमारे और माधवी जुवेकर मुख्य भूमिकाओं में हैं।

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'गोंधल' का बॉक्स ऑफ़िस कलेक्शन और IMDb रेटिंग
यह फ़िल्म 14 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी, लेकिन बॉक्स ऑफ़िस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। ट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क (Sacnilk) के अनुसार, इसने 90 लाख रुपये की कमाई की, जबकि इसका भारत में नेट कलेक्शन 84 लाख रुपये रहा। बॉक्स ऑफिस पर औसत कमाई के बावजूद, इस फ़िल्म को 4.2 हज़ार रजिस्टर्ड यूज़र्स से 10 में से 8.9 की शानदार IMDb रेटिंग मिली है।

ऑस्कर 2027 की तारीख
99वें ऑस्कर अवॉर्ड्स रविवार, 14 मार्च 2027 को आयोजित किए जाएंगे। वहीं, ऑस्कर 2027 के लिए नॉमिनेशन की घोषणा 21 जनवरी 2027 को की जाएगी।

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Health Tips: पंचकर्म की Nasya Therapy से डिटॉक्स होगी बॉडी, लेकिन Pregnant Women रहें दूर

आयुर्वेद में कुछ बीमारियों के इलाज के समय पंचकर्म थेरेपी ली जाती है। वहीं मेंटल हेल्थ, साइनस की समस्या, सिर से जुड़ी समस्या दूर करने और फर्टिलिटी में मदद करने के लिए नस्य सबसे ज्यादा पंचकर्म थेरेपी असरदार है। लेकिन हर किसी के लिए नस्य थेरेपी को सेफ नहीं माना गया है। अगर गलत समय और बिना नस्य एक्सपर्ट के इस थेरेपी को कराया जाता है, तो इसके फायदे की जगह नुकसान हो सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस थेरेपी से जुड़ी कुछ अहम बातें बताने जा रहे हैं कि जिससे कि नस्य पंचकर्म थेरेपी का फायदा आपको मिल सके।

क्या है नस्य पंचकर्म थेरेपी

नस्य का मतलब है नाक के जरिए आयुर्वेदिक दवाएं देना, जिससे नाक, कान, गले और सिर से जुड़ी समस्याओं को दूर किया जा सके। इस थेरेपी के जरिए माइग्रेन, हार्मोनल असंतुलन, क्रोनिक साइनसाइटिस, बालों का झड़ना, गर्दन में अकड़न,फर्टिलिटी प्रोब्लम्स एवं न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर जैसी समस्याओं को दूर किया जा सकता है। वहीं इसके कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होते हैं। यह पंचकर्म इलाज का एक हिस्सा होता है, जब इसको आयुर्वेद के जानकार करते हैं। तो यह शरीर में वात, पित्त-कफ का संतुलन वापस लाने में ज्यादा असरदार होता है। यह प्रोसेस सिर्फ नाक में तेल डालने तक ही सीमित नहीं है। बल्कि नस्य पंचकर्म थेरेपी के दौरान -

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प्रोसेस से पहले फेस की मालिश यानी अभ्यंग उपचार किया जाता है।

हल्की स्टीम थेरेपी दी जाती है, जिसको आयुर्वेद में स्वेदन इलाज बोलते हैं।

औषधीय तेल डालना

प्रोसेस के बाद गरारे करवाए जाते हैं और फिर आराम करने की सलाह दी जाती है।

शरीर की एक नहीं बल्कि कई समस्याओं को दूर करने के लिए नस्य पंचकर्म थेरेपी को प्रभावी माना गया है। लेकिन यह थेरेपी की सलाह कुछ लोगों को नहीं दी जाती है।

हर किसी के लिए नहीं है पंचकर्म थेरेपी

प्रेग्नेंसी

प्रेग्नेंसी एक बेहद संवेदनशील स्थिति होती है और ऐसे में नस्य कर्म से प्रेग्नेंट महिला को कई तरह की समस्या हो सकती है।
इससे वात बढ़ सकता है।
शरीर में दोषों की अनचाही हलचल शुरू हो सकती है।
हार्मोनल प्रोसेस पर भी असर हो सकता है।
आयुर्वेद प्रेग्नेंसी के के दौरान की देखभाल को सपोर्ट करता है। लेकिन इस थेरेपी को हल्के-फुल्के ढंग से नहीं करना चाहिए।

अगर पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग की समस्या है, तो इस दौरान शरीर नेचुरल रूप से साफ होता है। इस दौरान वात सक्रिय हो जाता है। इस दौरान यह थेरेपी लेने से शरीर में नीचे की ओर होने वाला बहाव रुक सकता है। इसलिए पीरियड्स होने तक इसको टाल देना बेहतर है।

इसके अलावा साइनस की गंभीर समस्या, तेज फीवर, गले में इंफेक्शन, ज्यादा सर्दी-जुकाम की समस्या रहने पर पहले इन सबका इलाज किया जाता है। क्योंकि नस्य पंचकर्म थेरेपी से शरीर डिटॉक्स होता है और इससे साइनस, तेजी फीवर या सर्दी-जुकाम की समस्या बढ़ सकती है।

अगर हाल ही में मस्तिष्क की सर्जरी, नाक की सर्जरी, सेप्टम ठीक करने की सर्जरी या फिर सिर में चोट जैसी स्थिति के होने पर भी नस्य थेरेपी नहीं ली जा सकती है।

अगर अचानक से माइग्रेन की समस्या तेज हो गई है। तो इस स्थिति में भी नस्य थेरेपी नहीं लेनी चाहिए। क्योंकि इससे माइग्रेन की समस्या अधिक बढ़ सकती है।

अगर हाई बीपी की समस्या हो और ब्लड प्रेशर कंट्रोल नहीं हो रहा है, तो इस स्थिति में भी यह थेरेपी लेने से पहले आयुर्वेदिक इलाज के माध्यम से बीपी को कंट्रोल किया जाता है। वहीं नियमित चेकअप के बाद अगर बीपी कंट्रोल हो जाता है, तो फिर उसके बाद ही यह थेरेपी कराने की सलाह दी जाती है।

यदि किसी व्यक्ति की उम्र ज्यादा है और वह कमजोर है। इम्यूनिटी कम हो या हमेशा थकान महसूस करने वाले बुजुर्गों को भी यह थेरेपी नहीं दी जाती है। क्योंकि उनमें नस्य पंचकर्म की प्रक्रिया को सहने की क्षमता कम हो सकती है। 

इसके अलावा 7 साल से कम उम्र के बच्चों को नस्य थेरेपी नहीं दी जाती है। इसका मुख्य कारण छोटे बच्चों की नाक की नली नाजुक और बेहद संवेदनशील होती है। ऐसे में इस थेरेपी के दौरान बच्चे को नाक में जलन या असुविधा हो सकती है।

जिन लोगों को ब्लीडिंग डिसऑर्डर की समस्या होती है, जैसे प्लेटलेट्स काउंट कम होना, नाक से बार-बार खून आने की समस्या, ब्लड क्लॉट जैसी समस्या होने पर भी नस्य थेरेपी की सलाह नहीं दी जाती है।

जिन लोगों को बेचैनी, घबराहट या फिर क्लॉस्ट्रोफोबिया की समस्या होती है। उनको नस्य थेरेपी की सलाह नहीं दी जाती है। आयु्र्वेद एक्सपर्ट सबसे पहले पैनिक अटैक या घबराहट जैसी स्थितियों को समझकर इलाज करते हैं। वहीं जब मरीज ठीक हो जाता है, तो जरूरत होने पर नस्य थेरेपी की शुरूआत करते हैं।

इन स्थितियों के अलावा आयुर्वेद एक्सपर्ट मरीज फिजिकल स्थितियों को समझकर नस्य पंचकर्म थेरेपी की सलाह देते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर कई इन्फुएंसर नस्य ट्रीटमेंट घर पर खुद करने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन इसके साथ कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।

वात-पित्त-दोष की समझ
सही तेल का चुनाव
शारीरिक जांच
 
वहीं सही समय और सही तकनीक मालूम ना होने पर शारीरिक परेशानी बढ़ सकती है। जैसे- सिरदर्द, जलन, ज्यादा बलगम बनना, नाक में जलन होना और चक्कर आना आदि या अन्य कोई फिजिकल या मेंटल परेशानी शुरू हो सकती है। इसलिए सलाह दी जाती है कि किसी प्रोफेशनल आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से ही सुरक्षित आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट करवाना चाहिए।

नस्य थेरेपी कब होती है सेफ

इसको किसी क्वालिफाइड पंचकर्म डॉक्टर की देखरेख में करवाना चाहिए।

इसको किसी भरोसेमंद आयुर्वेदिक सेंटर में किया जाना चाहिए।

इसको दोष के हिसाब से कस्टमाइज किया जाए।

इसको सही जांच के बाद किया जाए।

नस्य ट्रीटमेंट कब बंद करना चाहिए

देखने में परेशानी महसूस होना
तेज सिरदर्द की समस्या होना
लगातार उल्टी आना
तेज जलन होना
नाक से लगातार खून आना

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