आज के समय में बढ़ती पेट्रोल कीमतों ने हर दोपहिया वाहन चालक की जेब पर असर डाला है। ऐसे में स्कूटर खरीदते समय लोग सबसे पहले उसके माइलेज पर ध्यान देते हैं। हालांकि, अच्छी माइलेज केवल इंजन या कंपनी के दावे पर निर्भर नहीं करती, बल्कि वाहन की नियमित देखभाल भी इसमें अहम भूमिका निभाती है। कई लोग ईंधन बचाने के लिए धीरे-धीरे स्कूटर चलाते हैं, समय पर सर्विस करवाते हैं और अनावश्यक एक्सेलरेशन से बचते हैं। लेकिन एक बेहद आसान और जरूरी मेंटेनेंस टिप को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बिना किसी अतिरिक्त खर्च के माइलेज बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
सही टायर प्रेशर क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
स्कूटर के टायर ही सड़क और वाहन के बीच संपर्क का माध्यम होते हैं। यदि टायर में हवा का दबाव कंपनी द्वारा निर्धारित स्तर से कम हो जाता है, तो टायर सड़क पर अधिक सतह से चिपकने लगते हैं। इससे रोलिंग रेजिस्टेंस बढ़ जाता है और स्कूटर को आगे बढ़ाने के लिए इंजन को ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है। परिणामस्वरूप ईंधन की खपत बढ़ जाती है और माइलेज धीरे-धीरे कम होने लगता है।
कम हवा वाले टायर कैसे बढ़ाते हैं पेट्रोल की खपत?
जब टायर में पर्याप्त हवा नहीं होती, तो स्कूटर का संतुलन और गति दोनों प्रभावित होते हैं। इंजन को हर बार अतिरिक्त दबाव के साथ काम करना पड़ता है, जिससे हर किलोमीटर पर अधिक पेट्रोल खर्च होता है। शुरुआत में इसका असर महसूस नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक कम एयर प्रेशर के साथ वाहन चलाने से माइलेज में स्पष्ट गिरावट दिखाई देने लगती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ समय-समय पर टायर प्रेशर जांचने की सलाह देते हैं।
केवल माइलेज ही नहीं, मिलते हैं कई अतिरिक्त फायदे
सही टायर प्रेशर बनाए रखने का लाभ केवल ईंधन बचाने तक सीमित नहीं है। इससे स्कूटर की ओवरऑल परफॉर्मेंस भी बेहतर होती है। सही हवा वाले टायर सड़क पर बेहतर पकड़ बनाए रखते हैं, जिससे वाहन अधिक स्थिर महसूस होता है। साथ ही मोड़ लेते समय, खराब रास्तों पर या अचानक ब्रेक लगाने की स्थिति में स्कूटर को नियंत्रित करना आसान हो जाता है। इससे दुर्घटना की संभावना भी कम हो सकती है।
टायर की उम्र बढ़ाने का आसान तरीका
कम हवा वाले टायर जल्दी और असमान तरीके से घिसते हैं। इससे कुछ ही समय में नए टायर खरीदने की नौबत आ सकती है। वहीं, यदि टायर में कंपनी द्वारा सुझाया गया एयर प्रेशर बना रहे, तो घिसाव संतुलित होता है और टायर अधिक समय तक उपयोग में आते हैं। इससे वाहन की रनिंग कॉस्ट भी कम होती है और बार-बार टायर बदलने का खर्च बच जाता है।
कितने अंतराल पर जांचें टायर प्रेशर?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सप्ताह में कम से कम एक बार या हर 10 से 15 दिन में टायर प्रेशर जरूर जांचना चाहिए। लंबी यात्रा पर निकलने से पहले भी हवा का दबाव चेक करना बेहतर रहता है। हमेशा वाहन निर्माता द्वारा बताए गए PSI (पाउंड प्रति वर्ग इंच) के अनुसार ही टायर में हवा भरवाएं। जरूरत से ज्यादा या कम हवा दोनों ही वाहन की परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकती हैं।
बेहतर माइलेज के लिए अपनाएं ये आसान आदतें
यदि आप अपने स्कूटर से अधिक माइलेज चाहते हैं, तो सही टायर प्रेशर के साथ-साथ समय पर सर्विसिंग, साफ एयर फिल्टर, अच्छी गुणवत्ता का इंजन ऑयल और संतुलित राइडिंग स्टाइल भी अपनाएं। तेज एक्सेलरेशन और अचानक ब्रेक लगाने से बचें। इन छोटी-छोटी आदतों से न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि स्कूटर की कार्यक्षमता और जीवनकाल भी बढ़ेगा।
स्कूटर का माइलेज बढ़ाने के लिए हमेशा बड़े बदलाव या महंगे मेंटेनेंस की जरूरत नहीं होती। कई बार केवल टायर में सही एयर प्रेशर बनाए रखने जैसी छोटी आदत भी बड़ा अंतर पैदा कर सकती है। इससे पेट्रोल की बचत होती है, टायर लंबे समय तक चलते हैं, वाहन सुरक्षित रहता है और आपकी जेब पर भी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता। इसलिए अगली बार पेट्रोल पंप जाएं, तो ईंधन भरवाने के साथ टायर प्रेशर की जांच करना बिल्कुल न भूलें।
- डॉ. अनिमेष शर्मा
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महिंद्रा ने भारत में नई Scorpio N (फेसलिफ्ट) लॉन्च की है, जिसकी शुरुआती कीमत ₹13.69 लाख (एक्स-शोरूम) है और टॉप मॉडल की कीमत ₹25.50 लाख है। कंपनी ने SUV के दमदार लुक या इंजन लाइनअप में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन इस अपडेट में ज़्यादा टेक्नोलॉजी और आरामदायक फीचर्स दिए गए हैं। 2022 में लॉन्च होने के बाद से ही Scorpio N काफी सफल रही है—अब तक 3.8 लाख से ज़्यादा लोग इसे खरीद चुके हैं। अब, और भी ज़्यादा फीचर्स के साथ, महिंद्रा SUV मार्केट में अपनी जगह और मज़बूत करना चाहती है। इसमें Z2, Z4, Z6, Z8S, Z8T और Z8L वैरिएंट्स शामिल हैं।
अगर आप टॉप-एंड Z8L मॉडल चुनते हैं, तो आपके पास 6 या 7-सीटर का ऑप्शन होगा। फेसलिफ्ट मॉडल डीलरशिप पर पहुँचने लगे हैं और खरीदारों को ये जल्द ही मिलने लगेंगे। बाहर से देखने पर यह गाड़ी ज़्यादातर वैसी ही लगती है—मज़बूत और मस्कुलर। लेकिन महिंद्रा ने ऊँचे ट्रिम्स में नए 18-इंच के डायमंड-कट अलॉय व्हील्स दिए हैं, जो इसके स्टाइल को और बेहतर बनाते हैं। निचले वैरिएंट्स में पुराने व्हील्स ही दिए गए हैं। एक बड़ा बदलाव है 540-डिग्री सराउंड व्यू सिस्टम, जिसके साथ ब्लाइंड व्यू मॉनिटर भी मिलता है। इनकी वजह से पार्किंग और ऑफ़-रोडिंग ज़्यादा सुरक्षित और कम तनावपूर्ण हो जाती है।
अंदर जाने पर बदलाव साफ़ नज़र आते हैं। नई 12.29-इंच की फ्लोटिंग HD टचस्क्रीन तुरंत आपका ध्यान खींचती है; यह 6 फिजिकल शॉर्टकट बटन के ऊपर लगी है, ताकि गाड़ी चलाते समय आपको मेन्यू में उलझना न पड़े। इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर भी अब पूरी तरह से डिजिटल है—10.24-इंच का और एकदम साफ़, जिससे सब कुछ काफी प्रीमियम लगता है। महिंद्रा ने कुछ काम के नए फीचर्स भी जोड़े हैं, जैसे 65W USB टाइप-C फास्ट चार्जर, पैनोरमिक सनरूफ और "एडवेंचर स्टैटिस्टिक्स" डिस्प्ले, जो इंजन की जानकारी, G-फोर्स, ऊंचाई और ऑफ-रोड से जुड़ी हर तरह की डिटेल्स को ट्रैक करता है। डैशबोर्ड का ओवरऑल लेआउट तो जाना-पहचाना ही है, लेकिन डिस्प्ले में हुए इन अपग्रेड्स से केबिन का माहौल वाकई शानदार हो गया है।
टॉप वेरिएंट्स में अभी भी शानदार फीचर्स मिल रहे हैं: लेवल 2 एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS), दमदार 12-स्पीकर वाला सोनी ऑडियो सिस्टम, हवादार फ्रंट सीट्स, इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक, लेदर अपहोल्स्ट्री, पावर-एडजस्टेबल ड्राइवर सीट और ऑटो-डिमिंग रियरव्यू मिरर। ADAS अभी भी सिर्फ़ Z8L वेरिएंट में ही मिलता है, इसलिए अगर आपको सबसे एडवांस्ड सेफ्टी फीचर्स चाहिए, तो आपको पता है कि कौन सा मॉडल देखना है। इंजन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आपको अभी भी 2.0-लीटर mStallion टर्बो-पेट्रोल या 2.2-लीटर mHawk टर्बो-डीज़ल इंजन का ऑप्शन मिलता है। दोनों इंजन के साथ 6-स्पीड मैनुअल या ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का ऑप्शन मिलता है।
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