Kidney खराब होने के ये शुरुआती लक्षण, सूजन और पेशाब में बदलाव न करें नजरअंदाज
किडनी शरीर का सबसे जरुरी हिस्सा है। गौरतलब है कि किडनी हमारे खून को साफ रखती है, शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालती और शरीर में पानी व तरल पदार्थों का बैलेंस बनाए रखती है।
लेकिन क्या आप जानते है कि किडनी से जुड़ी ज्यादातर बीमारियां 'साइलेंट' होती है। शुरुआती समय में इसके लक्षण नजर नहीं आते हैं। कई बार लोग इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। समय रहते हुए शरीर के इन संकेतों को भी न भूलें। आइए आपको बताते हैं आखिर कौन से लक्षण हैं, जिन्हें देखकर तुरंत सतर्क रहना जरुरी है।
पेशाब के रंग में बदलाव
बार-बार रात के समय पेजाब जा रहे हैं, तो इसे जरा भी हल्के में न लें। वहीं, पेशाब का रंग गहरा होना, उसमें झाग आना या पेशाब करते समय जलन महसूस होती है, तो इसको सीधा इशारा है कि आपकी किडनी ठीक से अपना कार्य नहीं कर रही है।
शरीर के अंगों में बेवजह सूजन
यदि किडनी खून को सही से फिल्टर नहीं करेगी, तो शरीर में फालतू पानी और सोडियम जमा होने लगता है। जिसकी वजह से आपके पैरों, टखनों, हाथों और चेहरे पर सूजन दिखाई देती है। यदि आप सुबह सोकर उठने पर आपको अपनी आंखों के आसापास सूजन नजर आए, तो किडनी की समस्या हो सकती है।
थकान और कमजोरी होना
जब किडनी में गड़बड़ी होती है, तो शरीर से टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकल पाते और खून में जमा होने लगते हैं। वैसे इन हानिकारक तत्वों के जमाव की वजह से व्यक्ति को हमेशा थकान और कमजोरी का एहसास होता रहता है।
भूख कम लगना और जी मिचलाना
शरीर में टॉक्सिंस जमा हो जाता है, तो इसका असर हमारे पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। यदि आपकी भूख अचानक कम हो गई, तो उल्टी या जी मिचलाने की शिकायते है, फिर आपके मुंह का स्वाद भी फीका हो जाता है, तो यह संकेत है कि आपकी किडनी के अस्वस्थ होने का संकेत हो सकता है।
स्किन का रूखा होना और खुजली मचना
जब हानिकारक तत्व शरीर से बाहर नहीं निकल पाते, तो वे खून में ही इकट्ठे हो जाते है। इसका सीधा असर आपकी त्वचा पर दिखाई देता है। यह आपकी स्किन को ड्राई और खुजली व जलन की समस्या शुरु हो सकती है। कई बार इस वजह से त्वचा का रंग भी फीका दिखाई देता है।
किडनी को हमेशा स्वस्थ रखने के आसान उपाय
- खूब पानी पिएं: दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना किडनी को डिटॉक्स करने में सबसे अच्छा तरीका है।
- हेल्दी डाइट का सेवन करें: संतुलित आहार का सेवन करें। खाने में नमक की मात्रा कम रखें और प्रोसेस्ड फूड्स से दूरी बनाएं।
- नियमित जांच करवाएं: ध्यान रहे कि समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर जरुर चेक करें, क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज किडनी रोगों के सबसे मुख्य कारण माना जाता है।
Health Tips: छोटे से सिंघाड़े में छिपे हैं सेहत के कई राज, दिल से लेकर ब्लड शुगर तक के लिए है खास
सिंघाड़े का मौसम भारत में बहुत कम समय के लिए आता है, इसलिए इस खास मौसमी फल को नजरअंदाज न करें। ताजा सिंघाड़ा स्वादिष्ट होने के साथ-साथ कई जरूरी पोषक तत्व भी देता है। इसमें प्राकृतिक रूप से कम वसा होती है और यह पोटैशियम, विटामिन बी6, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट पॉलीफेनॉल का अच्छा स्रोत है। 100 ग्राम ताजे सिंघाड़े में करीब 115 कैलोरी होती है।
दिल और ब्लड प्रेशर के लिए फायदेमंद हो सकता है
सिंघाड़े में पोटैशियम अच्छी मात्रा में पाया जाता है और इसमें सोडियम प्राकृतिक रूप से बहुत कम होता है। इसी वजह से इसे दिल और ब्लड प्रेशर के लिए अनुकूल आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि, किसी भी खास स्वास्थ्य स्थिति में अपनी डाइट डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।
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वजन को संभालने में मिल सकती है मदद
सिंघाड़े में पाए जाने वाले पॉलीफेनॉल पर वजन और शरीर में जमा होने वाली चर्बी को लेकर अध्ययन किए गए हैं। इन अध्ययनों में सिंघाड़े के अर्क ने वजन बढ़ने और शरीर में चर्बी जमा होने को कम किया। यानी सही मात्रा में ताजा सिंघाड़ा वजन को संभालने वाली डाइट का हिस्सा बन सकता है।
ब्लड शुगर को लेकर भी हुई है रिसर्च
सिंघाड़े में मौजूद कुछ यौगिकों पर ब्लड शुगर से जुड़े अध्ययन भी हुए हैं। रिसर्च में देखा गया है कि ये यौगिक शरीर में ग्लूकोज के इस्तेमाल और जीएलयूटी4 की गतिविधि को बेहतर करने में भूमिका निभा सकते हैं। जीएलयूटी4 शरीर में ग्लूकोज को खून से मांसपेशियों की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है।
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कैंसर को लेकर क्या कहती है रिसर्च?
सिंघाड़े में मौजूद कुछ पॉलीफेनॉल पर कैंसर से जुड़ी शुरुआती प्रयोगशाला रिसर्च भी हुई है। कुछ अध्ययनों में इन पॉलीफेनॉल ने पेट, स्तन और आंत के कैंसर की कोशिकाओं की बढ़त को धीमा किया। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये प्रयोगशाला स्तर के अध्ययन हैं, इसलिए इन्हें इंसानों में कैंसर के इलाज का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
एक दिन में कितना सिंघाड़ा खाएं?
करीब 100 ग्राम ताजा या उबला हुआ सिंघाड़ा एक सामान्य मात्रा हो सकती है। इसे अपनी रोजाना की डाइट में कई आसान तरीकों से शामिल किया जा सकता है।
ऐसे खाएं सिंघाड़ा
सिंघाड़े को उबालकर उसमें नींबू और मसाले डालकर खा सकते हैं। इससे सिंघाड़े की चाट या दही वाली चाट भी बनाई जा सकती है। इसके अलावा सिंघाड़े की सब्जी बनाकर, सलाद या दूसरी सब्जियों के साथ मिलाकर भी खाया जा सकता है। सिंघाड़े के आटे से चिल्ला या रोटी भी बनाई जाती है।
सिंघाड़े के आटे का रखें ध्यान
ताजे सिंघाड़े की तुलना में सिंघाड़े का आटा काफी ज्यादा कैलोरी वाला होता है। इसलिए अगर आप सिंघाड़े का आटा खा रहे हैं तो इसकी मात्रा थोड़ी कम रखना बेहतर है। ताजा सिंघाड़ा और सिंघाड़े का आटा एक जैसी मात्रा में खाने पर समान कैलोरी नहीं देते।
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